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तबादला एक्ट : तकनीकी शिक्षा में नहीं जुड़ रहीं कर्मियों की पूरी सेवाएं
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
मुख्यमंत्री के अधीन तकनीकी शिक्षा विभाग में कर्मचारियों की पूरी सेवाएं जोड़े बगैर ही सुगम, दुर्गम की सेवाएं निकालकर तबादलों की तैयारी की जा रही है। वहीं, अन्य विभाग कर्मचारियों के पूरे सेवाकाल को जोड़ रहे हैं। जबकि, पुनर्गठन अधिनियम में यह कहा गया है कि राज्य गठन से पहले जिस कर्मचारी ने यहां सेवाएं की हैं उनकी यहीं की सेवाएं मानी जाएंगी। वहीं, उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षक संघ ने अधिकारियों पर चहेतों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है।
तबादलों के लिए एक्ट के मुताबिक ऐसे कर्मचारी जो सुगम क्षेत्र में वर्तमान तैनाती स्थल पर चार साल या इससे अधिक समय से तैनात हैं। उन्हें दुर्गम क्षेत्र में उपलब्ध संभावित रिक्तियों की कुल संख्या की सीमा के प्रतिबंधों के अधीन अनिवार्य रूप से स्थानांतरित किया जाएगा। इसी तरह दुर्गम क्षेत्र में तीन साल या इससे अधिक वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों की सुगम में तैनाती की जाएगी। इसके लिए कर्मचारियों के पूरे सेवाकाल को जोड़कर यह देखा जा रहा है कि किस कर्मचारी ने कितने साल सुगम में और कितने वर्ष दुर्गम में सेवाएं दीं, लेकिन मुख्यमंत्री के अधीन तकनीकी शिक्षा विभाग ऐसा विभाग है जिसमें नवंबर 2000 के बाद की सेवाओं को जोड़कर कर्मचारियों के तबादलों की तैयारी की जा रही है। इसके लिए प्राविधिक शिक्षा विभाग की ओर से जो फॉर्म तैयार किया गया है उसमें कर्मचारियों से यह भरवाया जा रहा है कि नवंबर 2000 के बाद उसने कितनी सेवाएं कहा कीं। जबकि, कृषि विभाग, जिला विकास विभाग, मत्स्य आदि अन्य विभागों में पूरे सेवाकाल के दौरान की सुगम, दुर्गम की सेवाओं को जोड़ा जा रहा है।
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अलग-अलग नियम अपना रहे विभाग
तबादलों के लिए हर विभाग में स्थाई स्थानांतरण समिति बनी है। स्थानांतरण में पादर्शिता बनी रहे और किसी तरह की कोई गलती न हो इसके लिए इन समितियों में कार्मिक विभाग का एक प्रतिनिधि शामिल किया गया है। इसके बाद भी कर्मचारियों की दुर्गम और सुगम की सेवाओं को जोड़ने के लिए अलग-अलग नियम अपनाए जा रहे हैं।
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विभाग में कई कर्मचारियों ने वर्ष 1995, 1998 में उत्तरकाशी, लोहाघाट आदि जगहों पर सेवाएं दीं हैं। उन कर्मचारियों की दुर्गम की सेवाएं जोड़ी जानी चाहिए। एक्ट की मूल धारणा भी यही है, लेकिन कुछ अफसरों ने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए यह सब किया है। जबकि, लोनिवि, स्वास्थ्य, सिंचाई आदि विभागों में कर्मियों के पूरे सेवाकाल को देखकर सुगम, दुर्गम की सेवाएं निकाली जा रहीं हैं। हमने इस मामले से मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री को अवगत कराया है। -मुकेश तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षक संघ
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एक्ट में सब स्पष्ट है यदि किसी विभाग को कोई दुविधा है तो उसे कार्मिक विभाग से विचार विमर्श करना चाहिए। पुनगर्ठन अधिनियम में यह कहा गया है कि राज्य गठन से पहले यहां सेवा करने वाले कर्मचारी की सेवा भी यहीं की मानी जाएगी। -सुमन सिंह वल्दिया, अपर सचिव कार्मिक
