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विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष

Tue, 05 Jun 2018 01:56 AM IST
Updated Tue, 05 Jun 2018 01:56 AM IST
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विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष
ब्यूरो/अरविंद सिंह, देहरादून
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प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से जहां इस बार विश्व पर्यावरण दिवस की थीम ‘बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन’ रखी गई वहीं स्वच्छ आबोहवा के लिए दुनियाभर में अलग पहचान रखने वाली देवभूमि के 81 नगर निकाय क्षेत्रों से प्रतिदिन औसतन 1600 टन कचरा निकल रहा है। चौंकाने वाले बात यह है कि इसमें 17 प्रतिशत प्लास्टिक कचरा शामिल है, जो प्रतिदिन औसतन 275 टन के आसपास बैठता है। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वर्ष 2017 में कराए गए सर्वे में प्रदेश में प्रदूषण की यह भयावह तस्वीर सामने आई है। यह चिंता का विषय है कि इसके निस्तारण के लिए किसी भी निकाय के पास ठोस उपाय नहीं है।
तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण को कम करने के लिए देश-दुनिया में चिंता जताई जा रही है और एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन प्लास्टिक मुक्त राज्य बनाने की कवायद के बीच प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 275 टन प्लास्टिक कचरा यहां की स्वच्छ आबोहवा में जहर घोल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते अगर एहतियाती कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति बेहद खराब हो सकती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में एक किलोग्राम प्लास्टिक कचरे को एकत्र करने के लिए औसतन प्रतिदिन 40 रुपये मध्य हिमालयी क्षेत्रों में 20 रुपये खर्च है। जबकि मसूरी और नैनीताल में प्लास्टिक कचरे के निस्तारण पर प्रति किलोग्राम 12 रुपये का खर्च आ रहा है।
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पर्यटक फैला रहे प्लास्टिक कचरा
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि देवभूमि में सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरा यहां आने वाले पर्यटक फैलाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में आने वाले लाखों पर्यटक अपने साथ हर साल कई टन प्लास्टिक का सामान ले जाते हैं और खुले में कहीं भी फेंक देते है। यह प्लास्टिक बाद में कचरे में तब्दील हो जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुबुद्धि के मुताबिक इस दिशा में जागरुकता अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि राज्य में आने वाले पर्यटकों को प्लास्टिक के कचरे से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा सके।
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राज्य के पर्वतीय इलाकों में जो प्लास्टिक कचरा फेंका जा रहा है, वह प्राकृतिक जल स्रोतों को चोक कर रहा है। इसके घातक परिणाम आने शुरू हो गए हैं। इसके अलावा राज्य में तमाम जगहों पर प्लास्टिक कचरे को खुले में भी जलाया जा रहा है, जिससे वायु प्रदूषण स्तर खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रहा है। पूरी दुनिया में प्लास्टिक कचरा तेजी से फैल रहा है। इसके निस्तारण और जागरुकता के उद्देश्य से इस बार पर्यावरण दिवस की थीम ‘बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन’ रखी गई है।

-एसपी सुबुद्धि, सदस्य सचिव, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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एक वर्ष में हर व्यक्ति इस्तेमाल करता है 9.7 किग्रा प्लास्टिक
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से देश के 60 बड़े शहरों में हुए सर्वे में यह बात सामने आई है कि पूरे देश में प्रतिदिन 25940 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, देश में हर साल प्रति व्यक्ति 9.7 किग्रा प्लास्टिक का इस्तेमाल करता है, जो बाद में कचरे के रूप में तब्दील होता है। सुकून देने वाली बात यह है कि देश में निकलने वाले प्लास्टिक कचरे में से 94 फीसदी कचरे को निस्तारित किया जा सकता है।
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