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सौभाग्य योजना में अनियमितता की शिकायत
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
साहिया। जौनसार बावर परगने में करोड़ों की लागत से शुरू की गई पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण और सौभाग्य योजना में भारी अनियमितता की शिकायत सामने आने पर ग्रामीणों ने ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता से कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारियों ने गांव एवं मजरों में बिछाई जा रही बिजली की लाइनों का कार्य एक निजी कंपनी को दिया हुआ है। जबकि कंपनी ने कार्य पेटी ठेकेदारों को दे दिया, जोकि कार्य की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार की पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण एवं सौभाग्य योजना के तहत कालसी एवं चकराता ब्लॉक में करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से 3800 उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन दिए जाने हैं, जिसमें खेड़ों और मजरों में निवास करने वाले लोगों को पहली प्राथमिकता दी जा रही है। उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने का जिम्मा एक निजी कंपनी को दिया गया है। लेकिन, निजी कंपनी ने पूरे काम को पेटी ठेकेदारों में बांट दिया, जिससे कार्य की गुणवत्ता सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय निवासी श्यामदत्त वर्मा, जवाहर सिंह, परम सिंह, सुरेंद्र सिंह, खजान सिंह आदि ने सरकारी धन के दुरुपयोग की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
उधर, ऊर्जा निगम के अधिशासी अधिकारी एसके गुप्ता ने बताया कि योजना का निरीक्षण किया जा रहा है। जहां लापरवाही हुई है, वहां ठेकेदार का पेमेंट रोका जा रहा है।
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साहिया। जौनसार बावर परगने में करोड़ों की लागत से शुरू की गई पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण और सौभाग्य योजना में भारी अनियमितता की शिकायत सामने आने पर ग्रामीणों ने ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता से कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारियों ने गांव एवं मजरों में बिछाई जा रही बिजली की लाइनों का कार्य एक निजी कंपनी को दिया हुआ है। जबकि कंपनी ने कार्य पेटी ठेकेदारों को दे दिया, जोकि कार्य की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार की पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण एवं सौभाग्य योजना के तहत कालसी एवं चकराता ब्लॉक में करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से 3800 उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन दिए जाने हैं, जिसमें खेड़ों और मजरों में निवास करने वाले लोगों को पहली प्राथमिकता दी जा रही है। उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने का जिम्मा एक निजी कंपनी को दिया गया है। लेकिन, निजी कंपनी ने पूरे काम को पेटी ठेकेदारों में बांट दिया, जिससे कार्य की गुणवत्ता सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय निवासी श्यामदत्त वर्मा, जवाहर सिंह, परम सिंह, सुरेंद्र सिंह, खजान सिंह आदि ने सरकारी धन के दुरुपयोग की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
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उधर, ऊर्जा निगम के अधिशासी अधिकारी एसके गुप्ता ने बताया कि योजना का निरीक्षण किया जा रहा है। जहां लापरवाही हुई है, वहां ठेकेदार का पेमेंट रोका जा रहा है।
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