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गैरसैंण में महिलाओं ने सिस्टम को दिखाया आईना
Updated Sun, 09 Dec 2018 09:59 PM IST
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गैरसैंण। पिछले पांच साल से क्षतिग्रस्त नहर को जब विभाग नहीं बना पाया तो महिलाओं ने कमान संभाली और खेतों के लिए पानी देने वाली एक किमी लंबी नहर की अस्थायी मरम्मत कर पानी पहुंचाने में कामयाब रहीं। हालांकि महिलाओं का यह भी मानना है कि यदि जल्द नहर की स्थायी मरम्मत नहीं की गई तो लंबे समय तक खेतों को पानी मिलना मुश्किल होगा।
खंसर घाटी के बांजापानी, कुसरानी मल्ली, तल्ली, बिचली के 10 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए लघु सिंचाई विभाग द्वारा वर्ष 2000 में नहर बनाई गई थी, लेकिन पिछले पांच साला से नहर क्षतिग्रस्त पड़ी थी। लगातार मांग के बाद जब नहर की मरम्मत के प्रयास नहीं हुए तो रविवार को ग्रामीणों ने खुद कुदाल और फावड़े उठाकर नहर की सफाई के साथ ही अस्थायी मरम्मत की। ग्रामीणों का कहना है कि एक किमी लंबी नहर क्षतिग्रस्त होने से केवल तीन हेक्टेयर खेतों को ही पानी मिल पा रहा था। कुशरानी महिला मंगल दल की अध्यक्ष हसुली देवी के नेतृत्व में महिलाओं ने क्षेत्र में सूखाग्रस्त कुशरानी मल्ली, तल्ली और बिचली, झुमाखेत के काश्तकारों के खेतों की सिंचाई की अस्थायी व्यवस्था की। इस दौरान पूर्व जिला पंचायत सदस्य जसुली पुंडीर, हेमा, यशोदा, बिंदी, अंबी, किरन, अनीता, कुंती, देबकी, पारी, हयाद सिंह, अवतार सिह पुंडीर, बिन्नू बिष्ट आदि ने श्रमदान किया। वहीं दूसरी ओर लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता अमित पाल ने बताया कि विभाग पूरी तरह से केंद्र सरकार पर निर्भर है। पिछले चार सालों से विभाग को कोई बजट नहीं मिल पाया है। ऐसे में किसी भी योजना की मरम्मत करना संभव नहीं है। बजट मिलने पर ही क्षतिग्रस्त योजनाओं की मरम्मत की जाएगी।
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खंसर घाटी के बांजापानी, कुसरानी मल्ली, तल्ली, बिचली के 10 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए लघु सिंचाई विभाग द्वारा वर्ष 2000 में नहर बनाई गई थी, लेकिन पिछले पांच साला से नहर क्षतिग्रस्त पड़ी थी। लगातार मांग के बाद जब नहर की मरम्मत के प्रयास नहीं हुए तो रविवार को ग्रामीणों ने खुद कुदाल और फावड़े उठाकर नहर की सफाई के साथ ही अस्थायी मरम्मत की। ग्रामीणों का कहना है कि एक किमी लंबी नहर क्षतिग्रस्त होने से केवल तीन हेक्टेयर खेतों को ही पानी मिल पा रहा था। कुशरानी महिला मंगल दल की अध्यक्ष हसुली देवी के नेतृत्व में महिलाओं ने क्षेत्र में सूखाग्रस्त कुशरानी मल्ली, तल्ली और बिचली, झुमाखेत के काश्तकारों के खेतों की सिंचाई की अस्थायी व्यवस्था की। इस दौरान पूर्व जिला पंचायत सदस्य जसुली पुंडीर, हेमा, यशोदा, बिंदी, अंबी, किरन, अनीता, कुंती, देबकी, पारी, हयाद सिंह, अवतार सिह पुंडीर, बिन्नू बिष्ट आदि ने श्रमदान किया। वहीं दूसरी ओर लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता अमित पाल ने बताया कि विभाग पूरी तरह से केंद्र सरकार पर निर्भर है। पिछले चार सालों से विभाग को कोई बजट नहीं मिल पाया है। ऐसे में किसी भी योजना की मरम्मत करना संभव नहीं है। बजट मिलने पर ही क्षतिग्रस्त योजनाओं की मरम्मत की जाएगी।
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