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रस्किन बांड ने सेना प्रमुख के बयान को सराहा
Updated Mon, 17 Dec 2018 02:08 AM IST
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रस्किन बांड ने सेना प्रमुख के बयान को सराहा
ब्यूरो/अमर उजाला
मसूरी। रक्षा संपदा दिवस और विजय दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में विख्यात अंग्रेजी लेखक पद्मभूषण, पद्मश्री रस्किन बांड ने थल सेना अध्यक्ष जरनल विपिन रावत के युवाओं के लिए दिए गए बयान की प्रशंसा की।
रविवार को लंढौर छावनी परिषद में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि रस्किन बांड, कर्नल बीके शुक्ला और कैंट उपाध्यक्ष महेश चंद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। छावनी परिषद की ओर से रस्किन बांड को शॉल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर रस्किन बांड ने कहा कि वे अक्सर अपनी किताबों में छावनी का उल्लेख करते हैं। उन्होंने हाल ही में विपिन रावत के ‘सेना का मतलब नौकरी नहीं, यहां जरूरत है समर्पण और देशभक्ति की। भारतीय सेना को एक नौकरी प्रदान करने वाले संस्थान के तौर पर नहीं देखना चाहिए, बल्कि सेना का मतलब शारीरिक और मानसिक मजबूती व हर कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता होता है’ बयान की प्रशंसा की। यह बयान युवाओं में देशभक्ति जगाने वाला है।
कार्यक्रम को संबोधन करते हुए कैंट उपाध्यक्ष महेशचंद ने कहा कि समाचार पत्रों के माध्यम से छावनी परिषद पर लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोप यदि साबित होते हैं तो वे अपने कई सभासदों के साथ इस्तीफा देने को तैयार हैं।
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इस मौके पर बद्री-केदार संस्कृति कला मंच कोटद्वार के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में छावनी परिषद के छह सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में छावनी परिषद सदस्य पुष्पा पडियार, सुशील अग्रवाल, चंद्रकला सयाना, रमेश कनौजिया, अवतार कुकरेजा, राकेश अग्रवाल, मनोरंजन त्रिपाठी, जगजीत कुकरेजा, परमजीत कोहली, धनेंद्र पुंडीर, नरेंद्र पडियार, सुनील पंवार सहित छावनी परिषद के सभी कर्मचारी मौजूद रहे।
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ब्यूरो/अमर उजाला
मसूरी। रक्षा संपदा दिवस और विजय दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में विख्यात अंग्रेजी लेखक पद्मभूषण, पद्मश्री रस्किन बांड ने थल सेना अध्यक्ष जरनल विपिन रावत के युवाओं के लिए दिए गए बयान की प्रशंसा की।
रविवार को लंढौर छावनी परिषद में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि रस्किन बांड, कर्नल बीके शुक्ला और कैंट उपाध्यक्ष महेश चंद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। छावनी परिषद की ओर से रस्किन बांड को शॉल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस मौके पर रस्किन बांड ने कहा कि वे अक्सर अपनी किताबों में छावनी का उल्लेख करते हैं। उन्होंने हाल ही में विपिन रावत के ‘सेना का मतलब नौकरी नहीं, यहां जरूरत है समर्पण और देशभक्ति की। भारतीय सेना को एक नौकरी प्रदान करने वाले संस्थान के तौर पर नहीं देखना चाहिए, बल्कि सेना का मतलब शारीरिक और मानसिक मजबूती व हर कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता होता है’ बयान की प्रशंसा की। यह बयान युवाओं में देशभक्ति जगाने वाला है।
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कार्यक्रम को संबोधन करते हुए कैंट उपाध्यक्ष महेशचंद ने कहा कि समाचार पत्रों के माध्यम से छावनी परिषद पर लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोप यदि साबित होते हैं तो वे अपने कई सभासदों के साथ इस्तीफा देने को तैयार हैं।
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इस मौके पर बद्री-केदार संस्कृति कला मंच कोटद्वार के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में छावनी परिषद के छह सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में छावनी परिषद सदस्य पुष्पा पडियार, सुशील अग्रवाल, चंद्रकला सयाना, रमेश कनौजिया, अवतार कुकरेजा, राकेश अग्रवाल, मनोरंजन त्रिपाठी, जगजीत कुकरेजा, परमजीत कोहली, धनेंद्र पुंडीर, नरेंद्र पडियार, सुनील पंवार सहित छावनी परिषद के सभी कर्मचारी मौजूद रहे।