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आयुर्वेद विवि के आगे शासन बेबस

Sat, 11 May 2019 02:03 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 11 May 2019 02:03 AM IST
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आयुर्वेद विवि के आगे शासन बेबस
ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
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आयुर्वेदिक कॉलेजों में फीस बढ़ाने का शासनादेश निरस्त होने और जमा फीस छात्रों को 15 दिन के भीतर लौटाने के हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद मेडिकल छात्रों की फीस नहीं लौटाई गई। इस मामले में आयुर्वेद विश्वविद्यालय के आगे शासन ‘बेबस’ बना हुआ है।
जीवनगढ़ विकासनगर निवासी प्रवीण शर्मा की ओर से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना में यह खुलासा हुआ है। उत्तराखंड के 16 आयुर्वेदिक कॉलेजों में दो हजार से अधिक छात्र पढ़ते हैं। इनमें उत्तराखंड आयुर्वेद विवि से निजी क्षेत्र में स्थापित 13 आयुर्वेदिक कॉलेज संबद्ध हैं। शासन ने 14 अक्तूबर 2015 के एक आदेश में निजी आयुर्वेदिक कॉलेजों में बीएएमएस, बीएचएमएस पाठ्यक्रमों की फीस को बढ़ा दिया था। बीएएमएस की फीस 80,500 रुपये से बढ़ाकर 2,15000 रुपये और बीएचएमएस की फीस को 73,600 से बढ़ाकर एक लाख कर दिया था।
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हिमालयन मेडिकल कॉलेज के छात्र ललित मोहन तिवारी और अन्य इसके खिलाफ हाईकोर्ट चले गए थे। इस पर नौ जुलाई 2018 को हाईकोर्ट ने शासनादेश निरस्त करने के आदेश देते हुए छात्रों से लिया गया अतिरिक्त शुल्क 15 दिन के भीतर लौटाने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट की सिंगल बैंच के इस आदेश के खिलाफ एसोसिएशन ऑफ कंबाइंड एंट्रेंस एग्जामिनेशन की ओर से हाईकोर्ट में विशेष याचिका दाखिल की थी। इस अपील पर न्यायालय ने सिंगल बैंच के निर्णय को सही ठहराते हुए छात्र-छात्राओं से लिया गया अतिरिक्त शुल्क दो सप्ताह के भीतर वापस करने का आदेश दिया था, लेकिन इस आदेश का पालन करा पाने में शासन, आयुर्वेद विश्वविद्यालय के आगे बेबस बना हुआ है।
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शासन ने विवि को लिखे चार पत्र
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना के मुताबिक हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के लिए शासन की ओर से आयुर्वेद विवि को दो और 22 नवंबर 2018, 22 मार्च 2019 और 23 अप्रैल 2019 को पत्र लिखा जा चुका है। इसमें आयुर्वेद विवि के कुलपति को सचिव आरके सुधांशु की ओर से यहां तक कहा है कि विवि न तो न्यायालय के आदेश का अनुपालन कर रहा है न उसके द्वारा शासन की ओर से दिए गए निर्देशों को गंभीरता से ले रहा है। ऐसे में यदि इस प्रकरण में न्यायालय में अवमानना की स्थिति पैदा हुई तो इसका उत्तरदायित्व विवि ही होगा। इस मामले में कुलपति अभिमन्यु कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन, संपर्क नहीं हो पाया। उनका पक्ष आने पर प्रकाशित किया जाएगा।
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छात्रों को धमका रहे विवि
सूत्रों के मुुताबिक पछवादून क्षेत्र में स्थित कुछ आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज छात्रों को फीस वापस मांगने पर धमका रहे हैं। छात्रों को कहा जा रहा है कि यदि फीस वापसी की बात की गई तो उन्हें परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा। उन्हें तुरंत कॉलेज से बाहर कर दिया जाएगा।

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फीस कम करने और अतिरिक्त ली गई फीस की वापसी के लिए हम सभी कॉलेजों को लिख चुके हैं। यह मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। कॉलेजों की ओर से पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट से जो फैसला आएगा उसका अनुपालन कराया जाएगा। -रामजी शरण शर्मा, रजिस्ट्रार उत्तराखंड आयुर्वेदिक विवि
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