{"_id":"5cf03875bdec22073073efce","slug":"15592470118-vikas-nagar-news133","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षकों को सिखाए विज्ञान को सरल बनाने के गुर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षकों को सिखाए विज्ञान को सरल बनाने के गुर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के टीचर लर्निंग सेंटर में चल रहे ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण के तहत शिक्षकों को विज्ञान शिक्षण में स्थानीय संसाधनों के उपयोग की सलाह दी गई। साथ ही विज्ञान विषय को सरल बनाने के गुर सिखाए गए।
प्रशिक्षक सैय्यद ने बताया कि छात्रों में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करने के लिए शिक्षण में स्थानीय संसाधनों का उपयोग किया जाना जरूरी है। इससे छात्र-छात्राओं को विषय रुचिकर लगने लगता है। उन्होंने शिक्षकों से विज्ञान का शिक्षण ‘आओ करके सीखें’ पद्धति के माध्यम से करने की सलाह दी। प्रशिक्षक मीनाक्षी ने शिक्षकों को बताया कि यदि बच्चों का अवलोकन मानक उत्तर से भिन्न है, तो शिक्षक उसे गलत कहने से बचें। बेहतर यह होगा कि शिक्षक बच्चों के साथ मिलकर मानक उत्तर से विचलन के कारणों का पता लगाएं। प्रशिक्षण के दौरान प्रयोग की जानकारी देते हुए बताया कि नए प्रयोगों और विश्लेषण के आधार पर उनमें बदलाव होने की संभावना हमेशा ही रहती है। बताया कि प्राथमिक स्तर पर बच्चों में विज्ञान संबंधी अवधारणाओं, सैद्धांतिक तथ्यों की समझ विकसित करने के लिए स्थानीय परिवेश में उपलब्ध सामग्री के साथ ही नए प्रयोग किए जाने चाहिए।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को स्थानीय परिवेश के आधार पर कई प्रयोग बताए गए। इस दौरान पवन पारासर, कैलाश कांडपाल, अनुराग सिंह, दीप्ति माला, नीलम गुलेरिया, नरेश सिंह, जेपी मिश्रा, सुरेश नौटियाल, अंजू जैन, प्रीति जैन, महेश चंद्र, अशोक कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के टीचर लर्निंग सेंटर में चल रहे ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण के तहत शिक्षकों को विज्ञान शिक्षण में स्थानीय संसाधनों के उपयोग की सलाह दी गई। साथ ही विज्ञान विषय को सरल बनाने के गुर सिखाए गए।
प्रशिक्षक सैय्यद ने बताया कि छात्रों में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करने के लिए शिक्षण में स्थानीय संसाधनों का उपयोग किया जाना जरूरी है। इससे छात्र-छात्राओं को विषय रुचिकर लगने लगता है। उन्होंने शिक्षकों से विज्ञान का शिक्षण ‘आओ करके सीखें’ पद्धति के माध्यम से करने की सलाह दी। प्रशिक्षक मीनाक्षी ने शिक्षकों को बताया कि यदि बच्चों का अवलोकन मानक उत्तर से भिन्न है, तो शिक्षक उसे गलत कहने से बचें। बेहतर यह होगा कि शिक्षक बच्चों के साथ मिलकर मानक उत्तर से विचलन के कारणों का पता लगाएं। प्रशिक्षण के दौरान प्रयोग की जानकारी देते हुए बताया कि नए प्रयोगों और विश्लेषण के आधार पर उनमें बदलाव होने की संभावना हमेशा ही रहती है। बताया कि प्राथमिक स्तर पर बच्चों में विज्ञान संबंधी अवधारणाओं, सैद्धांतिक तथ्यों की समझ विकसित करने के लिए स्थानीय परिवेश में उपलब्ध सामग्री के साथ ही नए प्रयोग किए जाने चाहिए।
विज्ञापन
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को स्थानीय परिवेश के आधार पर कई प्रयोग बताए गए। इस दौरान पवन पारासर, कैलाश कांडपाल, अनुराग सिंह, दीप्ति माला, नीलम गुलेरिया, नरेश सिंह, जेपी मिश्रा, सुरेश नौटियाल, अंजू जैन, प्रीति जैन, महेश चंद्र, अशोक कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन