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छात्राओं ने जानी थ्री डी फिल्म की खूबियां
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
कन्या हाईस्कूल सहसपुर की छात्राओं ने रविवार को विज्ञान धाम झाझरा का शैक्षणिक भ्रमण कर थ्री डी फिल्म की खूबियां जानी। साथ ही तारामंडल, पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति, जीवों के विकास क्रम की जानकारी भी हासिल की।
भ्रमण दल का नेतृत्व कर रहीं शिक्षिका अर्श ने छात्राओं को बताया कि थ्री डी फिल्म एक मोशन पिक्चर होती है, जिसकी छवियां आम फिल्म से अलग बनती हैं। इमेज को रिकॉर्ड करने के लिए स्पेशल मोशन पिक्चर कैमरे का प्रयोग किया जाता है। बताया कि मोशन पिक्चर का स्टीरियोस्कोपिक युग 1890 के अंत में शुरू हुआ, जब ब्रिटिश फिल्मों के पुरोधा विलियम ग्रीन ने थ्री डी प्रक्रिया का पेटेंट किया। फ्रेडरिक युजीन आइव्स ने स्टीरियो कैमरा रिग का पेटेंट 1900 में कराया। इस कैमरे में दो लैंस लगते थे, जो एक दूसरे से 3 से 4 इंच की दूरी पर होते थे। साथ ही भ्रमण के दौरान छात्राओं को विज्ञान के अन्य रहस्यों, पृथ्वी पर जीवन विकास क्रम की जानकारी भी मुहैया कराई गई। भ्रमण दल में चंचल बब्बर, प्रीति जैन, ज्योत्सना डंगवाल, दीपांजलि जुयाल, सुधा लखेड़ा, ऊषा चमोली, मोहन सिंह आदि शामलि रहे।
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कन्या हाईस्कूल सहसपुर की छात्राओं ने रविवार को विज्ञान धाम झाझरा का शैक्षणिक भ्रमण कर थ्री डी फिल्म की खूबियां जानी। साथ ही तारामंडल, पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति, जीवों के विकास क्रम की जानकारी भी हासिल की।
भ्रमण दल का नेतृत्व कर रहीं शिक्षिका अर्श ने छात्राओं को बताया कि थ्री डी फिल्म एक मोशन पिक्चर होती है, जिसकी छवियां आम फिल्म से अलग बनती हैं। इमेज को रिकॉर्ड करने के लिए स्पेशल मोशन पिक्चर कैमरे का प्रयोग किया जाता है। बताया कि मोशन पिक्चर का स्टीरियोस्कोपिक युग 1890 के अंत में शुरू हुआ, जब ब्रिटिश फिल्मों के पुरोधा विलियम ग्रीन ने थ्री डी प्रक्रिया का पेटेंट किया। फ्रेडरिक युजीन आइव्स ने स्टीरियो कैमरा रिग का पेटेंट 1900 में कराया। इस कैमरे में दो लैंस लगते थे, जो एक दूसरे से 3 से 4 इंच की दूरी पर होते थे। साथ ही भ्रमण के दौरान छात्राओं को विज्ञान के अन्य रहस्यों, पृथ्वी पर जीवन विकास क्रम की जानकारी भी मुहैया कराई गई। भ्रमण दल में चंचल बब्बर, प्रीति जैन, ज्योत्सना डंगवाल, दीपांजलि जुयाल, सुधा लखेड़ा, ऊषा चमोली, मोहन सिंह आदि शामलि रहे।
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