{"_id":"5cb0ef7ebdec2214450233f2","slug":"155509959220-vikas-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ठोड़ा नृत्य के साथ बिस्सू पर्व का आगाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ठोड़ा नृत्य के साथ बिस्सू पर्व का आगाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
जौनसार-बावर परगने में मनाए जाने वाले पांच दिवसीय बिस्सू पर्व का आगाज शुक्रवार को पारंपरिक अंदाज में बावर के रायगी स्थित शेडकुड़िया मंदिर में हुआ। पर्व की शुरुआत पर बावर के लोगों के साथ ही हिमाचल प्रदेश के श्रद्धालुुओं ने पारंपरिक ठोड़ा नृत्य किया।
बता दें, बिस्सू पर्व जौनसार-बावर परगने का प्रमुख पर्व है। पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत बैसाखी से एक दिन पूर्व रायगी के शेडकुड़िया मंदिर से होती है। इसके बाद बैसाखी के दिन पूरे जौनसार-बावर परगने में बिस्सू मनाया जाता है। इस पर्व को लेकर जौनसार-बावर परगने के साथ ही हिमाचल प्रदेश के बाशिंदों में भी आस्था है। पहले दिन धनुष बाण हाथ में लेकर स्थानीय लोग पारंपरिक ठोड़ा नृत्य करते हैं। इसके बाद 14 अप्रैल को फूलियात पर्व, 15 को गांव स्तर पर बिस्सू मनाया जाता है। अंतिम दो दिन सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर बिस्सू मनाने की परंपरा है। बिस्सू पर्व के दौरान फुलियात मनाने की अलग ही पहचान है। इसमें लोग बुरांस के फूल को जंगलों से तोड़कर घरों और मंदिरों की सजावट करते हैं। मंदिरों में बुरांस के फूलों से विशेष पूजा अर्चना की जाती है। पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व के तहत स्थानीय लोग आंगन में एकत्र होकर ईष्टदेव की पूजा अर्चना के बाद लोक नृत्य और लोकगीत गाते हैं। रायगी स्थित शेडकुड़िया मंदिर में बिस्सू पर्व की शुरुआत के अवसर पर रायगी मंदिर के अध्यक्ष सूरतराम जोशी, सचिव दीवान चंद शर्मा, मंदिर के बजीर हरीश चंद्र शर्मा, पुजारी केदार सिंह, आयोजक समिति के संयोजक मोहन लाल शर्मा, डॉ. जोगिंदर चौहान, करम चंद शर्मा, संतराम जिनाटा, सुरेश जिनाटा, रोशनलाल शर्मा, मोतीलाल जिनाटा, हरिदत्त जोशी, देवानंद आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
जौनसार-बावर परगने में मनाए जाने वाले पांच दिवसीय बिस्सू पर्व का आगाज शुक्रवार को पारंपरिक अंदाज में बावर के रायगी स्थित शेडकुड़िया मंदिर में हुआ। पर्व की शुरुआत पर बावर के लोगों के साथ ही हिमाचल प्रदेश के श्रद्धालुुओं ने पारंपरिक ठोड़ा नृत्य किया।
बता दें, बिस्सू पर्व जौनसार-बावर परगने का प्रमुख पर्व है। पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत बैसाखी से एक दिन पूर्व रायगी के शेडकुड़िया मंदिर से होती है। इसके बाद बैसाखी के दिन पूरे जौनसार-बावर परगने में बिस्सू मनाया जाता है। इस पर्व को लेकर जौनसार-बावर परगने के साथ ही हिमाचल प्रदेश के बाशिंदों में भी आस्था है। पहले दिन धनुष बाण हाथ में लेकर स्थानीय लोग पारंपरिक ठोड़ा नृत्य करते हैं। इसके बाद 14 अप्रैल को फूलियात पर्व, 15 को गांव स्तर पर बिस्सू मनाया जाता है। अंतिम दो दिन सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर बिस्सू मनाने की परंपरा है। बिस्सू पर्व के दौरान फुलियात मनाने की अलग ही पहचान है। इसमें लोग बुरांस के फूल को जंगलों से तोड़कर घरों और मंदिरों की सजावट करते हैं। मंदिरों में बुरांस के फूलों से विशेष पूजा अर्चना की जाती है। पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व के तहत स्थानीय लोग आंगन में एकत्र होकर ईष्टदेव की पूजा अर्चना के बाद लोक नृत्य और लोकगीत गाते हैं। रायगी स्थित शेडकुड़िया मंदिर में बिस्सू पर्व की शुरुआत के अवसर पर रायगी मंदिर के अध्यक्ष सूरतराम जोशी, सचिव दीवान चंद शर्मा, मंदिर के बजीर हरीश चंद्र शर्मा, पुजारी केदार सिंह, आयोजक समिति के संयोजक मोहन लाल शर्मा, डॉ. जोगिंदर चौहान, करम चंद शर्मा, संतराम जिनाटा, सुरेश जिनाटा, रोशनलाल शर्मा, मोतीलाल जिनाटा, हरिदत्त जोशी, देवानंद आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन