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एम्स में स्वास् थ्य सुविधाएं उम्मीद से दूर
Updated Mon, 18 Dec 2017 02:01 AM IST
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उम्मीद से दूर एम्स में स्वास्थ्य सुविधाएं
-- फैकल्टी और नॉन फैकल्टी के पद खाली होने से बढ़ी दिक्कतें
-- लोगों को गंभीर रोगों के इलाज के लिए अभी करना होगा इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
उत्तराखंड के लोगों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं देने से एम्स अभी काफी दूर है। ओपीडी सेवा शुरू होने के करीब पांच साल बाद भी संस्थान में फैकल्टी, नॉन फैकल्टी के पद और बेड क्षमता पर्याप्त नहीं हो पाई है। जिसका सीधा असर संस्थान में उपचार के लिए आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है, इससे संस्थान के अन्य जरूरी कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। फैकल्टी के पद खाली होने से संस्थान में कई अहम विभाग नहीं खुल पाएं हैं। नॉन फैकल्टी के पदों पर भी अभी तक महज 10 प्रतिशत कार्मिकों की तैनाती ही हो पाई है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के लिए केंद्र सरकार ने फैकल्टी और नॉन फैकल्टी के पद सृजित किए हैं, लेकिन अभी तक फैकल्टी के सृजित पदों को भरा नहीं गया है। जिसके चलते एम्स में कई अहम विभाग अभी तक खुल ही नहीं पाए हैं। लिहाजा रोगियों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं संस्थान में अभी नहीं मिल पा रही हैं। हालांकि, संस्थान में मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) के नार्म्स मुताबिक एमबीबीएस, नर्सिंग और पीएचडी कोर्स के संचालन के लिए पर्याप्त फैकल्टी उपलब्ध हैं। जबकि नॉन फैकल्टी के सृजित करीब साढ़े तीन हजार से अधिक पदों में अब तक महज 290 पद ही भरे गए हैं।
एम्स प्रशासन के मुताबिक नॉन फैकल्टी का अधिकांश कार्य नर्स, टेक्नीशियन और अन्य कर्मचारियों से जुड़ा है, जिसे फिलहाल आउटसोर्स के माध्यम से जैसे तैसे काम चलाया जा रहा है। एम्स प्रशासन का दावा है कि वर्ष- 2018 तक सभी सृजित पदों को भर दिया जाएगा।
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स्टाफ की कमी से नहीं खुले यह विभाग
ऋषिकेश। एम्स में कई अहम विभाग अभी तक नहीं खुल पाए हैं। संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल के अनुसार फैकल्टी में सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की कमी भी शामिल है, जिससे हॉस्पिटल का काम प्रभावित हो रहा है। बताया कि इससे कई विभाग नहीं खुल पाए हैं। जिनमें किडनी से जुड़ा नेफ्रोलॉजी, लीवर से संबंधित गेस्ट्रो मेडिसिन, डायबिटीज से जुड़ी गंभीर बीमारियों के लिए एनडोप्राइम, हार्मोंस से संबंधित इम्यूनोलॉजी विभाग शामिल हैं। बताया कि फैकल्टी की कमी के चलते हार्ट ट्रांसप्लांट आदि सुविधा संस्थान में अभी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
एम्स सृजित पदों की स्थिति
सृजित पद- तैनाती- कांट्रैक्ट बेस
305- 128- 14
नॉन फैकल्टी-
सृजित पद- तैनाती- कांट्रैक्ट बेस
3776- 290- 0
बेड क्षमता-
960- 700
(स्रोत: उपनिदेशक अंशुमान गुप्ता)
क्या कहते हैं निदेशक
फैकल्टी के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है। नॉन फैकल्टी के लिए हर माह नेशनल लेवल पर परीक्षा आयोजित कर भर्ती का कार्य जारी है। संस्थान में वर्ष 2018 तक सभी पदों को भरने की पूरी कोशिश है, जिससे रोगियों को मुकम्मल सुविधाएं मिल सकें।
