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झाझरा पावर सब स्टेशन में 15 करोड़ का ट्रांसफार्मर फुंका
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झाझरा पावर सब स्टेशन में 15 करोड़ का ट्रांसफार्मर फुंका
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के झाझरा स्थित पावर सब स्टेशन में दो साल पूर्व पांच करोड़ की लागत वाले 80 एमवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर फुंकने की जांच भी पूरी नहीं हो पाई है कि इसी सब स्टेशन में स्थापित 160 एमवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर शुक्रवार रात फुंक गया। इस ट्रांसफार्मर की कीमत 15 करोड़ के आसपास बताई जा रही है। इस घटना से भी ट्रांसफार्मराें की गुुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। दूसरी ओर प्रकरण में पिटकुल अधिकारियों व अभियंताआें ने चुप्पी साध ली है।
उल्लेखनीय है कि पिटकुल की ओर से झाझरा स्थित पावर सब स्टेशन में 160 एमवीए क्षमता के दो, 80 एमवीए क्षमता के दो व 40 एमवीए का एक ट्रांसफार्मर लगाया गया है। ज्यादातर ट्रांसफार्मर आईएमपी कंपनी की ओर से लगाए गए हैं। दो साल पूर्व पावर सब स्टेशन में 80 एमवीए क्षमता का नया ट्रांसफार्मर उस समय जल गया था, जब उसे स्थापित करने के साथ ही ऊर्जीकृत किया जा रहा था। पांच करोड़ की क्षमता वाला वह ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद मुख्य अभियंता समेत दर्जनभर अभियंताओं को आरोप पत्र जारी किए गए। हालांकि बाद में विभागीय स्तर पर गठित जांच कमेटी ने चार अभियंताओं को छोड़कर बाकी सबको क्लीन चिट दे दी। प्रकरण की अभी भी जांच जारी है। इस प्रकरण को लेकर पिटकुल और आईएमपी कंपनी आमने सामने हैं।
इसी बीच शुक्रवार रात झाझरा सब स्टेशन में ही 160 एमवीए क्षमता का भारी भरकम ट्रांसफार्मर फुंक गया। परिणामस्वरूप इसका असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ा। चौंकाने वाली बात यह है कि 160 एमवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर खराब हो गया, लेकिन इस संबंध में जब विभागीय अधिकारियों व अभियंताओं से पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी जानकारी देने से इनकार कर दिया। झाझरा पावर सब स्टेशन के अधिशासी अभियंता रविंद्र सैनी ने कहा कि वे कोई भी बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हैं। इस संबंध में मुख्यालय में तैनात अधीक्षण अभियंता नीरज पाठक ही अधिकृत बयान दे सकते हैं, लेकिन जब नीरज पाठक से जानकारी ली गई तो उन्होंने अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि प्रबंध निदेशक व निदेशक परिचालन से जानकारी ली जा सकती है। वहीं निदेशक परिचालन संजय मित्तल से संपर्क नहीं हो सका।
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ट्रांसफार्मर खराब होने से गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल
झाझरा पावर सब स्टेशन पर 160 एमवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद एक बार फिर आईएमपी कंपनी के ट्रांसफार्मराें की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। आईएमपी कंपनी की ओर से कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्रों में विभिन्न क्षमता के 29 ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। ऐसे में अब जबकि आईएमपी के दो ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं तो इस कंपनी के सभी 29 ट्रांसफार्मर की जांच कराए जाने की जरूरत है।
नहीं बदला गया दो साल पूर्व जला ट्रांसफार्मर
