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जुड़वा परिनव और अभिनव बने सेना में अफसर
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जुड़वा परिनव और अभिनव बने सेना में अफसर
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। हर व्यक्ति की अपनी कहानी होती है, लेकिन कुछ कहानियां काफी दिलचस्प और अनूठी होती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है जालंधर के रहने वाले जुड़वा भाइयों की। जो शनिवार को एक साथ सेना में अफसर बने। खास बात यह है कि परिनव पाठक और अभिनव पाठक के रिजल्ट भी लगभग एक जैसे ही आए।
परिनव और अभिनव साथ जन्मे, साथ पढ़े और साथ ही अफसर भी बन गए। एक साथ देश सेवा के लिए खुद को समर्पित करने वाले जुड़वा भाई शनिवार को आईएमए से पासआउट हुए हैं। परिनव कहते हैं कि आज हमारे साथ ही पूरा परिवार खुश है कि हम दोनों आर्मी में उस जगह पहुंच गए हैं, जिसका सपना हम देखा करते थे। बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें वीरता की कहानियां प्रेरित करती थी। अभिनव के साथ ही ऐसा ही था। हम दोनों ने अमृतसर से 12वीं तक की पढ़ाई की। दोनों ने 10वीं और 12वीं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए। इसके बाद बीटेक भी 80 से अधिक प्रतिशत के साथ पास किया। जून 2018 में टेक्निकल कोर में आईएमए में इंट्री हुई। आज अफसर बनकर अच्छा लग रहा है। अभिनव से दो मिनट बड़े परिनव कहते हैं कि हमने बचपन में ही तय कर लिया था कि फौज में जाना है।
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माता-पिता का मिला पूरा सपोर्ट
परिनव और अभिनव पाठक कहते हैं कि पिता अशोक कुमार ट्रांसपोर्टर है। माता मंजू गृहणी हैं। दोनों ने हमें बचपन से ही पूरा सपोर्ट किया। शायद यही वजह है कि हम अपना सपना पूरा करने में सफल हो सके। पिता अशोक और मां मंजू बेटे के अफसर बनने से काफी गदगद दिखे। उनका कहना था कि बच्चों के साथ ही उनका सपना भी पूरा हो गया है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। हर व्यक्ति की अपनी कहानी होती है, लेकिन कुछ कहानियां काफी दिलचस्प और अनूठी होती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है जालंधर के रहने वाले जुड़वा भाइयों की। जो शनिवार को एक साथ सेना में अफसर बने। खास बात यह है कि परिनव पाठक और अभिनव पाठक के रिजल्ट भी लगभग एक जैसे ही आए।
परिनव और अभिनव साथ जन्मे, साथ पढ़े और साथ ही अफसर भी बन गए। एक साथ देश सेवा के लिए खुद को समर्पित करने वाले जुड़वा भाई शनिवार को आईएमए से पासआउट हुए हैं। परिनव कहते हैं कि आज हमारे साथ ही पूरा परिवार खुश है कि हम दोनों आर्मी में उस जगह पहुंच गए हैं, जिसका सपना हम देखा करते थे। बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें वीरता की कहानियां प्रेरित करती थी। अभिनव के साथ ही ऐसा ही था। हम दोनों ने अमृतसर से 12वीं तक की पढ़ाई की। दोनों ने 10वीं और 12वीं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए। इसके बाद बीटेक भी 80 से अधिक प्रतिशत के साथ पास किया। जून 2018 में टेक्निकल कोर में आईएमए में इंट्री हुई। आज अफसर बनकर अच्छा लग रहा है। अभिनव से दो मिनट बड़े परिनव कहते हैं कि हमने बचपन में ही तय कर लिया था कि फौज में जाना है।
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माता-पिता का मिला पूरा सपोर्ट
परिनव और अभिनव पाठक कहते हैं कि पिता अशोक कुमार ट्रांसपोर्टर है। माता मंजू गृहणी हैं। दोनों ने हमें बचपन से ही पूरा सपोर्ट किया। शायद यही वजह है कि हम अपना सपना पूरा करने में सफल हो सके। पिता अशोक और मां मंजू बेटे के अफसर बनने से काफी गदगद दिखे। उनका कहना था कि बच्चों के साथ ही उनका सपना भी पूरा हो गया है।
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