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बदहाल पड़ा डाकपत्थर का डियर पार्क
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
डाकपत्थर बैराज के सामने पर्यटकों के लिए बने डियर पार्क में लंबे समय से ताला लटका हुआ है। पार्क के हिरनों को वन विभाग पहले ही मालसी डियर पार्क में शिफ्ट कर चुका है। इसके चलते पर्यटकों को डियर पार्क में हिरन देखने के लिए नहीं मिल रहे हैं। ग्राम प्रधान सुबोध गोयल ने पार्क को विकसित करने की मांग शासन से की है।
डाकपत्थर परियोजना क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 1982 में 30 लाख की लागत से डियर पार्क स्थापित किया गया था। बैैराज झील और बैराज पार्क के सामने बने डियर पार्क में हिरनों की देखरेख का जिम्मा सिंचाई विभाग के पास था। साथ ही पर्यटकों को लुभाने के यहां खरगोश भी रखे गए। हिरनों की देखभाल के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं होने के कारण 10 वर्ष पहले हिरनों को मालसी डियर पार्क में शिफ्ट कर दिया गया। कुछ समय बाद सिंचाई विभाग ने यहां से खरगोश भी बैराज पार्क में शिफ्ट कर दिए और पार्क के गेट पर ताला लगा दिया। देखरेख नहीं होने से पार्क बदहाल स्थित में है। पार्क के अंदर उगी झाड़ियों को भी नहीं काटा गया है। साथ ही यहां उगे विभिन्न प्रजाति के पेड़ों की भी देखभाल नहीं हो रही है। डाकपत्थर आने वाले पर्यटक पार्क का लुत्फ नहीं ले पा रहे हैं।
ग्राम प्रधान सुबोध गोयल ने यहां आने वाले पर्यटकों की सुविधा और स्थानीय व्यपारियों के हितों को देखते हुए पार्क को दोबारा शुरू करने की मांग की है। उधर, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एके वर्मा ने बताया कि बजट के अभाव में पार्क का सौंदर्यीकरण करने में विभाग असमर्थ है।
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डाकपत्थर बैराज के सामने पर्यटकों के लिए बने डियर पार्क में लंबे समय से ताला लटका हुआ है। पार्क के हिरनों को वन विभाग पहले ही मालसी डियर पार्क में शिफ्ट कर चुका है। इसके चलते पर्यटकों को डियर पार्क में हिरन देखने के लिए नहीं मिल रहे हैं। ग्राम प्रधान सुबोध गोयल ने पार्क को विकसित करने की मांग शासन से की है।
डाकपत्थर परियोजना क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 1982 में 30 लाख की लागत से डियर पार्क स्थापित किया गया था। बैैराज झील और बैराज पार्क के सामने बने डियर पार्क में हिरनों की देखरेख का जिम्मा सिंचाई विभाग के पास था। साथ ही पर्यटकों को लुभाने के यहां खरगोश भी रखे गए। हिरनों की देखभाल के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं होने के कारण 10 वर्ष पहले हिरनों को मालसी डियर पार्क में शिफ्ट कर दिया गया। कुछ समय बाद सिंचाई विभाग ने यहां से खरगोश भी बैराज पार्क में शिफ्ट कर दिए और पार्क के गेट पर ताला लगा दिया। देखरेख नहीं होने से पार्क बदहाल स्थित में है। पार्क के अंदर उगी झाड़ियों को भी नहीं काटा गया है। साथ ही यहां उगे विभिन्न प्रजाति के पेड़ों की भी देखभाल नहीं हो रही है। डाकपत्थर आने वाले पर्यटक पार्क का लुत्फ नहीं ले पा रहे हैं।
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ग्राम प्रधान सुबोध गोयल ने यहां आने वाले पर्यटकों की सुविधा और स्थानीय व्यपारियों के हितों को देखते हुए पार्क को दोबारा शुरू करने की मांग की है। उधर, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एके वर्मा ने बताया कि बजट के अभाव में पार्क का सौंदर्यीकरण करने में विभाग असमर्थ है।
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