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वातावरण की शुद्धि के लिए हवन जरूरी
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ब्यूूरो/अमर उजाला, विकासनगर
आर्य समाज मंदिर में महर्षि दयानंद सरस्वती की 194वीं जयंती पर आयोजित तीन दिवसीय बोधोत्सव का समापन शुक्रवार को हवन-पूजन के साथ हुआ। आचार्य संजय शास्त्री ने हवन की महत्ता बताते कहा कि हवन से वातावरण ही नहीं तन और मन भी शुद्ध हो जाता है।
उन्होंने कहा कि हवन वाले स्थान पर प्राणवायु की मात्रा भी बढ़ जाती है। हमारा देश ऋषि, मुनियों का देश रहा है। वैदिक सभ्यता का आधार ही हवन है। वैदिक सभ्यता ही विश्व को सुख व शांति दे सकती है। विदेशी भी रिसर्च में मानते हैं कि यज्ञ के बाद वातावरण शुद्ध होता है। कहा कि हवन यज्ञ करवाने व उसमें शिरकत करने से तन के कष्टों से तो छुटकारा मिलता ही है। साथ ही प्राकृतिक आपदाओं से भी रक्षा होती है। कहा कि वर्तमान समय में हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। हमें अपनी पुरातन संस्कृति को बनाए रखते हुए इसका अनुसरण करना चाहिए। भजनोपदेशक सौमित्र आर्य ने कृपा निधि करो कृपा, बरसाओ सुख शांति सुधा रस... भजन का गायन किया। इस दौरान रमन डंग, सोनिया अहलूवालिया, रिपुंजय, सागर, बृजमोहन, रामापाल रोहिला आदि मौजूद रहे।
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आर्य समाज मंदिर में महर्षि दयानंद सरस्वती की 194वीं जयंती पर आयोजित तीन दिवसीय बोधोत्सव का समापन शुक्रवार को हवन-पूजन के साथ हुआ। आचार्य संजय शास्त्री ने हवन की महत्ता बताते कहा कि हवन से वातावरण ही नहीं तन और मन भी शुद्ध हो जाता है।
उन्होंने कहा कि हवन वाले स्थान पर प्राणवायु की मात्रा भी बढ़ जाती है। हमारा देश ऋषि, मुनियों का देश रहा है। वैदिक सभ्यता का आधार ही हवन है। वैदिक सभ्यता ही विश्व को सुख व शांति दे सकती है। विदेशी भी रिसर्च में मानते हैं कि यज्ञ के बाद वातावरण शुद्ध होता है। कहा कि हवन यज्ञ करवाने व उसमें शिरकत करने से तन के कष्टों से तो छुटकारा मिलता ही है। साथ ही प्राकृतिक आपदाओं से भी रक्षा होती है। कहा कि वर्तमान समय में हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। हमें अपनी पुरातन संस्कृति को बनाए रखते हुए इसका अनुसरण करना चाहिए। भजनोपदेशक सौमित्र आर्य ने कृपा निधि करो कृपा, बरसाओ सुख शांति सुधा रस... भजन का गायन किया। इस दौरान रमन डंग, सोनिया अहलूवालिया, रिपुंजय, सागर, बृजमोहन, रामापाल रोहिला आदि मौजूद रहे।
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