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अब भी सवालों के घेरे में नारी निकेतन की व्यवस्था
Updated Fri, 25 May 2018 02:20 AM IST
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अब भी सवालों के घेरे में नारी निकेतन की व्यवस्था
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
भले ही हाईकोर्ट के आदेश के बाद दुष्कर्म व गर्भपात की घटना से पीड़ित संवासिनी को 25 लाख मुआवजा या 11 हजार रुपये मासिक पेंशन के रुप में राहत दी गई हो, लेकिन अभी भी नारी निकेतन के दामन पर कई ऐसे दाग हैं जो धुलने का नाम नहीं ले रहे। संवासिनी के साथ दुष्कर्म, गर्भपात की घटना हो या फिर शिशु निकेतन में दो बच्चों की मौत का मामला, हमेशा ही नारी निकेतन की व्यवस्थाएं कटघरे में खड़ी रही है। इसी का नतीजा है कि खुद नारी निकेतन में रहने वाली संवासियां भी कई बार घर जाने की जिद को लेकर हंगामा कर चुकी हैं। यानी नारी निकेतन के सिस्टम पर अभी भी कई ऐसे सवाल हैं जिनका हल निकाला जाना बाकी है।
सबसे पहले वर्ष 2015 नवंबर में नारी निकेतन में रहने वाली मूक बधिर संवासिनी के साथ वहीं के स्टॉफ ने दुष्कर्म किया और फिर चुपचाप संवासिनी का गर्भपात करा दिया। इसके बाद इस घिनौने अपराध को छिपाने के लिए नारी निकेतन के स्टॉफ से लेकर पूरा विभाग जुट गया। संवासिनियों का आरोप था कि यहां उनके साथ अभद्र व्यवहार होता है। ये मामला ठीक से शांत न हुआ था कि एक माह बाद तत्कालीन अपर समाज कल्याण अधिकारी मनोज चंद्रन द्वारा इसी जुलाई में किए गए बालिका निकेतन के निरीक्षण की रिपोर्ट ने एक और खुलासा कर दिया है।
रिपोर्ट शासन पहुंची तो पता चला कि बालिका एवं शिशु निकेतन के स्टॉफ की लापरवाही से शिशु निकेतन में दो नवजात बच्चों की मौत हो गई और एक सात साल की लड़की अपाहिज होने के कगार पर आकर खड़ी हो गई। यही नहीं लापरवाही का आलम ये है कि पिछले छह माह में दो बार बालिकाएं व्यवस्थाओं को धत्ता बताते हुए नारी निकेतन की दीवारें लांघ चुकी है। मामले की गंभीरता को समझते हुए खुद समाज कल्याण मंत्री ने बालिका निकेतन का निरीक्षण करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा, मगर नतीजा कुछ नहीं निकला।
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बाल कल्याण समिति ने भी उठाए थे सवाल
बालिका एवं शिशु निकेतन की व्यवस्थाओं पर बाल कल्याण समिति ने भी कुछ समय पूर्व सवाल उठाए थे। समिति की ओर से नेहरू कॉलोनी थाने को भेजी गई रिपोर्ट में गोपनीय जांच करने को कहा था। इसमें समिति ने कहा था कि इन बिंदुओं पर जांच करना जरूरी है कि निकेतन से विद्यालय आते जाते हुए ये लड़कियां किन-किन लोगों के संपर्क में आती है, क्या कोई मानव तस्करी का गिरोह तो बालिका निकेतन में सक्रिय नहीं है।
लड़कियों का होता है उत्पीड़न
पांच लड़कियों के फरार होने के बाद बाल आयोग की सदस्य शारदा त्रिपाठी ने बालिका निकेतन का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद उन्होंने बताया था कि बालिका निकेतन में लड़कियों का शोषण होता है। उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। साथ ही लड़कियों को जो भी संस्था या समितियों की ओर से दान में सामान मिलता है उसे भी छीन लिया जाता है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
भले ही हाईकोर्ट के आदेश के बाद दुष्कर्म व गर्भपात की घटना से पीड़ित संवासिनी को 25 लाख मुआवजा या 11 हजार रुपये मासिक पेंशन के रुप में राहत दी गई हो, लेकिन अभी भी नारी निकेतन के दामन पर कई ऐसे दाग हैं जो धुलने का नाम नहीं ले रहे। संवासिनी के साथ दुष्कर्म, गर्भपात की घटना हो या फिर शिशु निकेतन में दो बच्चों की मौत का मामला, हमेशा ही नारी निकेतन की व्यवस्थाएं कटघरे में खड़ी रही है। इसी का नतीजा है कि खुद नारी निकेतन में रहने वाली संवासियां भी कई बार घर जाने की जिद को लेकर हंगामा कर चुकी हैं। यानी नारी निकेतन के सिस्टम पर अभी भी कई ऐसे सवाल हैं जिनका हल निकाला जाना बाकी है।
सबसे पहले वर्ष 2015 नवंबर में नारी निकेतन में रहने वाली मूक बधिर संवासिनी के साथ वहीं के स्टॉफ ने दुष्कर्म किया और फिर चुपचाप संवासिनी का गर्भपात करा दिया। इसके बाद इस घिनौने अपराध को छिपाने के लिए नारी निकेतन के स्टॉफ से लेकर पूरा विभाग जुट गया। संवासिनियों का आरोप था कि यहां उनके साथ अभद्र व्यवहार होता है। ये मामला ठीक से शांत न हुआ था कि एक माह बाद तत्कालीन अपर समाज कल्याण अधिकारी मनोज चंद्रन द्वारा इसी जुलाई में किए गए बालिका निकेतन के निरीक्षण की रिपोर्ट ने एक और खुलासा कर दिया है।
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रिपोर्ट शासन पहुंची तो पता चला कि बालिका एवं शिशु निकेतन के स्टॉफ की लापरवाही से शिशु निकेतन में दो नवजात बच्चों की मौत हो गई और एक सात साल की लड़की अपाहिज होने के कगार पर आकर खड़ी हो गई। यही नहीं लापरवाही का आलम ये है कि पिछले छह माह में दो बार बालिकाएं व्यवस्थाओं को धत्ता बताते हुए नारी निकेतन की दीवारें लांघ चुकी है। मामले की गंभीरता को समझते हुए खुद समाज कल्याण मंत्री ने बालिका निकेतन का निरीक्षण करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा, मगर नतीजा कुछ नहीं निकला।
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बाल कल्याण समिति ने भी उठाए थे सवाल
बालिका एवं शिशु निकेतन की व्यवस्थाओं पर बाल कल्याण समिति ने भी कुछ समय पूर्व सवाल उठाए थे। समिति की ओर से नेहरू कॉलोनी थाने को भेजी गई रिपोर्ट में गोपनीय जांच करने को कहा था। इसमें समिति ने कहा था कि इन बिंदुओं पर जांच करना जरूरी है कि निकेतन से विद्यालय आते जाते हुए ये लड़कियां किन-किन लोगों के संपर्क में आती है, क्या कोई मानव तस्करी का गिरोह तो बालिका निकेतन में सक्रिय नहीं है।
लड़कियों का होता है उत्पीड़न
पांच लड़कियों के फरार होने के बाद बाल आयोग की सदस्य शारदा त्रिपाठी ने बालिका निकेतन का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद उन्होंने बताया था कि बालिका निकेतन में लड़कियों का शोषण होता है। उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। साथ ही लड़कियों को जो भी संस्था या समितियों की ओर से दान में सामान मिलता है उसे भी छीन लिया जाता है।