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सावधान! पौड़ी के चारधाम रास्ते में बने हैं 167 भूस्खलन जोन

Sun, 03 Jul 2016 12:40 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 03 Jul 2016 12:40 PM IST
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167 sensitive zone on pauri to chardham way
danger zone, badrinath highway, chardham yatra - फोटो : amar ujala

चारधाम जाने के लिए पौड़ी जिले के रास्तों में 167 भूस्खलन जोन पाए गए हैं। पौड़ी के शिवालिक रेंज में सबसे अधिक संवेदनशील जोन सैंड स्टोन वाले इलाके में हैं।

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सैंड स्टोन वाली इस पट्टी का क्षेत्र हरिद्वार, डोईवाला (देहरादून), रामनगर, हल्द्वानी, खटीमा से नेपाल तक आता है। उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) पहली बार प्रदेश के जिलों का भूस्खलन के लिहाज से रोड मैप तैयार कर रहा है। इस कड़ी में सबसे पहले पौड़ी का अध्ययन करके रोड मैप तैयार कर लिया गया।
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वर्ष 2001 में इसरो ने सेटेलाइट से पहली बार चारधाम यात्रा मार्ग पर भूस्खलन वाले स्थानों को चिन्हित किया था। प्रदेश स्तर पर पहली बार काम शुरू हुआ है। पौड़ी का रोड मैप तैयार करने के बाद यूसैक अब रुद्रप्रयाग का रोड मैप बनाने की तैयारी कर रहा है। रोड मैप में अलग-अलग जिलों में भूस्खलन के प्रति संवेदनशील स्थानों और कारणों को खोजा जा रहा है। वैसे केंद्र ने सारे जिलों के संवेदनशील जोन का रिकार्ड तैयार कर लिया है। अब जोन वार भूस्खलन के कारण पता किए जाएंगे। इससे खतरे के स्थानों के ट्रीटमेंट में आसानी होगी।
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पौड़ी के रोड मैप तैयार करने में पाया गया कि शिवालिक फाल्ट लाइन के नीचे सैंड स्टोन वाला क्षेत्र है। इस क्षेत्र में सबसे अधिक आरक्षित वन हैं। समुद्र तल से 700 से 1100 मीटर ऊंचाई पर भूस्खलन के सबसे अधिक जोन पाए गए हैं।

10 से 40 डिग्री वाली गहरी ढलानों (स्लोप) के बीच सबसे अधिक भूस्खलन मिला है। दक्षिणी दिशा की तरफ वाले स्लोप में इनकी संख्या अधिक रही। शोध कार्य के अगुवा यूसैक  के वैज्ञानिक सलाहकार देवेंद्र शर्मा ने बताया कि रोड मैप तैयार करने में स्लोप, नदियों का ड्रेनेज आदि का अध्ययन किया जा रहा है।


पौड़ी जनपद चारधाम यात्रा के मार्ग के कारण अधिक महत्वपूर्ण है। इसी से भूस्खलन जोन के रोड मैप बनाने का कार्य पौड़ी से शुरू किया गया है। इस अध्ययन से नई जानकारियां प्राप्त हो रही हैं।
- डा. दुर्गेश पंत, निदेशक, यूसैक

जिलेवार भूस्खलन जोन
-पिथौरागढ़-163, रुद्रप्रयाग-103, चमोली-229, पौड़ी-167, टिहरी-110, देहरादून-75, बागेश्वर-116, अल्मोड़ा-120, हरिद्वार-28, उत्तरकाशी-151, नैनीताल-97

Published By : Nirmala Suyal

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