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मद्महेश्वर धाम के कपाट खुले, 300 श्रद्धालु बने साक्षी
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ऊखीमठ। द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार और विधि विधान के साथ मंगलवार पूर्वाह्न 11 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस मौके पर तीन सौ से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक कर दर्शन किए। अब छह माह तक आराध्य अपने भक्तों को धाम में ही दर्शन देंगे।
मंगलवार को भगवान मद्महेश्वर की चल उत्सव डोली सुबह 10.45 बजे अपने धाम में पहुंची। यहां मंदिर की तीन परिक्रमा के बाद भगवान मद्महेश्वर ने सर्वप्रथम परिसर में मौजूद अपने ताम्र पात्रों का गहनता से निरीक्षण किया। इसके बाद मुख्य पुजारी बागेश लिंग ने चल उत्सव विग्रह डोली में विराजमान भोग मूर्तियों की पूजा अर्चना कर अभिषेक किया। वेदपाठी मृत्युंजय हीरेमठ और गणेश सेमवाल के वेद मंत्रोच्चारण के बीच भोगमूर्तियों को मंदिर के गर्भगृह में विराजमान किया गया। इस मौके पर भक्तों को शीतकाल में धाम के कपाट बंद करने के दौरान स्वयं भू लिंग को दी गई समाधि पर चढ़ाए गए पुष्प, चंदन एवं अक्षत प्रसाद के रूप में वितरित किए गए। सभी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन के बाद भक्तों ने भगवान मद्महेश्वर का जलाभिषेक करते हुए दर्शन किए। इस मौके पर पूरा क्षेत्र बाबा के जयकारों से गूंज उठा। इससे पूर्व अंतिम रात्रि प्रवास गौंडार गांव से प्रात: पांच बजे भक्तों एवं पंचगौंडारियों के साथ बाबा की डोली ने धाम के लिए प्रस्थान किया। बणतोली, खटरा, नानू, मैखुमा, कुनचट्टी होते हुए डोली 12 किमी की पैदल यात्रा तय करने के बाद सुबह 10.30 बजे देवदर्शनी पहुंची। इस दौरान मंदिर परिसर में पहले से मौजूद थौर भंडारियों द्वारा शंख ध्वनि से भगवान मद्महेश्वर को धाम आने का न्योता दिया गया, जिसके बाद बाबा भक्तों के जयकारों के साथ अपने मंदिर में पहुंचे। इस मौके पर डोली प्रभारी वचन सिंह रावत, समिति के पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत, रंगकर्मी बबलू जंगली, राजीव भट्ट, विश्वेश्वर शैव, रवि भट्ट सहित ऊखीमठ ब्लॉक के कई गांवों के ग्रामीण मौजूद थे।
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मंगलवार को भगवान मद्महेश्वर की चल उत्सव डोली सुबह 10.45 बजे अपने धाम में पहुंची। यहां मंदिर की तीन परिक्रमा के बाद भगवान मद्महेश्वर ने सर्वप्रथम परिसर में मौजूद अपने ताम्र पात्रों का गहनता से निरीक्षण किया। इसके बाद मुख्य पुजारी बागेश लिंग ने चल उत्सव विग्रह डोली में विराजमान भोग मूर्तियों की पूजा अर्चना कर अभिषेक किया। वेदपाठी मृत्युंजय हीरेमठ और गणेश सेमवाल के वेद मंत्रोच्चारण के बीच भोगमूर्तियों को मंदिर के गर्भगृह में विराजमान किया गया। इस मौके पर भक्तों को शीतकाल में धाम के कपाट बंद करने के दौरान स्वयं भू लिंग को दी गई समाधि पर चढ़ाए गए पुष्प, चंदन एवं अक्षत प्रसाद के रूप में वितरित किए गए। सभी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन के बाद भक्तों ने भगवान मद्महेश्वर का जलाभिषेक करते हुए दर्शन किए। इस मौके पर पूरा क्षेत्र बाबा के जयकारों से गूंज उठा। इससे पूर्व अंतिम रात्रि प्रवास गौंडार गांव से प्रात: पांच बजे भक्तों एवं पंचगौंडारियों के साथ बाबा की डोली ने धाम के लिए प्रस्थान किया। बणतोली, खटरा, नानू, मैखुमा, कुनचट्टी होते हुए डोली 12 किमी की पैदल यात्रा तय करने के बाद सुबह 10.30 बजे देवदर्शनी पहुंची। इस दौरान मंदिर परिसर में पहले से मौजूद थौर भंडारियों द्वारा शंख ध्वनि से भगवान मद्महेश्वर को धाम आने का न्योता दिया गया, जिसके बाद बाबा भक्तों के जयकारों के साथ अपने मंदिर में पहुंचे। इस मौके पर डोली प्रभारी वचन सिंह रावत, समिति के पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत, रंगकर्मी बबलू जंगली, राजीव भट्ट, विश्वेश्वर शैव, रवि भट्ट सहित ऊखीमठ ब्लॉक के कई गांवों के ग्रामीण मौजूद थे।
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