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जैविक सब्जी उत्पादन के गुर बताए
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
ढकरानी बावड़ी में मल्टीपल एक्शन ग्रुप फॉर इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट सोसायटी की ओर से बुधवार को स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए जैविक खेती प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जैविक विधि से ग्वार फली सहित अन्य सब्जियों के उत्पादन के गुर बताए गए। साथ ही रासायनिक खादों के प्रयोग से होने वाले नुकसान की जानकारी भी दी गई।
मास्टर ट्रेनर अमित रोहिला ने बताया कि रासायनिक खादों के प्रयोग से भूमि की उर्वरता समाप्त होने के साथ ही बीमारियां भी बढ़ रही हैं। खाद से जमीन के अंदर रहने वाले कीड़े भी समाप्त हो रहे हैं, जो जमीन की उर्वरता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कीटनाशक और रासायनिक खादों के अधिक प्रयोग से होने वाले उत्पाद का मानव शरीर पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। बताया कि रासायनिक खाद के बदले गोबर, बर्मी कंपोस्ट, हरे घास सहित खर पतवार की खाद लाभदायक होती है। इसके प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति धीरे धीरे बढ़ती रहती है, जो दीर्घकाल तक लाभदायक साबित होती है। इससे पैदा होने वाली उपज से बीमारी भी नहीं होती। साथ ही सब्जियों का जैविक विधि से उत्पादन करने की जानकारी मुहैया कराई गई।
इस दौरान कविता चौहान, रीना, राजी, शालू, अमृता, राधा आदि मौजूद रहे।
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ढकरानी बावड़ी में मल्टीपल एक्शन ग्रुप फॉर इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट सोसायटी की ओर से बुधवार को स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए जैविक खेती प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जैविक विधि से ग्वार फली सहित अन्य सब्जियों के उत्पादन के गुर बताए गए। साथ ही रासायनिक खादों के प्रयोग से होने वाले नुकसान की जानकारी भी दी गई।
मास्टर ट्रेनर अमित रोहिला ने बताया कि रासायनिक खादों के प्रयोग से भूमि की उर्वरता समाप्त होने के साथ ही बीमारियां भी बढ़ रही हैं। खाद से जमीन के अंदर रहने वाले कीड़े भी समाप्त हो रहे हैं, जो जमीन की उर्वरता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कीटनाशक और रासायनिक खादों के अधिक प्रयोग से होने वाले उत्पाद का मानव शरीर पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। बताया कि रासायनिक खाद के बदले गोबर, बर्मी कंपोस्ट, हरे घास सहित खर पतवार की खाद लाभदायक होती है। इसके प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति धीरे धीरे बढ़ती रहती है, जो दीर्घकाल तक लाभदायक साबित होती है। इससे पैदा होने वाली उपज से बीमारी भी नहीं होती। साथ ही सब्जियों का जैविक विधि से उत्पादन करने की जानकारी मुहैया कराई गई।
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इस दौरान कविता चौहान, रीना, राजी, शालू, अमृता, राधा आदि मौजूद रहे।