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अरबों की लागत वाले कोबरा प्रकरण की जांच पूरी
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अरबों की लागत वाले कोबरा प्रकरण की जांच पूरी
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पिटकुल में कोबरा प्रकरण को लेकर गठित आंतरिक जांच समिति से अपनी रिपोर्ट प्रबंध निदेशक को सौंप दी है। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अनुबंध की शर्तों के तहत कंपनी निर्माण कार्यों को शुरू नहीं कर पाई है। कंपनी ने किसी भी प्रकार का रनिंग बिल प्रस्तुत नहीं किया गया। विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट का प्रबंधन परीक्षण कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि पिटकुल की ओर से काशीपुर व श्रीनगर के बीच 191 किमी लंबी पावरग्रिड लाइन बिछाई जानी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 2014 में स्वीकृति दी गई थी। एडीबी परियोजना के लिए 530 करोड़ रुपये देने पर राजी भी हो गया, लेकिन पिटकुल प्रबंधन व परियोजना से जुड़ी निजी कंपनी कोबरा के अफसरों की लापरवाही से योजना खटाई में पड़ गई। एडीबी ने भी परियोजना के लिए बजट देने से भी इंकार कर दिया था। बाद में पिटकुल प्रबंधन व निजी कंपनी कोबरा की आपसी लड़ाई अदालत तक पहुंच गई।
कोबरा कंपनी की ओर से पिटकुल प्रबंधन के खिलाफ आर्बिट्रेशन में वाद दाखिल किया गया। कई अरब रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के खटाई में पड़ जाने के बाद पिटकुल के प्रबंध निदेशक की ओर से भी आंतरिक जांच कमेटी गठित की गई थी, जिसने डेढ़ साल बाद अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कोबरा कंपनी ने अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने के साथ ही निर्माण कार्यों को लेकर कोई खास रुचि नहीं दिखाई। कंपनी ने इस कार्य को खुद करने के बजाय मेसर्स यूनिटेक मशीन्स व ड्रेक एंड स्कल जैसी कंपनियाें को सौंप दिया। प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल ने बताया कि जांच कमेटी की रिपोर्ट का परीक्षण कराया जा रहा है, उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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दोगुनी हो गई परियोजना की निर्माण लागत
2014 में इस परियोजना के लिए 530 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। कोबरा कंपनी को ठेका भी दे दिया गया। पिटकुल की ओर से 53 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान भी कर दिया गया लेकिन बाद में कुछ अड़चन आ गई, जिसकी वजह से कंपनी ने काम ही नहीं किया। आखिरकार बाद में एडीबी ने बजट देने से ही इंकार कर दिया। फिलहाल ऊर्जा सचिव के साथ एडीबी व केंद्र सरकार के अफसरों के बीच हुई कई दौर की वार्ता के बाद एडीबी नए सिरे से बजट देने पर राजी हो गया है। पिटकुल अफसरों के मुताबिक अब इस परियोजना की निर्माण लागत 1197 करोड़ हो गई है।
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परियोजना में 40 किमी अतिरिक्त लाइन बिछानी पड़ेगी
वन पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जिम कार्बेट पार्क के ऊपर से लाइन ले जाने की मंजूरी नहीं मिलने से परियोजना में अब 40 किमी अतिरिक्त लाइन बिछानी पड़ेगी। पिटकुल अफसरों के मुताबिक अब 150 किमी की जगह 191 किमी पावरग्रिड लाइन बिछानी पड़ेगी।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पिटकुल में कोबरा प्रकरण को लेकर गठित आंतरिक जांच समिति से अपनी रिपोर्ट प्रबंध निदेशक को सौंप दी है। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अनुबंध की शर्तों के तहत कंपनी निर्माण कार्यों को शुरू नहीं कर पाई है। कंपनी ने किसी भी प्रकार का रनिंग बिल प्रस्तुत नहीं किया गया। विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट का प्रबंधन परीक्षण कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि पिटकुल की ओर से काशीपुर व श्रीनगर के बीच 191 किमी लंबी पावरग्रिड लाइन बिछाई जानी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 2014 में स्वीकृति दी गई थी। एडीबी परियोजना के लिए 530 करोड़ रुपये देने पर राजी भी हो गया, लेकिन पिटकुल प्रबंधन व परियोजना से जुड़ी निजी कंपनी कोबरा के अफसरों की लापरवाही से योजना खटाई में पड़ गई। एडीबी ने भी परियोजना के लिए बजट देने से भी इंकार कर दिया था। बाद में पिटकुल प्रबंधन व निजी कंपनी कोबरा की आपसी लड़ाई अदालत तक पहुंच गई।
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कोबरा कंपनी की ओर से पिटकुल प्रबंधन के खिलाफ आर्बिट्रेशन में वाद दाखिल किया गया। कई अरब रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के खटाई में पड़ जाने के बाद पिटकुल के प्रबंध निदेशक की ओर से भी आंतरिक जांच कमेटी गठित की गई थी, जिसने डेढ़ साल बाद अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कोबरा कंपनी ने अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने के साथ ही निर्माण कार्यों को लेकर कोई खास रुचि नहीं दिखाई। कंपनी ने इस कार्य को खुद करने के बजाय मेसर्स यूनिटेक मशीन्स व ड्रेक एंड स्कल जैसी कंपनियाें को सौंप दिया। प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल ने बताया कि जांच कमेटी की रिपोर्ट का परीक्षण कराया जा रहा है, उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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दोगुनी हो गई परियोजना की निर्माण लागत
2014 में इस परियोजना के लिए 530 करोड़ रुपये का बजट रखा गया था। कोबरा कंपनी को ठेका भी दे दिया गया। पिटकुल की ओर से 53 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान भी कर दिया गया लेकिन बाद में कुछ अड़चन आ गई, जिसकी वजह से कंपनी ने काम ही नहीं किया। आखिरकार बाद में एडीबी ने बजट देने से ही इंकार कर दिया। फिलहाल ऊर्जा सचिव के साथ एडीबी व केंद्र सरकार के अफसरों के बीच हुई कई दौर की वार्ता के बाद एडीबी नए सिरे से बजट देने पर राजी हो गया है। पिटकुल अफसरों के मुताबिक अब इस परियोजना की निर्माण लागत 1197 करोड़ हो गई है।
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परियोजना में 40 किमी अतिरिक्त लाइन बिछानी पड़ेगी
वन पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जिम कार्बेट पार्क के ऊपर से लाइन ले जाने की मंजूरी नहीं मिलने से परियोजना में अब 40 किमी अतिरिक्त लाइन बिछानी पड़ेगी। पिटकुल अफसरों के मुताबिक अब 150 किमी की जगह 191 किमी पावरग्रिड लाइन बिछानी पड़ेगी।