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परीक्षा परिणाम में सरकारी विद्यालयों ने किया निराश

Fri, 31 May 2019 01:39 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 31 May 2019 01:39 AM IST
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परीक्षा परिणाम में सरकारी विद्यालयों ने किया निराश
ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
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हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम घोषित होते ही सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापरक शिक्षा मुहैया कराने के दावों की पोल खुल गई है। पिछले वर्षों की तरह भी इस बार विद्या भारती की ओर से संचालित होने वाले विद्यालयों ने बाजी मारी है।
पछवादून में हाईस्कूल की वरीयता सूची में तीन छात्रों ने स्थान हासिल किया है। तीनों ही छात्र विद्या भारती की ओर से संचालित विद्यालय के हैं। जबकि, इंटरमीडिएट की मैरिट में स्थान हासिल करने वाली छात्रा भी विद्या भारती के ही विद्यालय की है। प्रदेश गठन के बाद से ही सरकारें सरकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ईमानदारी से कार्य करने का दावा करती रहीं हैं। सरकारी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए कई योजनाओं का संचालन भी किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन, अगस्त्या फाउंडेशन सहित आधा दर्जन के करीब गैर सरकारी संगठनों से भी सरकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सहयोग लिया जा रहा है। बावजूद इसके हर साल परीक्षा परिणाम में सरकारी विद्यालय पिछड़ जाते हैं।
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आलम यह है कि जौनसार बावर और पछवादून के चार ब्लॉक में आठ आदर्श इंटर कॉलेज हैं, लेकिन इनमें से किसी भी विद्यालय के छात्र ने वरीयता सूची में स्थान हासिल नहीं किया है। जाहिर है इन विद्यालयों के भवन पर ही सिर्फ आदर्श लिखा गया है, शैक्षणिक व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है। सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को विभाग की ओर से साल भर में तीन बार प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें समावेशी माहौल में गुणवत्तापरक शिक्षा मुहैया कराने का प्रशिक्षण भी शामिल है। बावजूद इसके परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद विद्या भारती और अन्य निजी शिक्षण संस्थान बाजी मार लेते हैं।
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मैदानी जिले रहे फिसड्डी
बोर्ड परीक्षा परिणामों में मैदानी जिले फिसड्डी साबित हुए हैं। पर्वतीय जिलों के विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले दुर्गम विद्यालयों के छात्रों का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है। इसका एक कारण जानकार दुर्गम श्रेणी के दूरस्थ विद्यालयों शिक्षकों का विद्यालयों के आसपास ही निवास का होना है। इससे शिक्षक विद्यालय और छात्रों को पर्याप्त समय दे पाते हैं। यही कारण है कि हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा में 85.99 फीसदी परिणाम के साथ बागेश्वर पहले स्थान पर रहा। जबकि, देहरादून जिला 77.48 फीसदी परिणाम के साथ नवें स्थान पर रहा। इसी तरह इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम में 92.69 फीसदी परिणाम के साथ चंपावत जिला पहले और 78.91 प्रतिशत के साथ देहरादून 11वें स्थान पर रहा।

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परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद समीक्षा की जाएगी कि किन कारणों से सरकारी विद्यालयों का परीक्षा परिणाम अपेक्षित नहीं रहा। इसकी जांच कर सुधार के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -आशा रानी पैन्यूली, जिला शिक्षाधिकारी
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