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शिक्षक को बाल मनोविज्ञान की समझ होना जरूरी
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान की ओर से सोमवार को आशा राम वैदिक इंटर कॉलेज में बाल विकास और शिक्षा का अधिकार अधिनियम विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में डीएलएड एवं ब्रिज कोर्स के प्रशिक्षुुओं को बाल मनोविज्ञान की जानकारी दी गई।
मेजबान विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल नेगी ने कहा कि शिक्षकों को बाल मनोविज्ञान की समझ होना जरूरी है, जिससे शिक्षक नौनिहालों के मनोभावों को पढ़कर उसी के अनुरूप शिक्षा मुहैया करा सकें। बच्चा तनाव और भयरहित माहौल में आसानी से चीजों को ग्रहण करता है। शिक्षण के दौरान सरल भाषा का प्रयोग कक्षाओं में किया जाना चाहिए, जिससे शिक्षण कार्य बच्चे के लिए बोधगम्य बन सके व छात्रों तक विषय सरल शब्दों में पहुंच सके। एक शिक्षक के मन में हर बच्चे के लिए स्नेह, अपनेपन और समानता का एहसास होना चाहिए। सेमिनार में शिक्षक संजय बिश्नोई ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम की जानकारी दी। इस दौरान प्रियंका गुप्ता, सुल्ताना अंसारी, राजकुमारी, सुरभि असवाल, सरिता पालीवाल, गिरिजा माहेश्वरी, सविता मेनन, फातिमा, संगीता, प्रीति जैन, नीरज वर्मा, विभा आदि मौजूद रहे।
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राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान की ओर से सोमवार को आशा राम वैदिक इंटर कॉलेज में बाल विकास और शिक्षा का अधिकार अधिनियम विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। सेमिनार में डीएलएड एवं ब्रिज कोर्स के प्रशिक्षुुओं को बाल मनोविज्ञान की जानकारी दी गई।
मेजबान विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल नेगी ने कहा कि शिक्षकों को बाल मनोविज्ञान की समझ होना जरूरी है, जिससे शिक्षक नौनिहालों के मनोभावों को पढ़कर उसी के अनुरूप शिक्षा मुहैया करा सकें। बच्चा तनाव और भयरहित माहौल में आसानी से चीजों को ग्रहण करता है। शिक्षण के दौरान सरल भाषा का प्रयोग कक्षाओं में किया जाना चाहिए, जिससे शिक्षण कार्य बच्चे के लिए बोधगम्य बन सके व छात्रों तक विषय सरल शब्दों में पहुंच सके। एक शिक्षक के मन में हर बच्चे के लिए स्नेह, अपनेपन और समानता का एहसास होना चाहिए। सेमिनार में शिक्षक संजय बिश्नोई ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम की जानकारी दी। इस दौरान प्रियंका गुप्ता, सुल्ताना अंसारी, राजकुमारी, सुरभि असवाल, सरिता पालीवाल, गिरिजा माहेश्वरी, सविता मेनन, फातिमा, संगीता, प्रीति जैन, नीरज वर्मा, विभा आदि मौजूद रहे।
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