प्रोफेसर डा. रवि कांत, निदेशक, एम्स, ऋषिकेश।
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-- फैकल्टी और नॉन फैकल्टी के पद खाली होने से बढ़ी दिक्कतें
-- लोगों को गंभीर रोगों के इलाज के लिए अभी करना होगा इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
उत्तराखंड के लोगों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं देने से एम्स अभी काफी दूर है। ओपीडी सेवा शुरू होने के करीब पांच साल बाद भी संस्थान में फैकल्टी, नॉन फैकल्टी के पद और बेड क्षमता पर्याप्त नहीं हो पाई है। जिसका सीधा असर संस्थान में उपचार के लिए आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है, इससे संस्थान के अन्य जरूरी कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। फैकल्टी के पद खाली होने से संस्थान में कई अहम विभाग नहीं खुल पाएं हैं। नॉन फैकल्टी के पदों पर भी अभी तक महज 10 प्रतिशत कार्मिकों की तैनाती ही हो पाई है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के लिए केंद्र सरकार ने फैकल्टी और नॉन फैकल्टी के पद सृजित किए हैं, लेकिन अभी तक फैकल्टी के सृजित पदों को भरा नहीं गया है। जिसके चलते एम्स में कई अहम विभाग अभी तक खुल ही नहीं पाए हैं। लिहाजा रोगियों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं संस्थान में अभी नहीं मिल पा रही हैं। हालांकि, संस्थान में मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) के नार्म्स मुताबिक एमबीबीएस, नर्सिंग और पीएचडी कोर्स के संचालन के लिए पर्याप्त फैकल्टी उपलब्ध हैं। जबकि नॉन फैकल्टी के सृजित करीब साढ़े तीन हजार से अधिक पदों में अब तक महज 290 पद ही भरे गए हैं।
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एम्स प्रशासन के मुताबिक नॉन फैकल्टी का अधिकांश कार्य नर्स, टेक्नीशियन और अन्य कर्मचारियों से जुड़ा है, जिसे फिलहाल आउटसोर्स के माध्यम से जैसे तैसे काम चलाया जा रहा है। एम्स प्रशासन का दावा है कि वर्ष- 2018 तक सभी सृजित पदों को भर दिया जाएगा।
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स्टाफ की कमी से नहीं खुले यह विभाग
ऋषिकेश। एम्स में कई अहम विभाग अभी तक नहीं खुल पाए हैं। संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल के अनुसार फैकल्टी में सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की कमी भी शामिल है, जिससे हॉस्पिटल का काम प्रभावित हो रहा है। बताया कि इससे कई विभाग नहीं खुल पाए हैं। जिनमें किडनी से जुड़ा नेफ्रोलॉजी, लीवर से संबंधित गेस्ट्रो मेडिसिन, डायबिटीज से जुड़ी गंभीर बीमारियों के लिए एनडोप्राइम, हार्मोंस से संबंधित इम्यूनोलॉजी विभाग शामिल हैं। बताया कि फैकल्टी की कमी के चलते हार्ट ट्रांसप्लांट आदि सुविधा संस्थान में अभी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
एम्स सृजित पदों की स्थिति
सृजित पद- तैनाती- कांट्रैक्ट बेस
305- 128- 14
नॉन फैकल्टी-
सृजित पद- तैनाती- कांट्रैक्ट बेस
3776- 290- 0
बेड क्षमता-
960- 700
(स्रोत: उपनिदेशक अंशुमान गुप्ता)
क्या कहते हैं निदेशक
फैकल्टी के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है। नॉन फैकल्टी के लिए हर माह नेशनल लेवल पर परीक्षा आयोजित कर भर्ती का कार्य जारी है। संस्थान में वर्ष 2018 तक सभी पदों को भरने की पूरी कोशिश है, जिससे रोगियों को मुकम्मल सुविधाएं मिल सकें।
प्रोफेसर डा. रवि कांत, निदेशक, एम्स, ऋषिकेश।