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देऊ गांव में बरात लेकर पहुंची तीन दुल्हनें
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ब्यूरो/अमर उजाला, साहिया
मैदानी क्षेत्रों में दूल्हा बरात लेकर दुल्हन के घर आता है, लेकिन देहरादून जिले के जौनसार बावर में अनूठी परंपरा है। यहां दुल्हन, दूल्हे के घर बरात लेकर आती है। सोमवार को यह परंपरा जनजातीय क्षेत्र कालसी ब्लॉक में देखने को मिली।
ब्लॉक के देऊ गांव में एक ही परिवार में तीन दुल्हनें अलग-अलग स्थानों से बरात लेकर पहुंची। इससे पहले बीते दिनों इसी विकासखंड के कनबुआ गांव में भी एक ही परिवार में तीन दुल्हनें बरात लेकर पहुंची थीं। स्थानीय बोली में इसे जोजोड़ा विवाह कहते हैं। गांव की रहेणी-दियाणी (महिलाएं और बेटियां) और ग्रामीण सभी इस विवाह के गवाह बनते हैं। देऊ गांव निवासी माया सिंह चौहान ने संयुक्त परिवार की परंपरा का निर्वाह करते हुए अपने और भाई सहीराम के पुत्र अनिल, वीरेंद्र और राकेश का विवाह एक ही दिन करने का फैसला किया। तीनों बच्चों की शादी रूपोऊ गांव के जवाहर सिंह रावत की पुत्री पिंकी, नराया निवासी दिवान सिंह चौहान की पुत्री अरबीना और निछिया निवासी राम सिंह चौहान की पुत्री काजल से तय की थी। तीनों दुल्हनें बरात लेकर सोमवार सुबह नौ बजेे देऊ गांव पहुंची, जहां विधि विधान से सभी का विवाह संपन्न हुआ। परिवार के मुखिया माया सिंह ने भाई सहीराम के साथ बरातियों और मेहमानों का स्वागत किया। एक ही परिवार में एक साथ तीन जोड़ों के विवाह बंधन में बधंने की खुशी में पूरा गांव शामिल हुआ। इस दौरान गांव में सांस्कृतिक कार्यक्रम की भी धूम रही।
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सदियों से चली आ रही है परंपरा
जौनसार बावर में जोजोड़ा विवाह की परंपरा सदियों से चली आ रही है। परंपरा के अनुसार दुल्हन सुबह के समय परिवार के लोगों के साथ दूल्हे के घर बरात लेकर आती है। दूल्हे का परिवार घर आई बरात का स्वागत करता है। घर में पूजा अर्चना के बाद जयमाला होती है और दूल्हा, दुल्हन एक दूसरे को अंगूठी पहनाते हैं। साथ ही परंपरा के अनुसार एक दूसरे को दूध भात खिलाकर विवाह बंधन में बंध जाते हैं। इस बीच गांव की महिलाओं का आदर सत्कार कर उन्हें पारंपरिक व्यंजन परोसे जाते हैं। झैंता, रासो, तांदी आदि लोक गीत और नृत्यों से पूरा आंगन गुलजार रहता है। दुल्हन के यहां से दूल्हे के घर आने वाले बराती अगले दिन वापस लौट जाते हैं। जबकि, दुल्हन और दूल्हा विवाह बंधन में बंधने के तीन दिन बाद दुल्हन के घर जाते हैं। वहां कुछ दिन रहने के बाद दूल्हा दुल्हन को साथ लेकर अपने घर आ जाता है।
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मैदानी क्षेत्रों में दूल्हा बरात लेकर दुल्हन के घर आता है, लेकिन देहरादून जिले के जौनसार बावर में अनूठी परंपरा है। यहां दुल्हन, दूल्हे के घर बरात लेकर आती है। सोमवार को यह परंपरा जनजातीय क्षेत्र कालसी ब्लॉक में देखने को मिली।
ब्लॉक के देऊ गांव में एक ही परिवार में तीन दुल्हनें अलग-अलग स्थानों से बरात लेकर पहुंची। इससे पहले बीते दिनों इसी विकासखंड के कनबुआ गांव में भी एक ही परिवार में तीन दुल्हनें बरात लेकर पहुंची थीं। स्थानीय बोली में इसे जोजोड़ा विवाह कहते हैं। गांव की रहेणी-दियाणी (महिलाएं और बेटियां) और ग्रामीण सभी इस विवाह के गवाह बनते हैं। देऊ गांव निवासी माया सिंह चौहान ने संयुक्त परिवार की परंपरा का निर्वाह करते हुए अपने और भाई सहीराम के पुत्र अनिल, वीरेंद्र और राकेश का विवाह एक ही दिन करने का फैसला किया। तीनों बच्चों की शादी रूपोऊ गांव के जवाहर सिंह रावत की पुत्री पिंकी, नराया निवासी दिवान सिंह चौहान की पुत्री अरबीना और निछिया निवासी राम सिंह चौहान की पुत्री काजल से तय की थी। तीनों दुल्हनें बरात लेकर सोमवार सुबह नौ बजेे देऊ गांव पहुंची, जहां विधि विधान से सभी का विवाह संपन्न हुआ। परिवार के मुखिया माया सिंह ने भाई सहीराम के साथ बरातियों और मेहमानों का स्वागत किया। एक ही परिवार में एक साथ तीन जोड़ों के विवाह बंधन में बधंने की खुशी में पूरा गांव शामिल हुआ। इस दौरान गांव में सांस्कृतिक कार्यक्रम की भी धूम रही।
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सदियों से चली आ रही है परंपरा
जौनसार बावर में जोजोड़ा विवाह की परंपरा सदियों से चली आ रही है। परंपरा के अनुसार दुल्हन सुबह के समय परिवार के लोगों के साथ दूल्हे के घर बरात लेकर आती है। दूल्हे का परिवार घर आई बरात का स्वागत करता है। घर में पूजा अर्चना के बाद जयमाला होती है और दूल्हा, दुल्हन एक दूसरे को अंगूठी पहनाते हैं। साथ ही परंपरा के अनुसार एक दूसरे को दूध भात खिलाकर विवाह बंधन में बंध जाते हैं। इस बीच गांव की महिलाओं का आदर सत्कार कर उन्हें पारंपरिक व्यंजन परोसे जाते हैं। झैंता, रासो, तांदी आदि लोक गीत और नृत्यों से पूरा आंगन गुलजार रहता है। दुल्हन के यहां से दूल्हे के घर आने वाले बराती अगले दिन वापस लौट जाते हैं। जबकि, दुल्हन और दूल्हा विवाह बंधन में बंधने के तीन दिन बाद दुल्हन के घर जाते हैं। वहां कुछ दिन रहने के बाद दूल्हा दुल्हन को साथ लेकर अपने घर आ जाता है।
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