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चकबंदी से बदलेगी प्रदेश की खेती की तस्वीर
Updated Mon, 17 Dec 2018 09:51 PM IST
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नारायणबगड़। उत्तरी कड़ाकोट क्षेत्र के कोठली गांव में दो दिवसीय कृषि एवं औद्योगिक ग्रामीण विकास मेले का आयोजन किया गया। मेले का शुभारंभ करते हुए कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि चकबंदी से प्रदेश में कृषि की तस्वीर बदलेगी। ग्रामीण आम चर्चा के बाद चकबंदी मामले में निर्णय लें, जिससे कृषि के साथ ही किसानों को भी बेहतर लाभ मिलेगा। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां भी दीं।
मेले में राजकीय इंटर कालेज कोठली, प्राथमिक विद्यालय कोथरा, खैंतोलीखाल सहित आसपास के स्कूली छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना, स्वागत गान के साथ गढ़वाली लोक गीत और लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दीं। मेला समिति ने मुख्य अतिथि काबीना मंत्री सुबोध उनियाल का स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि कड़ाकोट क्षेत्र कृषि और उद्यानीकरण की पहचान है। इस क्षेत्र में कृषि की संभावनाओं के लिए प्रदेश सरकार हरसंभव मदद करेगी। इससे पूर्व उन्होंने क्षेत्र के लिए स्वीकृत भंगोटा-कुश सड़क निर्माण के लिए भूमि पूजन किया। समारोह में थराली विधायक मुन्नी देवी शाह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह रावत, भाजपा मंडल अध्यक्ष दिलीप नेगी, डा. हरपाल नेगी, सरस्वती कनेरी, गोविंद भंडारी, कमलेश सती, भूपेंद्र मेहरा, सहित मेला आयोजन समिति के पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
घोड़ा नृत्य और नाग देवता रहे आकर्षण का केंद्र
कड़ाकोट में 28 साल बाद हुए कौथिग का समापन
अमर उजाला ब्यूरो
नारायणबगड़। कड़ाकोट में 28 साल बाद आयोजित नाग देवता भंडारा नृत्य कौथिग का पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ समापन हो गया। आयोजन में ध्याणियों के साथ बड़ी संख्या में प्रवासी लोग शामिल हुए। कौथिग में देवताओं के जागर, पौराणिक घोड़ा नृत्य और नाग देवता मेले का आकर्षण केंद्र रहे।
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नौ दिन तक चले इस कौथिग में नाग देवता मंदिर में देव डांगरियों के अवतरण के साथ ही कृष्ण, नाग के पश्वाओं ने सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इसी मेले में घुड़यौत नृत्य, नाग नृत्य होता है। नाग देवता मंदिर कमेटी के अध्यक्ष महावीर सिंह रावत ने बताया कि इस अवसर पर क्षेत्र की ध्याणियों को बुलाया जाता है और मेले के समापन के दिन भंडारे में भोज के साथ विदा किया जाता है। नाग देवता मंदिर कमेटी के संरक्षक बीरबल सिंह रावत का कहना है कई सालों से एक राय नहीं बनने से यह आयोजन नहीं हो पाया। प्रवासी सत्यप्रकाश सती और नंदन सिंह रावत का कहना है इस कौथिग में देवताओं के साथ ही ध्याणियों की पूजा भी की जाती है। इस अवसर पर मंदिर समिति के महावीर सिंह, यदुवीर सिंह रावत, भगवत सिंह रावत, यशवंत सिंह रावत, रणजीत सिंह रावत, मोहन सिंह रावत, दलवीर सिंह रावत, अर्जुन सिंह रावत, अनुसूया प्रसाद सती, दिगपाल सिंह रावत, भरत सिंह सिरोंणी, उषा देवी, गंभीर सिंह रावत, खुशहाल सिंह रावत आदि शामिल थे।
मेले में राजकीय इंटर कालेज कोठली, प्राथमिक विद्यालय कोथरा, खैंतोलीखाल सहित आसपास के स्कूली छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना, स्वागत गान के साथ गढ़वाली लोक गीत और लोक नृत्यों की प्रस्तुतियां दीं। मेला समिति ने मुख्य अतिथि काबीना मंत्री सुबोध उनियाल का स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि कड़ाकोट क्षेत्र कृषि और उद्यानीकरण की पहचान है। इस क्षेत्र में कृषि की संभावनाओं के लिए प्रदेश सरकार हरसंभव मदद करेगी। इससे पूर्व उन्होंने क्षेत्र के लिए स्वीकृत भंगोटा-कुश सड़क निर्माण के लिए भूमि पूजन किया। समारोह में थराली विधायक मुन्नी देवी शाह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह रावत, भाजपा मंडल अध्यक्ष दिलीप नेगी, डा. हरपाल नेगी, सरस्वती कनेरी, गोविंद भंडारी, कमलेश सती, भूपेंद्र मेहरा, सहित मेला आयोजन समिति के पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
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घोड़ा नृत्य और नाग देवता रहे आकर्षण का केंद्र
कड़ाकोट में 28 साल बाद हुए कौथिग का समापन
अमर उजाला ब्यूरो
नारायणबगड़। कड़ाकोट में 28 साल बाद आयोजित नाग देवता भंडारा नृत्य कौथिग का पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ समापन हो गया। आयोजन में ध्याणियों के साथ बड़ी संख्या में प्रवासी लोग शामिल हुए। कौथिग में देवताओं के जागर, पौराणिक घोड़ा नृत्य और नाग देवता मेले का आकर्षण केंद्र रहे।
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नौ दिन तक चले इस कौथिग में नाग देवता मंदिर में देव डांगरियों के अवतरण के साथ ही कृष्ण, नाग के पश्वाओं ने सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इसी मेले में घुड़यौत नृत्य, नाग नृत्य होता है। नाग देवता मंदिर कमेटी के अध्यक्ष महावीर सिंह रावत ने बताया कि इस अवसर पर क्षेत्र की ध्याणियों को बुलाया जाता है और मेले के समापन के दिन भंडारे में भोज के साथ विदा किया जाता है। नाग देवता मंदिर कमेटी के संरक्षक बीरबल सिंह रावत का कहना है कई सालों से एक राय नहीं बनने से यह आयोजन नहीं हो पाया। प्रवासी सत्यप्रकाश सती और नंदन सिंह रावत का कहना है इस कौथिग में देवताओं के साथ ही ध्याणियों की पूजा भी की जाती है। इस अवसर पर मंदिर समिति के महावीर सिंह, यदुवीर सिंह रावत, भगवत सिंह रावत, यशवंत सिंह रावत, रणजीत सिंह रावत, मोहन सिंह रावत, दलवीर सिंह रावत, अर्जुन सिंह रावत, अनुसूया प्रसाद सती, दिगपाल सिंह रावत, भरत सिंह सिरोंणी, उषा देवी, गंभीर सिंह रावत, खुशहाल सिंह रावत आदि शामिल थे।