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एम्स में स्पाइनल कॉर्ड का जटिल ऑपरेशन सफल
Updated Thu, 13 Dec 2018 02:19 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभाग की ओर से 11 साल की बच्ची का स्पाइनल कॉर्ड (मेरूरज्जु) का जटिल ऑपरेशन किया गया। बच्ची पहले अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाती थी, लेकिन ऑपरेशन के बाद वह अब अपने पैरों पर खड़ी हो पा रही है। एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि ऑपरेशन न्यूरो सर्जरी विभाग के साथ आर्थोपेडिक्स, पीएमआर, फिजियोलॉजी व एनेस्थीसिया विभागों के संयुक्त प्रयास से संभव हो पाया है।
न्यूरो सर्जन डॉ. निशांत गोयल ने बताया कि 11 वर्षीय बच्ची बचपन से ही स्पास्टिक सेरेब्रल पाल्सी से ग्रस्त थी, जिससे उसके पैरों में जकड़न बढ़ने लगी थी। यह जकड़न इतनी अधिक बढ़ गई थी कि वह अपने पैरों पर खड़ी होने में सक्षम नहीं थी। परीक्षण के बाद ऑपरेशन को करने का निर्णय लिया गया। डॉ. निशांत के अनुसार उत्तर भारत में गिने चुने अस्पतालों में ही डिजोटामी ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध है। निजी चिकित्सालयों में इस बीमारी को ठीक करने में डेढ़ से दो लाख का खर्च आता है, जबकि एम्स में आपरेशन में सिर्फ पांच हजार रुपये खर्च आया। रोगी अब पूरी तरह से स्वस्थ है और अपने पैरों पर खड़ी हो पा रही है। बचपन से व्हील चेयर के सहारे चलने वाली बच्ची जल्दी ही अपने पैरों से चल सकेगी। टीम में आर्थो की प्रो. शोभा अरोड़ा, तान्या, रूपेश, डॉ. पूर्वी कुलश्रेष्ठा, डॉ. प्रियंका आदि शामिल रहे।
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न्यूरो सर्जन डॉ. निशांत गोयल ने बताया कि 11 वर्षीय बच्ची बचपन से ही स्पास्टिक सेरेब्रल पाल्सी से ग्रस्त थी, जिससे उसके पैरों में जकड़न बढ़ने लगी थी। यह जकड़न इतनी अधिक बढ़ गई थी कि वह अपने पैरों पर खड़ी होने में सक्षम नहीं थी। परीक्षण के बाद ऑपरेशन को करने का निर्णय लिया गया। डॉ. निशांत के अनुसार उत्तर भारत में गिने चुने अस्पतालों में ही डिजोटामी ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध है। निजी चिकित्सालयों में इस बीमारी को ठीक करने में डेढ़ से दो लाख का खर्च आता है, जबकि एम्स में आपरेशन में सिर्फ पांच हजार रुपये खर्च आया। रोगी अब पूरी तरह से स्वस्थ है और अपने पैरों पर खड़ी हो पा रही है। बचपन से व्हील चेयर के सहारे चलने वाली बच्ची जल्दी ही अपने पैरों से चल सकेगी। टीम में आर्थो की प्रो. शोभा अरोड़ा, तान्या, रूपेश, डॉ. पूर्वी कुलश्रेष्ठा, डॉ. प्रियंका आदि शामिल रहे।
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