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बाढ़ और सूखे का मुख्य कारण पारिस्थितिकी असंतुलन : राजेंद्र
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ब्यूरो/अमर उजाला, सेलाकुई
इकफाई विश्व विद्यालय सेलाकुई में जल संसाधन प्रबंधन विषय पर आयोजित एनजे यशस्वी मैमोरियल सेमिनार में युवाओं को जल संसाधन प्रबंधन की जानकारी दी गई। सेमिनार में वाटर मैन ऑफ इंडिया के नाम से विख्यात रैमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि देश में बाढ़ और सूखे का मुख्य कारण पारिस्थितिकी असंतुलन है।
उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने 11800 जल स्रोतों को पिछले 45 सालों में पुनर्जीवित किया है। कहा कि युवा पीढ़ी के जल संसाधन प्रबंधन की दिशा में योगदान देने से ही समाज का उद्धार होगा। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पवन कुमार अग्रवाल ने जल संसाधन प्रबंधन को स्थाई विकास के लिए अहम पहलू बताया। सेमिनार में कुल सचिव ब्रिगेडियर राजीव सेठी ने भी विचार रखे। प्रति कुलपति डॉ. मुड्डू विनय ने एनजे यशस्वी के आधुनिक शिक्षण व्यवस्था में योगदान पर चर्चा करते हुए उनकी गुणवत्ता, समय प्रबंधन, प्रतिबद्धता और लोगों को प्रभावित करने के गुणों को दर्शाया। इस दौरान सेमिनार के समन्वयक प्रो. राघवेंद्र शर्मा, प्रो. मोनिका खरोला, डॉ. अमित जोशी, डॉ. अंकिता श्रीवास्तव, प्रो. संजीव मालवीय, डॉ. राकेश पांडे, प्रो. जीएफ चक्रवर्ती आदि मौजूद रहे।
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इकफाई विश्व विद्यालय सेलाकुई में जल संसाधन प्रबंधन विषय पर आयोजित एनजे यशस्वी मैमोरियल सेमिनार में युवाओं को जल संसाधन प्रबंधन की जानकारी दी गई। सेमिनार में वाटर मैन ऑफ इंडिया के नाम से विख्यात रैमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि देश में बाढ़ और सूखे का मुख्य कारण पारिस्थितिकी असंतुलन है।
उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने 11800 जल स्रोतों को पिछले 45 सालों में पुनर्जीवित किया है। कहा कि युवा पीढ़ी के जल संसाधन प्रबंधन की दिशा में योगदान देने से ही समाज का उद्धार होगा। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पवन कुमार अग्रवाल ने जल संसाधन प्रबंधन को स्थाई विकास के लिए अहम पहलू बताया। सेमिनार में कुल सचिव ब्रिगेडियर राजीव सेठी ने भी विचार रखे। प्रति कुलपति डॉ. मुड्डू विनय ने एनजे यशस्वी के आधुनिक शिक्षण व्यवस्था में योगदान पर चर्चा करते हुए उनकी गुणवत्ता, समय प्रबंधन, प्रतिबद्धता और लोगों को प्रभावित करने के गुणों को दर्शाया। इस दौरान सेमिनार के समन्वयक प्रो. राघवेंद्र शर्मा, प्रो. मोनिका खरोला, डॉ. अमित जोशी, डॉ. अंकिता श्रीवास्तव, प्रो. संजीव मालवीय, डॉ. राकेश पांडे, प्रो. जीएफ चक्रवर्ती आदि मौजूद रहे।
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