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कहीं काठ के हिरण, तो कहीं हुआ हाथी नृत्य
Updated Wed, 12 Dec 2018 01:51 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, साहिया
जौनसार बावर में बूढ़ी दिवाली का मंगलवार को समापन हो गया। दिवाली के अंतिम दिन कहीं काठ का हिरण, तो कहीं हाथी नचाया गया। परंपरागत रूप से आयोजित कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े। ग्रामीणों के साथ ही देश के विभिन्न राज्यों से लोग पारंपरिक कार्यक्रम देखने पहुंचे।
अलसी गांव में ढोल दमाऊ के साथ मोडे रे मोडाइए केले मोढ़ाए... गीत पर हारूल नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। गांव के स्याणा कुंदन सिंह बिष्ट ने हाथी पर बैठकर तलवार के साथ नृत्य किया। वे सफेद वेशभूषा में थे। जबकि, पारंपरिक वेशभूषा में स्थानीय महिला, पुरुषों ने सामूहिक रूप से हारूल, जैंता, रासो, नृत्य किया। इसके अलावा डामटा गांव में भी हाथी नचाया गया। जहां गांव के स्याणा अमर सिंह तोमर को काठ के हाथी पर बैठाया गया। वहीं, खत सिली के दातनू गांव में बुजुर्ग भूप सिंह चौहान को काठ के हिरण पर बैठाने का निर्णय लिया गया। इससे पहले मंदिर में पूजा अर्चना की गई। इसके बाद सभी लोग गांव के पंचायत आंगन में पहुंचे और हिरण को नचाया गया। गांव में महिला और पुरुषों ने पूरे दिन झेंता, रासो, हारूल नृत्य किया। 84 वर्षीय भूप सिंह चौहान ने कहा कि उनके लिए गर्व की बात है कि ग्रामीणों ने उन्हें हिरण में बैठाया और सम्मानित किया। इस मौके पर गांव के स्याणा कृपाल सिंह को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कृपाल सिंह, दीवान सिंह, अमर सिंह, चतर सिंह, गुमान सिंह, प्रीतम सिंह, विक्रम सिंह, राजेंद्र, सन्तराम, दिनेश, मातबर, रणवीर, ज्ञान सिंह आदि मौजूद रहे।
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जौनसार बावर में बूढ़ी दिवाली का मंगलवार को समापन हो गया। दिवाली के अंतिम दिन कहीं काठ का हिरण, तो कहीं हाथी नचाया गया। परंपरागत रूप से आयोजित कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े। ग्रामीणों के साथ ही देश के विभिन्न राज्यों से लोग पारंपरिक कार्यक्रम देखने पहुंचे।
अलसी गांव में ढोल दमाऊ के साथ मोडे रे मोडाइए केले मोढ़ाए... गीत पर हारूल नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। गांव के स्याणा कुंदन सिंह बिष्ट ने हाथी पर बैठकर तलवार के साथ नृत्य किया। वे सफेद वेशभूषा में थे। जबकि, पारंपरिक वेशभूषा में स्थानीय महिला, पुरुषों ने सामूहिक रूप से हारूल, जैंता, रासो, नृत्य किया। इसके अलावा डामटा गांव में भी हाथी नचाया गया। जहां गांव के स्याणा अमर सिंह तोमर को काठ के हाथी पर बैठाया गया। वहीं, खत सिली के दातनू गांव में बुजुर्ग भूप सिंह चौहान को काठ के हिरण पर बैठाने का निर्णय लिया गया। इससे पहले मंदिर में पूजा अर्चना की गई। इसके बाद सभी लोग गांव के पंचायत आंगन में पहुंचे और हिरण को नचाया गया। गांव में महिला और पुरुषों ने पूरे दिन झेंता, रासो, हारूल नृत्य किया। 84 वर्षीय भूप सिंह चौहान ने कहा कि उनके लिए गर्व की बात है कि ग्रामीणों ने उन्हें हिरण में बैठाया और सम्मानित किया। इस मौके पर गांव के स्याणा कृपाल सिंह को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कृपाल सिंह, दीवान सिंह, अमर सिंह, चतर सिंह, गुमान सिंह, प्रीतम सिंह, विक्रम सिंह, राजेंद्र, सन्तराम, दिनेश, मातबर, रणवीर, ज्ञान सिंह आदि मौजूद रहे।
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