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सुगंधित तेलों के व्यापार में हैं संभावनाएं
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
वन अनुसंधान संस्थान में आयोजित पांच दिवसीय सह कार्यशाला में सोमवार को सुगंधित तेलों के वैश्विक परिदृश्य, विविध व्यापारिक एवं रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा की गई। रसायन एवं जैव पर्वेक्षण प्रभाग, वन अनुसंधान संस्थान (एफ आरआई), सुगंध और सुरस विकास केंद्र (एफ एफ डीसी) कन्नौज की ओर से ‘सुगंधित तेल, परफ्यूमरी और अरोमाथेरेपी’ विषय पर आधारित कार्यशाला का शुभारंभ एफआरआई के निदेशक डॉ. एएस रावत ने दीप जलाकर किया।
इस दौरान डॉ. एएस रावत न सुगंध उद्यमियों से आधुनिक ज्ञान और तकनीकी क्षमताओं से अपने ज्ञान को परिष्कृत व परिमार्जित करने का आह्वान किया। उन्होंने प्राकृतिक उत्पादों की तरफ जनसामान्य के झुकाव को देखते हुए सुगंध के क्षेत्र में वनों एवं वन उत्पादों की महत्ता पर प्रकाश डाला। इसके बाद एपी सिंह ने सुगंधित तेलों के वैश्विक परिदृश्य, विविध व्यापारिक एवं रोजगार की संभावनाओं की जानकारी दी। मुंबई से आए स्वतंत्र सलाहकार सीताराम दीक्षित ने सुगंधित तेलों के स्रोतों, महत्व तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक क्षमताओं पर चर्चा की। वन पैथोलॉजिस्ट डॉ. शैलेश पांडे ने सुगंध के गैर पारंपरिक एवं नवीन स्रोत के रूप में कवकों की महत्ता पर व्याख्यान दिया। कार्यशाला में देश विभिन्न राज्यों से 43 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में वैज्ञानिक. प्रदीप शर्मा, वैज्ञानिक. डॉ. एके पांडेय, डॉ. वीके वार्ष्णेय, डॉ. वाईसी त्रिपाठी, ग्रुप कोऑर्डिनेटर (रिसर्च), एफआरआई के विभिन्न प्रभागों के प्रमुख व अन्य अधिकारी और शोध छात्र मौजूद रहे।
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वन अनुसंधान संस्थान में आयोजित पांच दिवसीय सह कार्यशाला में सोमवार को सुगंधित तेलों के वैश्विक परिदृश्य, विविध व्यापारिक एवं रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा की गई। रसायन एवं जैव पर्वेक्षण प्रभाग, वन अनुसंधान संस्थान (एफ आरआई), सुगंध और सुरस विकास केंद्र (एफ एफ डीसी) कन्नौज की ओर से ‘सुगंधित तेल, परफ्यूमरी और अरोमाथेरेपी’ विषय पर आधारित कार्यशाला का शुभारंभ एफआरआई के निदेशक डॉ. एएस रावत ने दीप जलाकर किया।
इस दौरान डॉ. एएस रावत न सुगंध उद्यमियों से आधुनिक ज्ञान और तकनीकी क्षमताओं से अपने ज्ञान को परिष्कृत व परिमार्जित करने का आह्वान किया। उन्होंने प्राकृतिक उत्पादों की तरफ जनसामान्य के झुकाव को देखते हुए सुगंध के क्षेत्र में वनों एवं वन उत्पादों की महत्ता पर प्रकाश डाला। इसके बाद एपी सिंह ने सुगंधित तेलों के वैश्विक परिदृश्य, विविध व्यापारिक एवं रोजगार की संभावनाओं की जानकारी दी। मुंबई से आए स्वतंत्र सलाहकार सीताराम दीक्षित ने सुगंधित तेलों के स्रोतों, महत्व तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक क्षमताओं पर चर्चा की। वन पैथोलॉजिस्ट डॉ. शैलेश पांडे ने सुगंध के गैर पारंपरिक एवं नवीन स्रोत के रूप में कवकों की महत्ता पर व्याख्यान दिया। कार्यशाला में देश विभिन्न राज्यों से 43 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में वैज्ञानिक. प्रदीप शर्मा, वैज्ञानिक. डॉ. एके पांडेय, डॉ. वीके वार्ष्णेय, डॉ. वाईसी त्रिपाठी, ग्रुप कोऑर्डिनेटर (रिसर्च), एफआरआई के विभिन्न प्रभागों के प्रमुख व अन्य अधिकारी और शोध छात्र मौजूद रहे।
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