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अफसर के बावर्ची का एमएस के आवास पर कब्जा
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। प्रदेश के एक बड़े अफसर के बावर्ची ने दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) के सरकारी आवास पर कब्जा कर लिया है। अफसर की सिफारिश पर आरोपी को सर्वेंट क्वार्टर दिया गया था, लेकिन अब वह ठाठ से टाईप-4 आवास में रह रहा है। मजबूर एमएस जब उससे इसे खाली कराने को कहते हैं तो वह साहब की धमकी दे रहा है।
दरअसल, अफसर को अपने बावर्ची के लिए रहने की व्यवस्था करनी थी। कुछ नहीं सूझा तो उन्होंने दून अस्पताल के अधिकारियों से उसकी व्यवस्था करने को कह दिया। चूंकि, आदेश अफसर का था तो उसे कोई टाल भी नहीं पा रहा था। इसी बीच डॉ. केके टम्टा ने अपने आवास का सुझाव दे दिया। उनका शहर में अपना निजी मकान हैं। इस पर बावर्ची के लिए आवास का सर्वेंट क्वार्टर खोल दिया। कुछ ही दिन हुए थे कि बावर्ची ने डॉ. टम्टा से गुजारिश की कि ‘साहब! आपके क्वार्टर में फ्रीज रखा है तो मैं उसे इस्तेमाल कर लूंगा।’ लिहाजा, मुझे चाबी दे दीजिए। डॉ. टम्टा ने उसे चाबी थमा दी।
फिर क्या था बावर्ची को पंख लग गए। उसने अपने परिवार को भी कुछ दिन के लिए यहीं बुला लिया। एक दिन डॉ. टम्टा क्वार्टर में पहुंचे तो वहां बावर्जी ‘साहब’ का परिवार रह रहा था। उन्होंने आवास खाली करने को कहा तो कहने लगा कि ‘साहब से बात कर लीजिए, वो ही आपको इस बारे में बता सकते हैं’। इस मामले में दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि बावर्ची को आवास खाली करने को कह दिया है। फिलहाल इसकी शिकायत नहीं मिली है।
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देहरादून। प्रदेश के एक बड़े अफसर के बावर्ची ने दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) के सरकारी आवास पर कब्जा कर लिया है। अफसर की सिफारिश पर आरोपी को सर्वेंट क्वार्टर दिया गया था, लेकिन अब वह ठाठ से टाईप-4 आवास में रह रहा है। मजबूर एमएस जब उससे इसे खाली कराने को कहते हैं तो वह साहब की धमकी दे रहा है।
दरअसल, अफसर को अपने बावर्ची के लिए रहने की व्यवस्था करनी थी। कुछ नहीं सूझा तो उन्होंने दून अस्पताल के अधिकारियों से उसकी व्यवस्था करने को कह दिया। चूंकि, आदेश अफसर का था तो उसे कोई टाल भी नहीं पा रहा था। इसी बीच डॉ. केके टम्टा ने अपने आवास का सुझाव दे दिया। उनका शहर में अपना निजी मकान हैं। इस पर बावर्ची के लिए आवास का सर्वेंट क्वार्टर खोल दिया। कुछ ही दिन हुए थे कि बावर्ची ने डॉ. टम्टा से गुजारिश की कि ‘साहब! आपके क्वार्टर में फ्रीज रखा है तो मैं उसे इस्तेमाल कर लूंगा।’ लिहाजा, मुझे चाबी दे दीजिए। डॉ. टम्टा ने उसे चाबी थमा दी।
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फिर क्या था बावर्ची को पंख लग गए। उसने अपने परिवार को भी कुछ दिन के लिए यहीं बुला लिया। एक दिन डॉ. टम्टा क्वार्टर में पहुंचे तो वहां बावर्जी ‘साहब’ का परिवार रह रहा था। उन्होंने आवास खाली करने को कहा तो कहने लगा कि ‘साहब से बात कर लीजिए, वो ही आपको इस बारे में बता सकते हैं’। इस मामले में दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि बावर्ची को आवास खाली करने को कह दिया है। फिलहाल इसकी शिकायत नहीं मिली है।
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