{"_id":"5d1915928ebc3e3c9053162a","slug":"15619249898-vikas-nagar-news200","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रशिक्षु वन अधिकारियों ने ली जड़ी-बूटियों की जानकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रशिक्षु वन अधिकारियों ने ली जड़ी-बूटियों की जानकारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
साहिया। जौनसार बावर के देववन और आसपास की जैव विविधता की जानकारी लेने के लिए शनिवार को तमिलनाडु से प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों का 29 सदस्यीय दल पहुंचा। अधिकारियों ने देववन में उगाई जा रही थुनेर की नर्सरी के साथ ही 55 से अधिक अन्य प्रजातियों की जड़ी-बूटियों की जानकारी ली। साथ ही वनों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे उपायों के बारे में भी जाना।
चकराता वन प्रभाग के डिप्टी रेंजर कातकू दास ने बताया कि दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे प्रशिक्षु अधिकारियों को देववन में उगाई जा रहीं जड़ी बूटियों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षुओं को चूक, अतुल, जगारिया, आर्चा, कूटकी, कूट, वन करड़ी, रिद्धि, हरी मूसली, जंगली प्याज, जंगली लहसुन, बज्रदंत, काली जीरा, पित्त पुष्पी, वन तुलसी, पदम, तिल पुष्पी, पीली जड़ी, खुरसानी, समया, वन अजवाइन, ऋषभ, अकरकरा, क्षीर काकोली, किनगोड़ा आदि औषधीय जड़ी बूटियों की जानकारी दी गई। साथ ही यहां की जैव विविधता के बारे में प्रशिक्षु अधिकारियों ने जानकारी ली। ऊंचाई वाले स्थानों पर पाए जाने वाले बांज, बुरांश, खर्सू, मोरू और देवदार के वृक्षों की उपयोगिता भी उन्हें बताई गई। वहीं, जंगली जानवरों और पक्षियों की प्रजातियों के बारे में भी प्रशिक्षु अधिकारियों को बताया गया। साथ ही वन्य उत्पादों की सुरक्षा के लिए किए गए उपायों की जानकारी मुहैया कराई गई।
विज्ञापन
साहिया। जौनसार बावर के देववन और आसपास की जैव विविधता की जानकारी लेने के लिए शनिवार को तमिलनाडु से प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों का 29 सदस्यीय दल पहुंचा। अधिकारियों ने देववन में उगाई जा रही थुनेर की नर्सरी के साथ ही 55 से अधिक अन्य प्रजातियों की जड़ी-बूटियों की जानकारी ली। साथ ही वनों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे उपायों के बारे में भी जाना।
चकराता वन प्रभाग के डिप्टी रेंजर कातकू दास ने बताया कि दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे प्रशिक्षु अधिकारियों को देववन में उगाई जा रहीं जड़ी बूटियों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षुओं को चूक, अतुल, जगारिया, आर्चा, कूटकी, कूट, वन करड़ी, रिद्धि, हरी मूसली, जंगली प्याज, जंगली लहसुन, बज्रदंत, काली जीरा, पित्त पुष्पी, वन तुलसी, पदम, तिल पुष्पी, पीली जड़ी, खुरसानी, समया, वन अजवाइन, ऋषभ, अकरकरा, क्षीर काकोली, किनगोड़ा आदि औषधीय जड़ी बूटियों की जानकारी दी गई। साथ ही यहां की जैव विविधता के बारे में प्रशिक्षु अधिकारियों ने जानकारी ली। ऊंचाई वाले स्थानों पर पाए जाने वाले बांज, बुरांश, खर्सू, मोरू और देवदार के वृक्षों की उपयोगिता भी उन्हें बताई गई। वहीं, जंगली जानवरों और पक्षियों की प्रजातियों के बारे में भी प्रशिक्षु अधिकारियों को बताया गया। साथ ही वन्य उत्पादों की सुरक्षा के लिए किए गए उपायों की जानकारी मुहैया कराई गई।
विज्ञापन