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निजी अस्पताल बंद, सरकारी में सुविधाएं नहीं

Fri, 22 Feb 2019 01:59 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 22 Feb 2019 01:59 AM IST
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निजी अस्पताल बंद, सरकारी में सुविधाएं नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
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पछवादून में निजी अस्पतालों में तालाबंदी के कारण मरीज स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकारी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन, इन अस्पतालों में पर्याप्त जीवन रक्षक उपकरण, डॉक्टर, नर्स एवं अन्य स्टाफ नहीं होने से मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने से मरीज बेहाल हैं।
क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन की मांग को लेकर पछवादून के निजी अस्पताल एवं क्लीनिक बृहस्पतिवार को सातवें दिन भी बंद रहे। इससे सरकारी अस्पतालों की ओपीडी इन दिनों सामान्य दिनों की अपेक्षा दोगुने से भी अधिक हो गई हैं। वहीं, इन अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने से भी इलाज में दिक्कतें आ रही हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विकासनगर में बृहस्पतिवार को मरीजों का तांता लगा रहा। ऐसे में कुछ मरीज ओपीडी में डॉक्टर के नहीं होने, तो कुछ बाहर की दवा लिखे जाने से परेशान नजर आए। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके शर्मा ने बताया कि सामान्य दिनों में अस्पताल की ओपीडी 250 से 300 के करीब रहती है, लेकिन इन दिनों ओपीडी 650 से 700 पहुंच गई है। अस्पताल में मरीजों को पर्याप्त दवा नहीं मिल पाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिन मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड हैं, अस्पताल में दवा नहीं होने पर उन मरीजों के लिए बाहर से दवा मंगाई जाती है। इसके लिए मरीजों को कोई भुगतान नहीं करना पड़ता। वहीं, ओपीडी में डॉक्टर के नहीं बैठे होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि 25 फरवरी को सीडीओ की अध्यक्षता में चिकित्सा प्रबंध समिति की बैठक है, इस बैठक की तैयारी के कारण कुछ समय के लिए डॉक्टर ओपीडी से ऑफिस में आए थे। उधर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र साहिया का इससे भी बुरा हाल है। स्वास्थ्य केंद्र में एक प्रभारी चिकित्साधिकारी सहित 11 चिकित्सकों के पद सृजित हैं, लेकिन सीएचसी में फिजिशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट और ईएमओ के पद रिक्त हैं। रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से केंद्र में रखी अल्ट्रासाउंड मशीन पिछले पांच साल से ठप पड़ी हुई है। मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए विकासनगर की दौड़ लगानी पड़ रही है। उदपाल्टा के प्रधान सतपाल राय एवं पडाइसा के भीम दत्त वर्मा ने कहा कि साहिया क्षेत्र के 180 गांवों का केंद्र बिंदु है, लेकिन यहां भी मरीजों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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यहां भी लड़खड़ाई हुई है स्वास्थ्य सेवाएं
कालसी में 32 उप स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह लड़खड़ाई हुई हैं। यहां 32 केंद्रों में से मात्र दस केंद्रों पर ही एएनएम की तैनाती है। जबकि, 18 उपकेंद्रों में फार्मासिस्ट तैनात नहीं हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को इलाज के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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अल्ट्रासाउंड ठप, बाल रोग विशेषज्ञ भी नहीं
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहसपुर में एक जनवरी से अल्ट्रासाउंड मशीन ठप है, जबकि अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, निश्चेतक, सर्जन और रेडियॉलोजिस्ट भी नहीं हैं। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.भगत सिंह रावत बताते हैं कि अल्ट्रासाउंड का प्रिंटर खराब है। इसे ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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