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अब पीपीपी मोड में उठेगा शहर का कूड़ा
Updated Fri, 07 Sep 2018 02:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून। अब शहर की साफ-सफाई व्यवस्था चकाचक होगी। करीब नौ माह की जद्दोजहद के बाद नगर निगम और चेन्नई, म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट (एमएसडब्ल्यू) प्राइवेट लिमिटेड के बीच घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए बृहस्पतिवार को अनुबंध हो गया है। कंपनी पीपीपी मोड पर शहर से कूड़ा उठाएगी। अक्तूबर से कंपनी के कर्मचारी काम शुरू करेंगे।
नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि पिछले वर्ष अक्तूबर में नगर निगम प्रशासन ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का कार्य पीपीपी मोड में देने का निर्णय लिया था। इसको लेकर एटूजेड चेन्नई एमएसडब्ल्यू प्रा.लि. और एक अन्य कंपनी ने आवेदन किया था। नगर स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में दो टीमें बनाई गई थी। टीमों ने तीनों कंपनियों का कार्य देखा। इसके बाद यह कार्य चेन्नई एमएसडब्ल्यू प्रा.लि. कंपनी को दिया गया। हालांकि यूजर चार्ज को लेकर पेच फंस गया था। कई माह की जद्दोजहद के बाद यूजर चार्ज को लेकर फंसा पेच भी खत्म हो गया है। अनुबंध के बाद अब कंपनी के वाहन घर-घर से कूड़ा एकत्र कर उसे कूड़ा ट्रांसफर सेंटर पहुंचाएंगे। वहां से बड़े वाहनों के जरिये शीशमबाड़ा स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट भेजा जाएगा। इस दौरान अपर नगर आयुक्त नीरज जोशी, वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सिंह, कंपनी के प्रोजेक्ट हेड मोहित द्विवेदी, वीरेंद्र रावत आदि मौजूद रहे।
अनुबंध से निगम को होगा लाभ
कंपनी से अनुबंध के बाद निगम को हर महीने 20 से 30 लाख रुपये यूजर चार्ज मिलने की संभावना है। वर्तमान की बात करें तो नगर निगम डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में हर महीने करीब 50 लाख रुपये खर्च करता है। जिसके सापेक्ष उसे प्रतिमाह केवल 12-13 लाख रुपये यूजर चार्ज मिलता है। इसमें से करीब साढ़े सात लाख रुपये कर्मचारियों के वेतन में खर्च होती है।
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एजेंसी के बेहतर कर्मचारी होंगे समायोजित
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में वर्तमान में भार्गव एजेंसी की ओर से रखे गए 284 सफाई कर्मियों में बेहतर काम करने वाले कर्मचारियों को चेन्नई एमएसडब्ल्यू कंपनी में समायोजित किया जाएगा। इसके अलावा कंपनी अपनी तरफ से भी करीब 300 कर्मचारी रखेगी।
कंपनी को हैंडओवर होंगे निगम के दुरुस्त वाहन
अनुबंध के बाद नगर निगम अपने कई कूड़ा कलेक्शन वाहन कंपनी को हैंडओवर करेगा। निगम के पास अभी छोटे-बड़े करीब 120 वाहन हैं, इसमें से 70 की हालत ठीक हैं। जिसे कंपनी लेगी, शेष वाहन कंपनी की ओर से लगाए जाएंगे।
मौजूदा समय में कूड़ा उठान में लगे वाहन
रिक्शा 82
टाटा ऐस 42
डीपी 8
टाटा 407 8
हाईवा 2
अतिरिक्त वाहन 13
केंद्र ने भी सराहा कंपनी का काम
चेन्नई एमएसडब्ल्यू को इसी वर्ष केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय की ओर से कूड़ा उठान और उसके निस्तारण के लिए प्रथम पुरस्कार दिया है। बीते नौ से 12 अप्रैल तक इंदौर, मध्य प्रदेश में आयोजित कार्यक्रम में कंपनी को यह पुरस्कार प्रदान किया है।
खचाड़ा वाहनों से निगम को सालाना छह करोड़ बचेगा
पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत चेन्नई एमएसडब्ल्यू कंपनी के कूड़ा उठाने से नगर निगम को खचाड़ा वाहनों से छह करोड़ रुपये सालाना बचेगा। हालांकि इसके बदले ट्रांसपोटेशन में आने वाले खर्च का भुगतान निगम करेगा। बता दें कि निगम की ओर से करोड़ों रुपये खर्च कर खरीदे गए 60 से अधिक वाहनों में से दर्जनों वाहन सहस्त्रधारा रोड स्थित वर्कशॉप में खड़े कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। इतना ही नहीं निगम प्रशासन की ओर से 30 लाख रुपये से खरीदी मिनी पोकलैंड मशीन भी जंक खा रही है।
अक्तूबर से पीपीपी मोड में कूड़ा उठान से लोगों को काफी राहत मिलेगी। आए दिन हड़ताल पर रहने वाले एजेंसी कर्मियों की मनमानी से भी निजात मिलेगी। हालांकि व्यवस्था को पटरी पर लाने में थोड़ा वक्त जरूर लगेगा। -विजय कुमार जोगदंडे, नगर आयुक्त
