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सद्गुरू के बताए रास्तों पर चलकर ही भवबंधन से मुक्ति
Updated Mon, 28 May 2018 01:40 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
गुरु हमारे तन मन की पीड़ा को दूर करने के साथ ही हमारे जन्म जन्मांतर की भटकी आत्मा को इसके मूलस्वरूप परमात्मा से मिलाकर सहज अवस्था में स्थित कर देता है।
उक्त बातें संत निरंकारी सत्संग भवन की ओर से आयोजित रविवारीय सत्संग कार्यक्रम के दौरान ज्ञान प्रचारिका पूज्य पिंकी ने कहीं। उन्होंने कहा कि परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता के लिए प्रभु की निकटता जरूरी है। निकटता के लिए इसकी जानकारी और जानकारी देने वाले की पहचान जरूरी है। प्रभु तो सदा सर्वदा साथ होते हैं, लेकिन अज्ञानी मनुष्य जानता नहीं। सद्गुरु के ज्ञान से मनुष्य इसे जान पाता है। संसार में जानने योग्य बहुत कुछ है, लेकिन हम वह जानें जिससे हमारी तमाम भ्रांतियां मिट जाएं, लोक-परलोक के बंधन कट जाएं। सत्संग समागम से पूर्व भक्तों ने गीत-भजन प्रस्तुत किए।
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गुरु हमारे तन मन की पीड़ा को दूर करने के साथ ही हमारे जन्म जन्मांतर की भटकी आत्मा को इसके मूलस्वरूप परमात्मा से मिलाकर सहज अवस्था में स्थित कर देता है।
उक्त बातें संत निरंकारी सत्संग भवन की ओर से आयोजित रविवारीय सत्संग कार्यक्रम के दौरान ज्ञान प्रचारिका पूज्य पिंकी ने कहीं। उन्होंने कहा कि परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता के लिए प्रभु की निकटता जरूरी है। निकटता के लिए इसकी जानकारी और जानकारी देने वाले की पहचान जरूरी है। प्रभु तो सदा सर्वदा साथ होते हैं, लेकिन अज्ञानी मनुष्य जानता नहीं। सद्गुरु के ज्ञान से मनुष्य इसे जान पाता है। संसार में जानने योग्य बहुत कुछ है, लेकिन हम वह जानें जिससे हमारी तमाम भ्रांतियां मिट जाएं, लोक-परलोक के बंधन कट जाएं। सत्संग समागम से पूर्व भक्तों ने गीत-भजन प्रस्तुत किए।
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