झाझरा पावर सब स्टेशन में दो साल पूर्व खराब 80 एमवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद नए की आपूर्ति नहीं हो पाई है। पिटकुल प्रबंधन इस बात पर अड़ा है कि कंपनी पहले नए ट्रांसफार्मर की आपूर्ति करे तब पुराना दिया जाएगा। जबकि कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि जिस गाड़ी से पुराना ट्रांसफार्मर उनके पास भेजा जाएगा, उससे ही नया भेजा जाएगा, लेकिन पिटकुल अधिकारी इस पर राजी नहीं हैं।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के झाझरा स्थित पावर सब स्टेशन में दो साल पूर्व पांच करोड़ की लागत वाले 80 एमवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर फुंकने की जांच भी पूरी नहीं हो पाई है कि इसी सब स्टेशन में स्थापित 160 एमवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर शुक्रवार रात फुंक गया। इस ट्रांसफार्मर की कीमत 15 करोड़ के आसपास बताई जा रही है। इस घटना से भी ट्रांसफार्मराें की गुुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। दूसरी ओर प्रकरण में पिटकुल अधिकारियों व अभियंताआें ने चुप्पी साध ली है।
उल्लेखनीय है कि पिटकुल की ओर से झाझरा स्थित पावर सब स्टेशन में 160 एमवीए क्षमता के दो, 80 एमवीए क्षमता के दो व 40 एमवीए का एक ट्रांसफार्मर लगाया गया है। ज्यादातर ट्रांसफार्मर आईएमपी कंपनी की ओर से लगाए गए हैं। दो साल पूर्व पावर सब स्टेशन में 80 एमवीए क्षमता का नया ट्रांसफार्मर उस समय जल गया था, जब उसे स्थापित करने के साथ ही ऊर्जीकृत किया जा रहा था। पांच करोड़ की क्षमता वाला वह ट्रांसफार्मर फुंकने के बाद मुख्य अभियंता समेत दर्जनभर अभियंताओं को आरोप पत्र जारी किए गए। हालांकि बाद में विभागीय स्तर पर गठित जांच कमेटी ने चार अभियंताओं को छोड़कर बाकी सबको क्लीन चिट दे दी। प्रकरण की अभी भी जांच जारी है। इस प्रकरण को लेकर पिटकुल और आईएमपी कंपनी आमने सामने हैं।
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इसी बीच शुक्रवार रात झाझरा सब स्टेशन में ही 160 एमवीए क्षमता का भारी भरकम ट्रांसफार्मर फुंक गया। परिणामस्वरूप इसका असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ा। चौंकाने वाली बात यह है कि 160 एमवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर खराब हो गया, लेकिन इस संबंध में जब विभागीय अधिकारियों व अभियंताओं से पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी जानकारी देने से इनकार कर दिया। झाझरा पावर सब स्टेशन के अधिशासी अभियंता रविंद्र सैनी ने कहा कि वे कोई भी बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हैं। इस संबंध में मुख्यालय में तैनात अधीक्षण अभियंता नीरज पाठक ही अधिकृत बयान दे सकते हैं, लेकिन जब नीरज पाठक से जानकारी ली गई तो उन्होंने अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि प्रबंध निदेशक व निदेशक परिचालन से जानकारी ली जा सकती है। वहीं निदेशक परिचालन संजय मित्तल से संपर्क नहीं हो सका।
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ट्रांसफार्मर खराब होने से गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल
झाझरा पावर सब स्टेशन पर 160 एमवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद एक बार फिर आईएमपी कंपनी के ट्रांसफार्मराें की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। आईएमपी कंपनी की ओर से कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्रों में विभिन्न क्षमता के 29 ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। ऐसे में अब जबकि आईएमपी के दो ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं तो इस कंपनी के सभी 29 ट्रांसफार्मर की जांच कराए जाने की जरूरत है।
नहीं बदला गया दो साल पूर्व जला ट्रांसफार्मर
झाझरा पावर सब स्टेशन में दो साल पूर्व खराब 80 एमवीए क्षमता के ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद नए की आपूर्ति नहीं हो पाई है। पिटकुल प्रबंधन इस बात पर अड़ा है कि कंपनी पहले नए ट्रांसफार्मर की आपूर्ति करे तब पुराना दिया जाएगा। जबकि कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि जिस गाड़ी से पुराना ट्रांसफार्मर उनके पास भेजा जाएगा, उससे ही नया भेजा जाएगा, लेकिन पिटकुल अधिकारी इस पर राजी नहीं हैं।