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-उक्रांद ने गैरसैंण राजधानी का संकल्प दोहराया
Updated Mon, 25 Dec 2017 01:09 AM IST
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उक्रांद ने गैरसैंण राजधानी का संकल्प दोहराया
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राज्य आंदोलन के प्रणेता स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी की 93वीं जयंती रविवार को प्रदेशभर में संकल्प दिवस के रूप में मनायी गई। इस मौके पर उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने गैरसैंण को पूर्णकालिक राजधानी के लिए संकल्प दोहराया।
केंद्रीय कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि गैरसैंण के अलावा कोई और राजधानी मंजूर नहीं है। उक्रांद के संरक्षक बीडी रतूड़ी ने कहा कि राज्य आंदोलन के समय से ही गैरसैंण को ही राजधानी बनाने की मांग की जा रही है। इसके तहत 1992 में उक्रांद ने इसे स्थायी राजधानी घोषित करते हुए गैरसैण में चंद्रनगर नाम से राजधानी का शिलान्यास किया था। उक्रांद आज भी राजधानी गैरसैंण के मामले में अपने स्टैंड पर कायम है और राजधानी गैरसैंण की बात करने वाले सभी सामाजिक संगठनों एवं व्यक्तियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार है। महानगर अध्यक्ष संजय क्षेत्री ने कहा कि स्वर्गीय इंद्रमणी बडोनी के नेतृत्व में आंदोलन की बदौलत देश में एक नहीं बल्कि तीन नवगठित राज्यों का उदय हुआ। कई दशकों से पृथक राज्य की लड़ाई लड़ रहे झारखंड और छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी स्वर्गीय बडोनी की प्रेरणा का अहम योगदान रहा। इसके बाद उक्रांद कार्यकर्ता घंटाघर स्थित पर्वतीय गांधी की प्रतिमा पर पहुंचे। वहां माल्यार्पण करने के साथ ही कार्यकर्ताओं ने स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने, किसानों का ऋण माफ करने, अस्थायी रूप से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने, मनमाने तरीके से किए गए नगर निगमों के सीमा विस्तार को निरस्त करने की मांग की। कार्यक्रम में केंद्रीय महामंत्री जय प्रकाश उपाध्याय, केंद्रीय प्रवक्ता शांति प्रसाद भट्ट, संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष दीपक गैरोला, केंद्रीय मीडिया प्रभारी देवेंद्र चमोली, केंद्रीय सचिव धर्मेंद्र कठैत, केंद्रीय महामंत्री बहादुर सिंह रावत, डीके पाल, अर्जुन सिंह रावत, विजेंद्र सिंह रावत, ओमी उनियाल, वीरेंद्र बिष्ट, गौरव उनियाल, ललित कुमार, ललित घिल्डियाल, विजय क्षेत्री, धीरेंद्र बिष्ट, सचिन उपाध्याय आदि शामिल रहे।
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राज्य आंदोलन के प्रणेता स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी की 93वीं जयंती रविवार को प्रदेशभर में संकल्प दिवस के रूप में मनायी गई। इस मौके पर उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने गैरसैंण को पूर्णकालिक राजधानी के लिए संकल्प दोहराया।
केंद्रीय कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि गैरसैंण के अलावा कोई और राजधानी मंजूर नहीं है। उक्रांद के संरक्षक बीडी रतूड़ी ने कहा कि राज्य आंदोलन के समय से ही गैरसैंण को ही राजधानी बनाने की मांग की जा रही है। इसके तहत 1992 में उक्रांद ने इसे स्थायी राजधानी घोषित करते हुए गैरसैण में चंद्रनगर नाम से राजधानी का शिलान्यास किया था। उक्रांद आज भी राजधानी गैरसैंण के मामले में अपने स्टैंड पर कायम है और राजधानी गैरसैंण की बात करने वाले सभी सामाजिक संगठनों एवं व्यक्तियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार है। महानगर अध्यक्ष संजय क्षेत्री ने कहा कि स्वर्गीय इंद्रमणी बडोनी के नेतृत्व में आंदोलन की बदौलत देश में एक नहीं बल्कि तीन नवगठित राज्यों का उदय हुआ। कई दशकों से पृथक राज्य की लड़ाई लड़ रहे झारखंड और छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी स्वर्गीय बडोनी की प्रेरणा का अहम योगदान रहा। इसके बाद उक्रांद कार्यकर्ता घंटाघर स्थित पर्वतीय गांधी की प्रतिमा पर पहुंचे। वहां माल्यार्पण करने के साथ ही कार्यकर्ताओं ने स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने, किसानों का ऋण माफ करने, अस्थायी रूप से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने, मनमाने तरीके से किए गए नगर निगमों के सीमा विस्तार को निरस्त करने की मांग की। कार्यक्रम में केंद्रीय महामंत्री जय प्रकाश उपाध्याय, केंद्रीय प्रवक्ता शांति प्रसाद भट्ट, संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष दीपक गैरोला, केंद्रीय मीडिया प्रभारी देवेंद्र चमोली, केंद्रीय सचिव धर्मेंद्र कठैत, केंद्रीय महामंत्री बहादुर सिंह रावत, डीके पाल, अर्जुन सिंह रावत, विजेंद्र सिंह रावत, ओमी उनियाल, वीरेंद्र बिष्ट, गौरव उनियाल, ललित कुमार, ललित घिल्डियाल, विजय क्षेत्री, धीरेंद्र बिष्ट, सचिन उपाध्याय आदि शामिल रहे।
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