पहली प्राथमिकता कूड़ा उठान की व्यवस्था को बेहतर बनाना है। इसके लिए वाहनों, मैन पॉवर और अन्य संसाधनों को बढ़ाने पर फोकस किया जाएगा। विशेषकर उन इलाकों पर ध्यान दिया जाएगा, जहां ज्यादा कूड़ा होता है। -मोहित द्विवेदी, प्रोजेक्ट हेड चेन्नई, एमएसडब्ल्यू प्राईवेट लिमिटेड
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नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि पिछले वर्ष अक्तूबर में नगर निगम प्रशासन ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का कार्य पीपीपी मोड में देने का निर्णय लिया था। इसको लेकर एटूजेड चेन्नई एमएसडब्ल्यू प्रा.लि. और एक अन्य कंपनी ने आवेदन किया था। नगर स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में दो टीमें बनाई गई थी। टीमों ने तीनों कंपनियों का कार्य देखा। इसके बाद यह कार्य चेन्नई एमएसडब्ल्यू प्रा.लि. कंपनी को दिया गया। हालांकि यूजर चार्ज को लेकर पेच फंस गया था। कई माह की जद्दोजहद के बाद यूजर चार्ज को लेकर फंसा पेच भी खत्म हो गया है। अनुबंध के बाद अब कंपनी के वाहन घर-घर से कूड़ा एकत्र कर उसे कूड़ा ट्रांसफर सेंटर पहुंचाएंगे। वहां से बड़े वाहनों के जरिये शीशमबाड़ा स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट भेजा जाएगा। इस दौरान अपर नगर आयुक्त नीरज जोशी, वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सिंह, कंपनी के प्रोजेक्ट हेड मोहित द्विवेदी, वीरेंद्र रावत आदि मौजूद रहे।
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अनुबंध से निगम को होगा लाभ
कंपनी से अनुबंध के बाद निगम को हर महीने 20 से 30 लाख रुपये यूजर चार्ज मिलने की संभावना है। वर्तमान की बात करें तो नगर निगम डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में हर महीने करीब 50 लाख रुपये खर्च करता है। जिसके सापेक्ष उसे प्रतिमाह केवल 12-13 लाख रुपये यूजर चार्ज मिलता है। इसमें से करीब साढ़े सात लाख रुपये कर्मचारियों के वेतन में खर्च होती है।
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एजेंसी के बेहतर कर्मचारी होंगे समायोजित
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में वर्तमान में भार्गव एजेंसी की ओर से रखे गए 284 सफाई कर्मियों में बेहतर काम करने वाले कर्मचारियों को चेन्नई एमएसडब्ल्यू कंपनी में समायोजित किया जाएगा। इसके अलावा कंपनी अपनी तरफ से भी करीब 300 कर्मचारी रखेगी।
कंपनी को हैंडओवर होंगे निगम के दुरुस्त वाहन
अनुबंध के बाद नगर निगम अपने कई कूड़ा कलेक्शन वाहन कंपनी को हैंडओवर करेगा। निगम के पास अभी छोटे-बड़े करीब 120 वाहन हैं, इसमें से 70 की हालत ठीक हैं। जिसे कंपनी लेगी, शेष वाहन कंपनी की ओर से लगाए जाएंगे।
मौजूदा समय में कूड़ा उठान में लगे वाहन
रिक्शा 82
टाटा ऐस 42
डीपी 8
टाटा 407 8
हाईवा 2
अतिरिक्त वाहन 13
केंद्र ने भी सराहा कंपनी का काम
चेन्नई एमएसडब्ल्यू को इसी वर्ष केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय की ओर से कूड़ा उठान और उसके निस्तारण के लिए प्रथम पुरस्कार दिया है। बीते नौ से 12 अप्रैल तक इंदौर, मध्य प्रदेश में आयोजित कार्यक्रम में कंपनी को यह पुरस्कार प्रदान किया है।
खचाड़ा वाहनों से निगम को सालाना छह करोड़ बचेगा
पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत चेन्नई एमएसडब्ल्यू कंपनी के कूड़ा उठाने से नगर निगम को खचाड़ा वाहनों से छह करोड़ रुपये सालाना बचेगा। हालांकि इसके बदले ट्रांसपोटेशन में आने वाले खर्च का भुगतान निगम करेगा। बता दें कि निगम की ओर से करोड़ों रुपये खर्च कर खरीदे गए 60 से अधिक वाहनों में से दर्जनों वाहन सहस्त्रधारा रोड स्थित वर्कशॉप में खड़े कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। इतना ही नहीं निगम प्रशासन की ओर से 30 लाख रुपये से खरीदी मिनी पोकलैंड मशीन भी जंक खा रही है।
अक्तूबर से पीपीपी मोड में कूड़ा उठान से लोगों को काफी राहत मिलेगी। आए दिन हड़ताल पर रहने वाले एजेंसी कर्मियों की मनमानी से भी निजात मिलेगी। हालांकि व्यवस्था को पटरी पर लाने में थोड़ा वक्त जरूर लगेगा। -विजय कुमार जोगदंडे, नगर आयुक्त
पहली प्राथमिकता कूड़ा उठान की व्यवस्था को बेहतर बनाना है। इसके लिए वाहनों, मैन पॉवर और अन्य संसाधनों को बढ़ाने पर फोकस किया जाएगा। विशेषकर उन इलाकों पर ध्यान दिया जाएगा, जहां ज्यादा कूड़ा होता है। -मोहित द्विवेदी, प्रोजेक्ट हेड चेन्नई, एमएसडब्ल्यू प्राईवेट लिमिटेड