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देवांशी ने नागटिब्बा टॉप तक की ट्रेकिंग
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
मसूरी। सिडनी जूनियर विश्वकप और खेलो इंडिया खेलो निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाली देवांशी राणा ने साथियों के साथ शनिवार को पत्थरखोला से नागटिब्बा टॉप तक ट्रेकिंग की। 6 किमी की ट्रेकिंग में उन्होंने एक गांव के पास ग्रामीण महिलाओं के साथ घास भी उठाई।
निशानेबाजी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और राज्य का नाम रोशन करने वाली पद्मश्री जशपाल राणा की सुपुत्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित पूर्व खेल मंत्री नारायण सिंह राणा की पौत्री देवांशी राणा ने अपनी दो जूनियर विश्वकप खिलाड़ी अरुणिमा गौड़, अंशिका सतेंद्र और ऐंदी व बसाण गांव के 15 युवा लड़के-लड़कियों की टीम के साथ करीब एक हजार फीट ऊंची चोटी नागटिब्बा टॉप जमी करीब 3 फीट बर्फ का लुत्फ उठाया। नागटिब्बा टॉप पर सुंदर वादियों के बीच देवांसी ने ग्रुप के साथ जमकर सेल्फी ली।
देवांशी ने स्थानीय युवाओं को पहाड़ से हो रहे पलायन को रोकने और क्षेत्र में ही रोजगार तलाशने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र में ट्रैकिंग और साहसिक खेलों के लिए अपार संभावनाएं हैं। देवांशी इन दिनों अपने पैतृक गांव चिलामू में ग्रामीण परिवेश में पूरी तरह से रमी हुई हैं।
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मसूरी। सिडनी जूनियर विश्वकप और खेलो इंडिया खेलो निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाली देवांशी राणा ने साथियों के साथ शनिवार को पत्थरखोला से नागटिब्बा टॉप तक ट्रेकिंग की। 6 किमी की ट्रेकिंग में उन्होंने एक गांव के पास ग्रामीण महिलाओं के साथ घास भी उठाई।
निशानेबाजी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और राज्य का नाम रोशन करने वाली पद्मश्री जशपाल राणा की सुपुत्री और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित पूर्व खेल मंत्री नारायण सिंह राणा की पौत्री देवांशी राणा ने अपनी दो जूनियर विश्वकप खिलाड़ी अरुणिमा गौड़, अंशिका सतेंद्र और ऐंदी व बसाण गांव के 15 युवा लड़के-लड़कियों की टीम के साथ करीब एक हजार फीट ऊंची चोटी नागटिब्बा टॉप जमी करीब 3 फीट बर्फ का लुत्फ उठाया। नागटिब्बा टॉप पर सुंदर वादियों के बीच देवांसी ने ग्रुप के साथ जमकर सेल्फी ली।
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देवांशी ने स्थानीय युवाओं को पहाड़ से हो रहे पलायन को रोकने और क्षेत्र में ही रोजगार तलाशने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र में ट्रैकिंग और साहसिक खेलों के लिए अपार संभावनाएं हैं। देवांशी इन दिनों अपने पैतृक गांव चिलामू में ग्रामीण परिवेश में पूरी तरह से रमी हुई हैं।
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