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बैठक तक सीमित कांवड़ की तैयारियां
Updated Sat, 17 Jun 2017 11:39 PM IST
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नौ जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा का काउंट-डाउन शुरू हो चुका है। सरकार से लेकर शासन-प्रशासन तक इसकी पूरी तैयारियों के दावे कर रहे हैं। आए दिन बैठकें आयोजित की जा रही हैं, लेकिन धरातल पर कहीं यात्रा की तैयारियां नजर नहीं आ रही हैं। हालत यह है कि अभी तक बजट तक आवंटित नहीं किया गया।
हरिद्वार से लेकर नारसन तक करीब 50 किलोमीटर कांवड़ पटरी पूरी तरह बदहाल है। जगह-जगह गड्ढे और पटरी क्षतिग्रस्त है। ऐसे में लाखों कांवड़ियों को फजीहत झेलनी पड़ेगी। कांवड़ यात्रा के लिए बिजली, पेयजल सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं भी धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रही हैं। यह स्थिति तब है जब कांवड़ को लेकर शासन, प्रशासन की ओर से कई दौर की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। जून के प्रथम सप्ताह में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अधिकारियों संग बैठक कर कांवड़ की तैयारियों के निर्देश दिए थे। उसके बाद जिलाधिकारी और एसएसपी की ओर से भी कई दौर की बैठकें कर चुके हैं, लेकिन धरातल पर अभी कुछ नजर नहीं आ रहा है। 50 किलोमीटर मार्ग दुरुस्त करने के लिए अभी कागजी कार्रवाई भी पूरी नहीं हो पाई है। इसके पीछे शासन से बजट नहीं मिलने को कारण बताया जा रहा है।
मालूम हो कि सावन की महाशिवरात्रि 21 जुलाई को है, लेकिन इससे एक पखवाड़ा पहले दूर-दूर से कांवड़िए जल लेने के लिए हरिद्वार पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में शिवभक्त गंगोत्री भी जल लेने जाते हैं। इस दौरान पूरी पटरी शिवभक्तों के रंग में सराबोर हो जाती है। श्रद्धालु नंगे पांव यात्रा करते हैं। ऐसे में बदहाल पटरी से भक्तों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
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नौ जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा का काउंट-डाउन शुरू हो चुका है। सरकार से लेकर शासन-प्रशासन तक इसकी पूरी तैयारियों के दावे कर रहे हैं। आए दिन बैठकें आयोजित की जा रही हैं, लेकिन धरातल पर कहीं यात्रा की तैयारियां नजर नहीं आ रही हैं। हालत यह है कि अभी तक बजट तक आवंटित नहीं किया गया।
हरिद्वार से लेकर नारसन तक करीब 50 किलोमीटर कांवड़ पटरी पूरी तरह बदहाल है। जगह-जगह गड्ढे और पटरी क्षतिग्रस्त है। ऐसे में लाखों कांवड़ियों को फजीहत झेलनी पड़ेगी। कांवड़ यात्रा के लिए बिजली, पेयजल सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं भी धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रही हैं। यह स्थिति तब है जब कांवड़ को लेकर शासन, प्रशासन की ओर से कई दौर की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। जून के प्रथम सप्ताह में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अधिकारियों संग बैठक कर कांवड़ की तैयारियों के निर्देश दिए थे। उसके बाद जिलाधिकारी और एसएसपी की ओर से भी कई दौर की बैठकें कर चुके हैं, लेकिन धरातल पर अभी कुछ नजर नहीं आ रहा है। 50 किलोमीटर मार्ग दुरुस्त करने के लिए अभी कागजी कार्रवाई भी पूरी नहीं हो पाई है। इसके पीछे शासन से बजट नहीं मिलने को कारण बताया जा रहा है।
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मालूम हो कि सावन की महाशिवरात्रि 21 जुलाई को है, लेकिन इससे एक पखवाड़ा पहले दूर-दूर से कांवड़िए जल लेने के लिए हरिद्वार पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में शिवभक्त गंगोत्री भी जल लेने जाते हैं। इस दौरान पूरी पटरी शिवभक्तों के रंग में सराबोर हो जाती है। श्रद्धालु नंगे पांव यात्रा करते हैं। ऐसे में बदहाल पटरी से भक्तों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
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