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मुख्यमंत्री के अधीन तकनीकी शिक्षा विभाग में कर्मचारियों की पूरी सेवाएं जोड़े बगैर ही सुगम, दुर्गम की सेवाएं निकालकर तबादलों की तैयारी की जा रही है। वहीं, अन्य विभाग कर्मचारियों के पूरे सेवाकाल को जोड़ रहे हैं। जबकि, पुनर्गठन अधिनियम में यह कहा गया है कि राज्य गठन से पहले जिस कर्मचारी ने यहां सेवाएं की हैं उनकी यहीं की सेवाएं मानी जाएंगी। वहीं, उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षक संघ ने अधिकारियों पर चहेतों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है।
तबादलों के लिए एक्ट के मुताबिक ऐसे कर्मचारी जो सुगम क्षेत्र में वर्तमान तैनाती स्थल पर चार साल या इससे अधिक समय से तैनात हैं। उन्हें दुर्गम क्षेत्र में उपलब्ध संभावित रिक्तियों की कुल संख्या की सीमा के प्रतिबंधों के अधीन अनिवार्य रूप से स्थानांतरित किया जाएगा। इसी तरह दुर्गम क्षेत्र में तीन साल या इससे अधिक वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों की सुगम में तैनाती की जाएगी। इसके लिए कर्मचारियों के पूरे सेवाकाल को जोड़कर यह देखा जा रहा है कि किस कर्मचारी ने कितने साल सुगम में और कितने वर्ष दुर्गम में सेवाएं दीं, लेकिन मुख्यमंत्री के अधीन तकनीकी शिक्षा विभाग ऐसा विभाग है जिसमें नवंबर 2000 के बाद की सेवाओं को जोड़कर कर्मचारियों के तबादलों की तैयारी की जा रही है। इसके लिए प्राविधिक शिक्षा विभाग की ओर से जो फॉर्म तैयार किया गया है उसमें कर्मचारियों से यह भरवाया जा रहा है कि नवंबर 2000 के बाद उसने कितनी सेवाएं कहा कीं। जबकि, कृषि विभाग, जिला विकास विभाग, मत्स्य आदि अन्य विभागों में पूरे सेवाकाल के दौरान की सुगम, दुर्गम की सेवाओं को जोड़ा जा रहा है।
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अलग-अलग नियम अपना रहे विभाग
तबादलों के लिए हर विभाग में स्थाई स्थानांतरण समिति बनी है। स्थानांतरण में पादर्शिता बनी रहे और किसी तरह की कोई गलती न हो इसके लिए इन समितियों में कार्मिक विभाग का एक प्रतिनिधि शामिल किया गया है। इसके बाद भी कर्मचारियों की दुर्गम और सुगम की सेवाओं को जोड़ने के लिए अलग-अलग नियम अपनाए जा रहे हैं।
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विभाग में कई कर्मचारियों ने वर्ष 1995, 1998 में उत्तरकाशी, लोहाघाट आदि जगहों पर सेवाएं दीं हैं। उन कर्मचारियों की दुर्गम की सेवाएं जोड़ी जानी चाहिए। एक्ट की मूल धारणा भी यही है, लेकिन कुछ अफसरों ने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए यह सब किया है। जबकि, लोनिवि, स्वास्थ्य, सिंचाई आदि विभागों में कर्मियों के पूरे सेवाकाल को देखकर सुगम, दुर्गम की सेवाएं निकाली जा रहीं हैं। हमने इस मामले से मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री को अवगत कराया है। -मुकेश तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षक संघ
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एक्ट में सब स्पष्ट है यदि किसी विभाग को कोई दुविधा है तो उसे कार्मिक विभाग से विचार विमर्श करना चाहिए। पुनगर्ठन अधिनियम में यह कहा गया है कि राज्य गठन से पहले यहां सेवा करने वाले कर्मचारी की सेवा भी यहीं की मानी जाएगी। -सुमन सिंह वल्दिया, अपर सचिव कार्मिक