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मध्य हिमालयी क्षेत्रों में 409 सूक्ष्म जलागम क्षेत्र चिह्नित
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
राज्य के मध्य हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पीने के साथ ही खेतीबाड़ी के लिए पानी की किल्लन न हो, इसके लिए 409 सूक्ष्म जलागम क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं। जहां जलागम प्रबंध परियोजना के तहत छोटे-छोटे तटबंध बनाने के साथ ही अन्य कदम उठाए जाएंगे। जलागम प्रबंध परियोजना अधिकारियों के मुताबिक योजना को साल 2021 तक पूरा किया जाना है।
जलागम प्रबंध परियोजना के अपर परियोजना निदेशक कपिल लाल ने बताया कि मध्य हिमालयी क्षेत्रों में पानी किल्लत कुछ ज्यादा है। ऐसे में इन इलाकों में सूक्ष्म जलागम क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है। इन क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। छोटे छोटे तटबंध बनाने के साथ ही पौधरोपण पर खासा ध्यान दिया जाएगा। योजना को धरातल पर उतारने के लिए जल जलागम समितियों की मदद ली जा रही है। इसमें ग्रामीणों की भी भागीदारी रहेगी। कपिल लाल ने बताया कि योजना के तहत पूरे राज्य में कुल 1110 सूक्ष्म जलागम क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है। इनमें कुछ क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था के लिए कार्य जारी है।
इसके अलावा इन इलाकों में परियेाजनाओं के साथ ही पशुपालन पर भी काम किया जा रहा है। साथ ही विश्व बैंक पोषित परियोजनाओं के तहत ग्राम्या योजना-दो के तहत भी विकास कार्य कराए जा रहे हैं। ग्राम्या योजना के लिए विश्व बैंक की ओर से 1020 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है।
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राज्य के मध्य हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पीने के साथ ही खेतीबाड़ी के लिए पानी की किल्लन न हो, इसके लिए 409 सूक्ष्म जलागम क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं। जहां जलागम प्रबंध परियोजना के तहत छोटे-छोटे तटबंध बनाने के साथ ही अन्य कदम उठाए जाएंगे। जलागम प्रबंध परियोजना अधिकारियों के मुताबिक योजना को साल 2021 तक पूरा किया जाना है।
जलागम प्रबंध परियोजना के अपर परियोजना निदेशक कपिल लाल ने बताया कि मध्य हिमालयी क्षेत्रों में पानी किल्लत कुछ ज्यादा है। ऐसे में इन इलाकों में सूक्ष्म जलागम क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है। इन क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। छोटे छोटे तटबंध बनाने के साथ ही पौधरोपण पर खासा ध्यान दिया जाएगा। योजना को धरातल पर उतारने के लिए जल जलागम समितियों की मदद ली जा रही है। इसमें ग्रामीणों की भी भागीदारी रहेगी। कपिल लाल ने बताया कि योजना के तहत पूरे राज्य में कुल 1110 सूक्ष्म जलागम क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है। इनमें कुछ क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था के लिए कार्य जारी है।
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इसके अलावा इन इलाकों में परियेाजनाओं के साथ ही पशुपालन पर भी काम किया जा रहा है। साथ ही विश्व बैंक पोषित परियोजनाओं के तहत ग्राम्या योजना-दो के तहत भी विकास कार्य कराए जा रहे हैं। ग्राम्या योजना के लिए विश्व बैंक की ओर से 1020 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है।
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