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फसल चक्र के अनुसार खेती कर बढ़ाएं उत्पादन
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
मल्टीपल एक्शन ग्रुप फॉर इंटीग्रेटेड सोसाइटी की ओर से ढकरानी बावड़ी में संचालित जैविक खेती प्रशिक्षण के तहत शनिवार को काश्तकारों को फसल चक्र के आधार पर खेती कर उत्पादन बढ़ाने की सलाह दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि अच्छी फसल के लिए मिट्टी की उर्वरता पर भी किसान ध्यान दें।
प्रशिक्षण शिविर में बतौर मुख्य प्रशिक्षक शिरकत कर रहे ग्राफिक एरा विवि के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. परमत शाह ने कहा कि फसलों का चयन जलवायु और धरातलीय बनावट के साथ ही मिट्टी की उर्वरता के आधार पर किया जाना चाहिए। फसलों के उत्पादन में वृद्धि के लिए वैज्ञानिक तरीके से खेती की जानी जरूरी है। जबकि, गेहूं और धान के बीच में कम अवधि की मूंग दाल की फसल उगाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि खेतों में रासायनिक खाद के प्रयोग के बजाय जैविक खाद के उपयोग करने से उत्पादन बढ़ाने के साथ ही स्वास्थ्य के अनुकूल उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
सोसाइटी के मुख्य सलाहकार पीडी बहुखंडी ने वैज्ञानिक तरीके से आम, लीची, संतरा की खेती करने की विधि काश्तकारों को बताई। उन्होंने कहा कि परंपरागत खेती के साथ ही नगदी फसलों का उत्पादन कर किसान आर्थिक संसाधनों में वृद्धि कर सकते हैं। किसान दीपक उपाध्याय ने मृदा परीक्षण व सिंचाई के लिए जल संरक्षण के तौर तरीके की जानकारी दी। प्रशिक्षण शिविर में अमृता, कविता चौहान, अमित रोहिला, जयपाल राणा, हिमांशु आर्य, श्यामा चौहान, प्रवेश सिंह, प्रवीण राणा, अनुकृति चौहान, शायरा, पूनम आदि मौजूद रहे।
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मल्टीपल एक्शन ग्रुप फॉर इंटीग्रेटेड सोसाइटी की ओर से ढकरानी बावड़ी में संचालित जैविक खेती प्रशिक्षण के तहत शनिवार को काश्तकारों को फसल चक्र के आधार पर खेती कर उत्पादन बढ़ाने की सलाह दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि अच्छी फसल के लिए मिट्टी की उर्वरता पर भी किसान ध्यान दें।
प्रशिक्षण शिविर में बतौर मुख्य प्रशिक्षक शिरकत कर रहे ग्राफिक एरा विवि के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. परमत शाह ने कहा कि फसलों का चयन जलवायु और धरातलीय बनावट के साथ ही मिट्टी की उर्वरता के आधार पर किया जाना चाहिए। फसलों के उत्पादन में वृद्धि के लिए वैज्ञानिक तरीके से खेती की जानी जरूरी है। जबकि, गेहूं और धान के बीच में कम अवधि की मूंग दाल की फसल उगाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि खेतों में रासायनिक खाद के प्रयोग के बजाय जैविक खाद के उपयोग करने से उत्पादन बढ़ाने के साथ ही स्वास्थ्य के अनुकूल उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
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सोसाइटी के मुख्य सलाहकार पीडी बहुखंडी ने वैज्ञानिक तरीके से आम, लीची, संतरा की खेती करने की विधि काश्तकारों को बताई। उन्होंने कहा कि परंपरागत खेती के साथ ही नगदी फसलों का उत्पादन कर किसान आर्थिक संसाधनों में वृद्धि कर सकते हैं। किसान दीपक उपाध्याय ने मृदा परीक्षण व सिंचाई के लिए जल संरक्षण के तौर तरीके की जानकारी दी। प्रशिक्षण शिविर में अमृता, कविता चौहान, अमित रोहिला, जयपाल राणा, हिमांशु आर्य, श्यामा चौहान, प्रवेश सिंह, प्रवीण राणा, अनुकृति चौहान, शायरा, पूनम आदि मौजूद रहे।
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