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हिमालय संरक्षण के लिए बने ठोस नीति
Updated Tue, 11 Dec 2018 10:03 PM IST
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श्रीनगर। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान की श्रीनगर इकाई की ओर से अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस मनाया गया। इस मौके पर जलवायु परिवर्तन से पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव और इससे बचाव के लिए नीतियों की जरूरत पर चर्चा की गई।
मंगलवार को संस्था के भक्तियाना स्थित परिसर में अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर संस्थान के वैज्ञानिक प्रभारी डा. आरके मैखुरी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र संसाधनों की दृष्टि से संपन्न है, लेकिन इसका फायदा स्थानीय लोगों को नहीं मिल पा रहा है। यदि स्थानीय लोगों को इससे आजीविका मिले, तो पलायन में कमी होगी। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से हिमालय संवेदनशील क्षेत्र है। भारत सरकार ने इसके लिए नेशनल एक्शन प्लान मिशन बनाया है। हिमालय पर पूरे भारत का मौसम निर्भर करता है। पिछले दो दशक से हिमालय की जैव विविधता, जंगल व मनुष्य आदि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। स्थानीय लोगों की सुरक्षा और रोजगार के साधनों को ध्यान में रखते हुए हिमालय के विकास व संरक्षण के लिए ठोस नीति बनाए जाने की आवश्यकता है, जिसमें ग्रीन इकोनॉमी, पलायन, रोजगार और संतुलित विकास जैसे बिंदु शामिल होने चाहिए। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक एस. तरफदार, डा. एके साहनी और डा. एके जुगरान आदि ने विचार रखे।
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मंगलवार को संस्था के भक्तियाना स्थित परिसर में अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर संस्थान के वैज्ञानिक प्रभारी डा. आरके मैखुरी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र संसाधनों की दृष्टि से संपन्न है, लेकिन इसका फायदा स्थानीय लोगों को नहीं मिल पा रहा है। यदि स्थानीय लोगों को इससे आजीविका मिले, तो पलायन में कमी होगी। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से हिमालय संवेदनशील क्षेत्र है। भारत सरकार ने इसके लिए नेशनल एक्शन प्लान मिशन बनाया है। हिमालय पर पूरे भारत का मौसम निर्भर करता है। पिछले दो दशक से हिमालय की जैव विविधता, जंगल व मनुष्य आदि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। स्थानीय लोगों की सुरक्षा और रोजगार के साधनों को ध्यान में रखते हुए हिमालय के विकास व संरक्षण के लिए ठोस नीति बनाए जाने की आवश्यकता है, जिसमें ग्रीन इकोनॉमी, पलायन, रोजगार और संतुलित विकास जैसे बिंदु शामिल होने चाहिए। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक एस. तरफदार, डा. एके साहनी और डा. एके जुगरान आदि ने विचार रखे।
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