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उपेक्षा का शिकार हो रहा देववन
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
साहिया। हरे-भरे पहाड़, घास के मैदान, प्राकृतिक जलस्रोत, कैल, बुरांश और चीड़ का घना जंगल। पहाड़ की जिस मनोरम छवि को मन में दबाए पर्यटक पहाड़ का रुख करते हैं। वह छवि पूरी तरह से जौनसार बावर के देववन में चरितार्थ होती नजर आती है, लेकिन विभागीय उपेक्षा के चलते यह स्थल पर्यटकों की पहुंच से दूर होता जा रहा है।
कारण, देववन को जाने वाली सड़क पूरी तरह से उधड़ चुकी है। तीन दशक पूर्व इस सड़क की अंतिम बार पेंटिंग कराई गई थी। इसके बाद विभाग ने इस सड़क की कोई सुध नहीं ली। यह सड़क वन विभाग के अधीन आती है। बरसात में 13 किमी लंबी इस सड़क पर पानी नाले की तरह बहता है। कई पर्यटक मार्ग की बदहाली देख बीच रास्ते से ही वापस लौट जाते हैं। विकासनगर से देववन घूमने पहुंचे राजेंद्र कुमार अग्रवाल और दिल्ली से आए रोहन अग्रवाल ने कहा कि देववन वाकई में एक सुंदर जगह है, लेकिन जिस हिसाब से यहां की सुंदरता है वैसी सड़क नहीं है। सड़क पर हिचकोले भरा सफर पूरे मजे को किरकिरा कर देता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार को यहां पर इको टूरिज्म विकसित करना चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मोटर मार्ग पर वन विभाग की वानस्पतिक जड़ी बूटी पौधशाला भी है। इसके बावजूद विभाग सड़क का निर्माण नहीं करा रहा है। कई बार विभाग से सड़क के डामरीकरण की मांग की गई, लेकिन हर बार विभाग बजट की कमी बता पल्ला झाड़ लेता है।
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उधर, डीएफओ चकराता दीप चंद आर्य ने कहा कि बजट अभाव के कारण अब तक सड़क की मरम्मत नहीं हो सकी है। बजट उपलब्ध होते ही सड़क की मरम्मत कराई जाएगी।
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साहिया। हरे-भरे पहाड़, घास के मैदान, प्राकृतिक जलस्रोत, कैल, बुरांश और चीड़ का घना जंगल। पहाड़ की जिस मनोरम छवि को मन में दबाए पर्यटक पहाड़ का रुख करते हैं। वह छवि पूरी तरह से जौनसार बावर के देववन में चरितार्थ होती नजर आती है, लेकिन विभागीय उपेक्षा के चलते यह स्थल पर्यटकों की पहुंच से दूर होता जा रहा है।
कारण, देववन को जाने वाली सड़क पूरी तरह से उधड़ चुकी है। तीन दशक पूर्व इस सड़क की अंतिम बार पेंटिंग कराई गई थी। इसके बाद विभाग ने इस सड़क की कोई सुध नहीं ली। यह सड़क वन विभाग के अधीन आती है। बरसात में 13 किमी लंबी इस सड़क पर पानी नाले की तरह बहता है। कई पर्यटक मार्ग की बदहाली देख बीच रास्ते से ही वापस लौट जाते हैं। विकासनगर से देववन घूमने पहुंचे राजेंद्र कुमार अग्रवाल और दिल्ली से आए रोहन अग्रवाल ने कहा कि देववन वाकई में एक सुंदर जगह है, लेकिन जिस हिसाब से यहां की सुंदरता है वैसी सड़क नहीं है। सड़क पर हिचकोले भरा सफर पूरे मजे को किरकिरा कर देता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार को यहां पर इको टूरिज्म विकसित करना चाहिए।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मोटर मार्ग पर वन विभाग की वानस्पतिक जड़ी बूटी पौधशाला भी है। इसके बावजूद विभाग सड़क का निर्माण नहीं करा रहा है। कई बार विभाग से सड़क के डामरीकरण की मांग की गई, लेकिन हर बार विभाग बजट की कमी बता पल्ला झाड़ लेता है।
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उधर, डीएफओ चकराता दीप चंद आर्य ने कहा कि बजट अभाव के कारण अब तक सड़क की मरम्मत नहीं हो सकी है। बजट उपलब्ध होते ही सड़क की मरम्मत कराई जाएगी।