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सामाजिकता के भाव से सशक्त होंगे दिव्यांग
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
समग्र शिक्षा अभियान के तहत बृहस्पतिवार को राजकीय प्राथमिक विद्यालय हरबर्टपुर में दिव्यांग नौनिहालों और अभिभावक के लिए परामर्श व सहायक उपकरण वितरण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 93 नौनिहालों और अभिभावकों ने भाग लिया। वहीं, 10 नौनिहालों को सहायक उपकरण दिए गए।
शिविर की शुरुआत उप शिक्षाधिकारी हिमांशु कुमार श्रीवास्तव ने की। उन्होंने कहा कि सामाजिकता के भाव से ही दिव्यांग सशक्त होंगे। दिव्यांग जनों को सकारात्मक सहयोग और उचित शिक्षा देकर समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जा सकता है। लिहाजा, दिव्यांग नौनिहालों को शिक्षा के लिए प्रेरित करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को ट्राई साइकिल या व्हीलचेयर इसलिए नहीं दी जाती कि उन्हें कोई सहारा दिया जा रहा है, बल्कि इसलिए दी जाती है ताकि वे स्वावलंबी बन सकें। समाज को अपनी संकीर्ण मानसिकता को छोड़कर दिव्यांग बच्चों को सबल बनाना होगा, तभी हम विकसित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए समाज, सरकार, कॉरपोरेट सभी को एकजुट होकर पहल करनी होगी। हमारा दायित्व है कि हम दिव्यांग जनों के आत्मविश्वास एवं मनोबल को बढ़ाएं और उनकी कार्य क्षमताओं को देखते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास करें। इस दौरान बीआरपी प्रकाश चौहान, अंजली भट्ट, डॉ. मेघा रावत, निशा अग्रवाल, रीता सैनी, विजय कुमार, वर्षा कौशिक, सुशीला गुरुंग, सत्येंद्र रावत, नरेश चौधरी, कन्हैया रावत आदि मौजूद रहे।
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समग्र शिक्षा अभियान के तहत बृहस्पतिवार को राजकीय प्राथमिक विद्यालय हरबर्टपुर में दिव्यांग नौनिहालों और अभिभावक के लिए परामर्श व सहायक उपकरण वितरण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 93 नौनिहालों और अभिभावकों ने भाग लिया। वहीं, 10 नौनिहालों को सहायक उपकरण दिए गए।
शिविर की शुरुआत उप शिक्षाधिकारी हिमांशु कुमार श्रीवास्तव ने की। उन्होंने कहा कि सामाजिकता के भाव से ही दिव्यांग सशक्त होंगे। दिव्यांग जनों को सकारात्मक सहयोग और उचित शिक्षा देकर समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जा सकता है। लिहाजा, दिव्यांग नौनिहालों को शिक्षा के लिए प्रेरित करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को ट्राई साइकिल या व्हीलचेयर इसलिए नहीं दी जाती कि उन्हें कोई सहारा दिया जा रहा है, बल्कि इसलिए दी जाती है ताकि वे स्वावलंबी बन सकें। समाज को अपनी संकीर्ण मानसिकता को छोड़कर दिव्यांग बच्चों को सबल बनाना होगा, तभी हम विकसित हो सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए समाज, सरकार, कॉरपोरेट सभी को एकजुट होकर पहल करनी होगी। हमारा दायित्व है कि हम दिव्यांग जनों के आत्मविश्वास एवं मनोबल को बढ़ाएं और उनकी कार्य क्षमताओं को देखते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास करें। इस दौरान बीआरपी प्रकाश चौहान, अंजली भट्ट, डॉ. मेघा रावत, निशा अग्रवाल, रीता सैनी, विजय कुमार, वर्षा कौशिक, सुशीला गुरुंग, सत्येंद्र रावत, नरेश चौधरी, कन्हैया रावत आदि मौजूद रहे।
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