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शिक्षण में गीत, कविताओं का करें उपयोग
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
ब्लॉक संसाधन केंद्र विकासनगर में चल रहे प्राथमिक शिक्षकों के सेवारत प्रशिक्षण में मंगलवार को गीत, कविता और अन्य गतिविधियों के माध्यम से शिक्षण देने के गुर बताए गए। प्रशिक्षकों ने प्राथमिक शिक्षकों को विषयवस्तु को नौनिहालों के अनुरूप बनाने के लिए शारीरिक गतिविधियों को शिक्षण में शामिल करने की सलाह दी।
मास्टर ट्रेनर डॉ. रत्ना मिश्रा ने कहा कि बच्चों के मन पर भाव भंगिमाओं का असर अधिक पड़ता है। साथ ही गीत, कविताओं के साथ शिक्षण करने से बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि पैदा होती है। कहा कि विद्यालय में खेल व अन्य शारीरिक गतिविधियों पर कराए गए शिक्षण का अभ्यास बच्चे घर में भी दोहराते हैं। साथ ही खेल के माध्यम से बताया गया विषय बच्चों को आसानी से समझ में आता है। मास्टर ट्रेनर अमन उपाध्याय ने बाल मनोविज्ञान की समझ रखते हुए शिक्षण पर जोर दिया। बताया कि प्रत्येक बच्चे का मानसिक स्तर अलग होता है, लेकिन बचपन की आदतें अधिकांश बच्चों में एक जैसी होती हैं। लिहाजा बच्चों के अनुरूप ही विद्यालय का माहौल तैयार किया जाना चाहिए। इस दौरान देवेंद्र दत्त, सतीश चंद्र, सत्यपाल, पवन कुमार, निर्मला देवी, सुमन अग्रवाल, रश्मि बंगवाल, पुष्पा राणा, प्रमिला चौहान, सुरेख वर्मा, उमा नैनवाल, अंजू जोशी, रजनी नैथानी, अंजू जोहरी आदि मौजूद रहे।
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ब्लॉक संसाधन केंद्र विकासनगर में चल रहे प्राथमिक शिक्षकों के सेवारत प्रशिक्षण में मंगलवार को गीत, कविता और अन्य गतिविधियों के माध्यम से शिक्षण देने के गुर बताए गए। प्रशिक्षकों ने प्राथमिक शिक्षकों को विषयवस्तु को नौनिहालों के अनुरूप बनाने के लिए शारीरिक गतिविधियों को शिक्षण में शामिल करने की सलाह दी।
मास्टर ट्रेनर डॉ. रत्ना मिश्रा ने कहा कि बच्चों के मन पर भाव भंगिमाओं का असर अधिक पड़ता है। साथ ही गीत, कविताओं के साथ शिक्षण करने से बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि पैदा होती है। कहा कि विद्यालय में खेल व अन्य शारीरिक गतिविधियों पर कराए गए शिक्षण का अभ्यास बच्चे घर में भी दोहराते हैं। साथ ही खेल के माध्यम से बताया गया विषय बच्चों को आसानी से समझ में आता है। मास्टर ट्रेनर अमन उपाध्याय ने बाल मनोविज्ञान की समझ रखते हुए शिक्षण पर जोर दिया। बताया कि प्रत्येक बच्चे का मानसिक स्तर अलग होता है, लेकिन बचपन की आदतें अधिकांश बच्चों में एक जैसी होती हैं। लिहाजा बच्चों के अनुरूप ही विद्यालय का माहौल तैयार किया जाना चाहिए। इस दौरान देवेंद्र दत्त, सतीश चंद्र, सत्यपाल, पवन कुमार, निर्मला देवी, सुमन अग्रवाल, रश्मि बंगवाल, पुष्पा राणा, प्रमिला चौहान, सुरेख वर्मा, उमा नैनवाल, अंजू जोशी, रजनी नैथानी, अंजू जोहरी आदि मौजूद रहे।
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