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छठवें दिन भी आवाजाही के लिए नही खुला मलारी हाईवे
Updated Sat, 15 Dec 2018 09:16 PM IST
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जोशीमठ। जोशीमठ-मलारी हाईवे शनिवार को छठवें दिन भी वाहनों की आवाजाही के लिए सुचारु नहीं हो पाया। यहां चट्टान पर अटा मलबा और पत्थर रुक-रुककर हाईवे पर आ रहे हैं। हाईवे बंद होने से तिब्बत (चीन) सीमा क्षेत्र में सेना और आईटीबीपी के जवानों की आवाजाही ठप पड़ी हुई है। वहीं समीपवर्ती गांवों की दो हजार की आबादी गांवों में ही कैद होकर रह गई है। ग्रामीण करीब तीन किलोमीटर की पैदल दूरी नापकर गंतव्य को पहुंच रहे हैं।
दस दिसंबर को बारिश के दौरान जोशीमठ-मलारी हाईवे पर सलधार के पास चट्टान का एक हिस्सा टूटकर आ गया था। तब से मार्ग बंद पड़ा है। जोशीमठ-मलारी हाईवे चीन (तिब्बत) सीमा क्षेत्र को यातायात से जोड़ता है। साथ ही नीती घाटी के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों की आवाजाही का भी यह एकमात्र मार्ग है। घाटी के ऊंचाई क्षेत्र वाले ग्रामीण शीतकाल में जिले के निचले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं, लेकिन सुरांईथोटा, लाता, रैणी, भल्लागांव, सूकी, पेंग, मुरंडा गांव के लगभग दो हजार की आबादी अब अपने गांवों में ही कैद होकर रह गई है। ग्रामीणों को अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए तीन किलोमीटर पैदल दूरी नापनी पड़ रही है। ग्रामीण लक्ष्मण सिंह बुटोला और भूपेंद्र सिंह का कहना है कि छह दिनों से सीमा क्षेत्र को जोड़ने वाला एकमात्र मार्ग बंद है, लेकिन इसे खोलने में हो रही देरी से सेना के जवानों के साथ ही स्थानीय लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। इन दिनों क्षेत्र में शादी का सीजन है। ऐसे में ग्रामीणों को सामान की आपूर्ति के लिए तीन किमी पैदल दरी तय कर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है।
कोट
चट्टानी भाग पर अभी भी मलबा और पत्थर अटके हुए हैं, जिससे हाईवे खोलने में दिक्कतें आ रही हैं। जेसीबी रोबोट के जरिए मलबा हटाया जा रहा है। रविवार तक हाईवे सुचारु कर दिया जाएगा। - एसएस मक्कड़, कमांडर, बीआरओ, जोशीमठ।
दस दिसंबर को बारिश के दौरान जोशीमठ-मलारी हाईवे पर सलधार के पास चट्टान का एक हिस्सा टूटकर आ गया था। तब से मार्ग बंद पड़ा है। जोशीमठ-मलारी हाईवे चीन (तिब्बत) सीमा क्षेत्र को यातायात से जोड़ता है। साथ ही नीती घाटी के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों की आवाजाही का भी यह एकमात्र मार्ग है। घाटी के ऊंचाई क्षेत्र वाले ग्रामीण शीतकाल में जिले के निचले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं, लेकिन सुरांईथोटा, लाता, रैणी, भल्लागांव, सूकी, पेंग, मुरंडा गांव के लगभग दो हजार की आबादी अब अपने गांवों में ही कैद होकर रह गई है। ग्रामीणों को अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए तीन किलोमीटर पैदल दूरी नापनी पड़ रही है। ग्रामीण लक्ष्मण सिंह बुटोला और भूपेंद्र सिंह का कहना है कि छह दिनों से सीमा क्षेत्र को जोड़ने वाला एकमात्र मार्ग बंद है, लेकिन इसे खोलने में हो रही देरी से सेना के जवानों के साथ ही स्थानीय लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। इन दिनों क्षेत्र में शादी का सीजन है। ऐसे में ग्रामीणों को सामान की आपूर्ति के लिए तीन किमी पैदल दरी तय कर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है।
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कोट
चट्टानी भाग पर अभी भी मलबा और पत्थर अटके हुए हैं, जिससे हाईवे खोलने में दिक्कतें आ रही हैं। जेसीबी रोबोट के जरिए मलबा हटाया जा रहा है। रविवार तक हाईवे सुचारु कर दिया जाएगा। - एसएस मक्कड़, कमांडर, बीआरओ, जोशीमठ।
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