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किला जीतने सरीखा है गोल्डन कार्ड बनवाना
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किला जीतने सरीखा है गोल्डन कार्ड बनवाना
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। उत्तराखंड अटल आयुष्मान योजना का लाभ लेना तो बड़ी बात लोगों को इसका कार्ड बनाने में पसीने छूट रहे हैं। आलम यह है कि लोग विभागों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कहीं डाटा मैच नहीं हो रहा है तो कहीं नाम। आम लोगों के लिए गोल्डन कार्ड बनवाना किसी किले को जीतने जैसा साबित हो रहा है।
राज्य सरकार की ओर से संचालित योजना का लाभ लेने के लिए गोल्डन कार्ड होना जरूरी है। योजना शुरू होने के छह माह बाद भी लोग यह कार्ड बनवाने के लिए विभागों में भटक रहे हैं। इसके अलावा कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) से भी कोई बड़ी राहत नहीं मिल पा रही है। किसी का आधार और राशन कार्ड में नाम मैच नहीं हो रहा तो किसी का वेबसाइट पर नहीं मिल रहा है। जिसके चलते लोग परेशान हैं। ऐसे में वह जब जिला आपूर्ति विभाग के दफ्तर में राशन कार्ड में नाम सही कराने जा रहे हैं तो उन्हें कार्ड का नवीनीकरण नहीं होने का हवाला देकर लौटाया जा रहा है।
दरअसल, सरकार ने योजना में शामिल करने के लिए साल 2012 का आंकड़े को आधार बनाया है। इन आठ साल बाद काफी कुछ बदल चुका है। इस अवधि में अनेक लोगों के पते बदल चुके हैं। ऐसे में लोगों को दिक्कत हो रही है। इसी को देखते हुए बृहस्पतिवार को अमर उजाला टीम ने कार्ड बनाए जाने वाले स्थानों का जायजा लिया। ...
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लाइव...
सुबह 11 बजे
राजीव गांधी कांप्लेक्स स्थित कॉमन सर्विस सेंटर में भीड़ लगनी शुरू हो गई। सर्वर ठप होने के कारण लोग वहीं बैठ गए। इस दौरान सुशीला ने बताया कि वह तीसरी बार अटल आयुष्मान योजना का कार्ड के लिए आई है लेकिन हर बार निराश होकर वापस जाना पड़ रहा है।
दोपहर 12 बजे
राजीव गांधी कांप्लेक्स स्थित सीएससी के संचालक सागर ने बताया कि अटल आयुष्मान योजना का कार्ड बनवाने के लिए सुबह से ही लोग आने शुरू हो जाते हैं। वेबसाइट पर 2012 के राशन कार्ड की सूची अपलोड की गई है। ऐसे में अधिकतर लोगों का नाम वेबसाइट पर नहीं होने के कारण उनको वापस लौटना पड़ता है।
दोपहर 1 बजे
दून मेडिकल कॉलेज पहुंची वंदना सेमवाल ने बताया कि आधार कार्ड और राशन कार्ड में नाम अलग-अलग है। इस कारण आयुष्मान योजना का कार्ड नहीं बन पा रहा है। बताया कि वह नाम सहीं कराने के लिए जिला आपूर्ति दफ्तर गई थी, वहां से भी उन्हें बिना काम किए लौट दिया गया।
कोट :::
यदि किसी का डाटा मिलान नहीं हो रहा है तो गोल्डन कार्ड नहीं बनेगा। ऐसा योजना में पारदर्शिता के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा यदि शासन से कोई आदेश योजना के संबंध में मिलता है तो उसके अनुसार की आगे कार्य किया जाएगा।
- अभिषेक त्रिपाठी, निदेशक (प्रशासन), उत्तराखंड अटल आयुष्मान योजना
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। उत्तराखंड अटल आयुष्मान योजना का लाभ लेना तो बड़ी बात लोगों को इसका कार्ड बनाने में पसीने छूट रहे हैं। आलम यह है कि लोग विभागों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कहीं डाटा मैच नहीं हो रहा है तो कहीं नाम। आम लोगों के लिए गोल्डन कार्ड बनवाना किसी किले को जीतने जैसा साबित हो रहा है।
राज्य सरकार की ओर से संचालित योजना का लाभ लेने के लिए गोल्डन कार्ड होना जरूरी है। योजना शुरू होने के छह माह बाद भी लोग यह कार्ड बनवाने के लिए विभागों में भटक रहे हैं। इसके अलावा कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) से भी कोई बड़ी राहत नहीं मिल पा रही है। किसी का आधार और राशन कार्ड में नाम मैच नहीं हो रहा तो किसी का वेबसाइट पर नहीं मिल रहा है। जिसके चलते लोग परेशान हैं। ऐसे में वह जब जिला आपूर्ति विभाग के दफ्तर में राशन कार्ड में नाम सही कराने जा रहे हैं तो उन्हें कार्ड का नवीनीकरण नहीं होने का हवाला देकर लौटाया जा रहा है।
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दरअसल, सरकार ने योजना में शामिल करने के लिए साल 2012 का आंकड़े को आधार बनाया है। इन आठ साल बाद काफी कुछ बदल चुका है। इस अवधि में अनेक लोगों के पते बदल चुके हैं। ऐसे में लोगों को दिक्कत हो रही है। इसी को देखते हुए बृहस्पतिवार को अमर उजाला टीम ने कार्ड बनाए जाने वाले स्थानों का जायजा लिया। ...
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सुबह 11 बजे
राजीव गांधी कांप्लेक्स स्थित कॉमन सर्विस सेंटर में भीड़ लगनी शुरू हो गई। सर्वर ठप होने के कारण लोग वहीं बैठ गए। इस दौरान सुशीला ने बताया कि वह तीसरी बार अटल आयुष्मान योजना का कार्ड के लिए आई है लेकिन हर बार निराश होकर वापस जाना पड़ रहा है।
दोपहर 12 बजे
राजीव गांधी कांप्लेक्स स्थित सीएससी के संचालक सागर ने बताया कि अटल आयुष्मान योजना का कार्ड बनवाने के लिए सुबह से ही लोग आने शुरू हो जाते हैं। वेबसाइट पर 2012 के राशन कार्ड की सूची अपलोड की गई है। ऐसे में अधिकतर लोगों का नाम वेबसाइट पर नहीं होने के कारण उनको वापस लौटना पड़ता है।
दोपहर 1 बजे
दून मेडिकल कॉलेज पहुंची वंदना सेमवाल ने बताया कि आधार कार्ड और राशन कार्ड में नाम अलग-अलग है। इस कारण आयुष्मान योजना का कार्ड नहीं बन पा रहा है। बताया कि वह नाम सहीं कराने के लिए जिला आपूर्ति दफ्तर गई थी, वहां से भी उन्हें बिना काम किए लौट दिया गया।
कोट :::
यदि किसी का डाटा मिलान नहीं हो रहा है तो गोल्डन कार्ड नहीं बनेगा। ऐसा योजना में पारदर्शिता के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा यदि शासन से कोई आदेश योजना के संबंध में मिलता है तो उसके अनुसार की आगे कार्य किया जाएगा।
- अभिषेक त्रिपाठी, निदेशक (प्रशासन), उत्तराखंड अटल आयुष्मान योजना