{"_id":"5ca9096cbdec22142901a3f3","slug":"15545819451-vikas-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोगों को बताया वेदों का महत्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोगों को बताया वेदों का महत्व
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
आर्य समाज मंदिर डोभरी में चल रहे दो दिवसीय वार्षिकोत्सव का शनिवार को हवन के साथ समापन हुआ। वार्षिकोत्सव में लोगों को वेदों के महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही वेदों का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया गया।
मुख्य आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री ने कहा कि शास्त्रों को दो भागों में बांटा गया है, श्रुति और स्मृति। श्रुति के अंतर्गत धर्मग्रंथ वेद आते हैं और स्मृति के अंतर्गत इतिहास और वेदों की व्याख्या की पुस्तकें पुराण, महाभारत, रामायण, स्मृतियां आदि आते हैं। वेदों का सार उपनिषद है और उपनिषदों का सार गीता। उन्होंने कहा कि वेदों में ब्रह्म (ईश्वर), देवता, ब्रह्मांड, ज्योतिष, गणित, रसायन, औषधि, प्रकृति, खगोल, भूगोल, धार्मिक नियम, इतिहास, संस्कार, रीति-रिवाज आदि लगभग सभी विषयों से संबंधित ज्ञान सम्मिलित है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समाज की हर समस्या का समाधान वेद मंत्रों में है। हम बिगड़ते पर्यावरण, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और पारिवारिक मतभेद जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसका कारण वेदों के ज्ञान का अभाव है। सकारात्मक समाज की स्थापना के लिए यह ज्ञान लोगों तक पहुंचाने का प्रयास बड़े स्तर पर किया जाना चाहिए।
इस दौरान कैलाश कर्मठ, मुकुंदी लाल सुयाल, नरेंद्र तोमर, जितेंद्र नेगी, कल्पना बिष्ट, रंजोर सिंह नेगी, बाबूराम, अजीत चंदेल, भोलादत्त भट्ट, महेंद्र नेगी, अमरनाथ वर्मा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
आर्य समाज मंदिर डोभरी में चल रहे दो दिवसीय वार्षिकोत्सव का शनिवार को हवन के साथ समापन हुआ। वार्षिकोत्सव में लोगों को वेदों के महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही वेदों का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया गया।
मुख्य आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री ने कहा कि शास्त्रों को दो भागों में बांटा गया है, श्रुति और स्मृति। श्रुति के अंतर्गत धर्मग्रंथ वेद आते हैं और स्मृति के अंतर्गत इतिहास और वेदों की व्याख्या की पुस्तकें पुराण, महाभारत, रामायण, स्मृतियां आदि आते हैं। वेदों का सार उपनिषद है और उपनिषदों का सार गीता। उन्होंने कहा कि वेदों में ब्रह्म (ईश्वर), देवता, ब्रह्मांड, ज्योतिष, गणित, रसायन, औषधि, प्रकृति, खगोल, भूगोल, धार्मिक नियम, इतिहास, संस्कार, रीति-रिवाज आदि लगभग सभी विषयों से संबंधित ज्ञान सम्मिलित है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समाज की हर समस्या का समाधान वेद मंत्रों में है। हम बिगड़ते पर्यावरण, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और पारिवारिक मतभेद जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसका कारण वेदों के ज्ञान का अभाव है। सकारात्मक समाज की स्थापना के लिए यह ज्ञान लोगों तक पहुंचाने का प्रयास बड़े स्तर पर किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
इस दौरान कैलाश कर्मठ, मुकुंदी लाल सुयाल, नरेंद्र तोमर, जितेंद्र नेगी, कल्पना बिष्ट, रंजोर सिंह नेगी, बाबूराम, अजीत चंदेल, भोलादत्त भट्ट, महेंद्र नेगी, अमरनाथ वर्मा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन