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पालिका कार्यालय पर गरजे एनएसयूआई कार्यकर्ता
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
नगरपालिका में तेल खरीद गड़बड़ी को लेकर शुक्रवार को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साए छात्रों ने नगरपालिका कार्यालय में प्रदर्शन कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। वहीं, पालिका प्रशासन पर प्रकरण की लीपापोती का आरोप लगाया।
नगरपालिका कार्यालय में एकत्र हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि पालिका प्रशासन की ओर से इस प्रकरण के वास्तविक दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। डाकपत्थर महाविद्यालय के पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष समीर अंसारी ने कहा कि प्रकरण में कुछ अन्य लोगों का भी हाथ हो सकता है। पालिका प्रशासन भ्रष्टाचार के इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि मामले में लीपापोती के प्रयास को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मामले में कुछ बड़े लोगों की भी भूमिका संदिग्ध है। उन्हें भी जांच के दायरे में लिया जाना चाहिए। बता दें कि इस प्रकरण में पालिका प्रशासन ने एक कर्मचारी को पहले ही निलंबित कर जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। प्रदर्शन करने वालों में रविंद्र सिंह, सलमान गौड, राजीव, साहिल, आदेश राणा, शुभम कश्यप, साहिल पठान, मोहसिन, मोहित रतूड़ी आदि शामिल रहे।
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सभासद ने जांच कमेटी पर उठाए सवाल
नगरपालिका प्रशासन की ओर से पेट्रोल-डीजल हेराफेरी मामले की जांच के लिए गठित कमेटी पर सभासद ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सभासद लवलेश शर्मा ने शुक्रवार को पालिकाध्यक्ष को दिए ज्ञापन में बताया कि जांच कमेटी में नगरपालिका के ही दो कर्मचारियों को शामिल किया गया है। इससे साफ है कि अधिशासी अधिकारी मामले के दोषी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की जानकारी शासन को मुहैया कराने की मांग करने के साथ ही मामले की जांच एसआईटी से कराने की मांग की।
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कार्यों के आवंटन में गड़बड़ी का लगाया आरोप
आरटीआई कार्यकर्ता आशीष पिपानिया ने नगरपालिका प्रशासन पर विभागीय कार्यों के आवंटन में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल हेराफेरी में निलंबित किए गए कर्मचारी को नियम विरुद्ध जिम्मेदीरी सौंपी गई थी। कहा कि उक्त कर्मचारी की नियुक्ति वर्ष 2002 में माली के पद पर हुई थी, जिसके लिए पद भी स्वीकृत किया गया था। बावजूद इसके कर्मचारी को दाखिल खारिज, स्टोर कीपर, रिकार्ड संहण की जिम्मेदारी दी हुई थी। आरटीआई कार्यकर्ता ने पालिकाध्यक्ष शांति जुवांठा से डीजल-पेट्रोल घोटाले की जांच में इस तथ्य को भी शामिल कराने की मांग की।
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पूरे प्रकरण की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी की जांच आख्या मिलने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
- शांति जुवांठा, नगर पालिका अध्यक्ष
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नगरपालिका में तेल खरीद गड़बड़ी को लेकर शुक्रवार को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साए छात्रों ने नगरपालिका कार्यालय में प्रदर्शन कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। वहीं, पालिका प्रशासन पर प्रकरण की लीपापोती का आरोप लगाया।
नगरपालिका कार्यालय में एकत्र हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि पालिका प्रशासन की ओर से इस प्रकरण के वास्तविक दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। डाकपत्थर महाविद्यालय के पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष समीर अंसारी ने कहा कि प्रकरण में कुछ अन्य लोगों का भी हाथ हो सकता है। पालिका प्रशासन भ्रष्टाचार के इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि मामले में लीपापोती के प्रयास को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मामले में कुछ बड़े लोगों की भी भूमिका संदिग्ध है। उन्हें भी जांच के दायरे में लिया जाना चाहिए। बता दें कि इस प्रकरण में पालिका प्रशासन ने एक कर्मचारी को पहले ही निलंबित कर जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। प्रदर्शन करने वालों में रविंद्र सिंह, सलमान गौड, राजीव, साहिल, आदेश राणा, शुभम कश्यप, साहिल पठान, मोहसिन, मोहित रतूड़ी आदि शामिल रहे।
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सभासद ने जांच कमेटी पर उठाए सवाल
नगरपालिका प्रशासन की ओर से पेट्रोल-डीजल हेराफेरी मामले की जांच के लिए गठित कमेटी पर सभासद ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सभासद लवलेश शर्मा ने शुक्रवार को पालिकाध्यक्ष को दिए ज्ञापन में बताया कि जांच कमेटी में नगरपालिका के ही दो कर्मचारियों को शामिल किया गया है। इससे साफ है कि अधिशासी अधिकारी मामले के दोषी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की जानकारी शासन को मुहैया कराने की मांग करने के साथ ही मामले की जांच एसआईटी से कराने की मांग की।
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कार्यों के आवंटन में गड़बड़ी का लगाया आरोप
आरटीआई कार्यकर्ता आशीष पिपानिया ने नगरपालिका प्रशासन पर विभागीय कार्यों के आवंटन में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल हेराफेरी में निलंबित किए गए कर्मचारी को नियम विरुद्ध जिम्मेदीरी सौंपी गई थी। कहा कि उक्त कर्मचारी की नियुक्ति वर्ष 2002 में माली के पद पर हुई थी, जिसके लिए पद भी स्वीकृत किया गया था। बावजूद इसके कर्मचारी को दाखिल खारिज, स्टोर कीपर, रिकार्ड संहण की जिम्मेदारी दी हुई थी। आरटीआई कार्यकर्ता ने पालिकाध्यक्ष शांति जुवांठा से डीजल-पेट्रोल घोटाले की जांच में इस तथ्य को भी शामिल कराने की मांग की।
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पूरे प्रकरण की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी की जांच आख्या मिलने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
- शांति जुवांठा, नगर पालिका अध्यक्ष