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बाहरी एजेंसी से कराई जाए तेल घोटाले की जांच
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
नगर पालिका में हुए तेल घोटाले के मामले में सभासदों ने प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने संबंधी ज्ञापन डीएम को सौंपा। ज्ञापन में सभासदों ने कहा कि जांच के लिए नगर पालिका प्रशासन की ओर से गठित दो सदस्यीय समिति मामले की लीपापोती कर सकती है। ऐसे में तेल घोटाला प्रकरण की जांच किसी बाहरी एजेंसी से कराई जाए।
सभासद अंकित जोशी और विशन सिंह राणा ने कहा कि पालिका प्रशासन ने तेल घोटाला प्रकरण की जांच के लिए अपने ही दो कर्मचारियों की समिति गठित की है। जिससे जांच की पारदर्शिता संदेह के घेरे में है। बताया कि सभासद पूरे प्रकरण के लिए पालिका के एक वरिष्ठ अधिकारी को दोषी मानते हैं। जबकि, दो सदस्यीय समिति ने जांच के दायरे में इस अधिकारी को शामिल नहीं किया। लिहाजा, तेल घोटाले की सच्चाई सामने लाने और घोटाले में शामिल सभी लोगों को बेनकाब करने के लिए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जानी चाहिए।
बता दें कि, नगर पालिका के सभासदों ने पालिका प्रशासन पर वाहनों में डीजल डालने के नाम पर गड़बड़ी का आरोप लगाया था। सभासदों ने इस प्रकरण में पालिकाध्यक्ष को कुछ साक्ष्य भी दिए थे। आरोप था कि प्रत्येक वाहन में 30 लीटर डीजल डालने की रसीद पेट्रोल पंप से ली जा रही है। जबकि, डीजल 20 लीटर ही डाला जा रहा है। सभासदों के हंगामे के बाद पालिकाध्यक्ष शांति जुवांठा ने एक कर्मचारी को निलंबित कर दिया था।
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नगर पालिका में हुए तेल घोटाले के मामले में सभासदों ने प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने संबंधी ज्ञापन डीएम को सौंपा। ज्ञापन में सभासदों ने कहा कि जांच के लिए नगर पालिका प्रशासन की ओर से गठित दो सदस्यीय समिति मामले की लीपापोती कर सकती है। ऐसे में तेल घोटाला प्रकरण की जांच किसी बाहरी एजेंसी से कराई जाए।
सभासद अंकित जोशी और विशन सिंह राणा ने कहा कि पालिका प्रशासन ने तेल घोटाला प्रकरण की जांच के लिए अपने ही दो कर्मचारियों की समिति गठित की है। जिससे जांच की पारदर्शिता संदेह के घेरे में है। बताया कि सभासद पूरे प्रकरण के लिए पालिका के एक वरिष्ठ अधिकारी को दोषी मानते हैं। जबकि, दो सदस्यीय समिति ने जांच के दायरे में इस अधिकारी को शामिल नहीं किया। लिहाजा, तेल घोटाले की सच्चाई सामने लाने और घोटाले में शामिल सभी लोगों को बेनकाब करने के लिए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जानी चाहिए।
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बता दें कि, नगर पालिका के सभासदों ने पालिका प्रशासन पर वाहनों में डीजल डालने के नाम पर गड़बड़ी का आरोप लगाया था। सभासदों ने इस प्रकरण में पालिकाध्यक्ष को कुछ साक्ष्य भी दिए थे। आरोप था कि प्रत्येक वाहन में 30 लीटर डीजल डालने की रसीद पेट्रोल पंप से ली जा रही है। जबकि, डीजल 20 लीटर ही डाला जा रहा है। सभासदों के हंगामे के बाद पालिकाध्यक्ष शांति जुवांठा ने एक कर्मचारी को निलंबित कर दिया था।
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