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एनआईटी के बच्चे हॉस्टल से ले जाने लगे सामान
Updated Wed, 05 Dec 2018 10:21 PM IST
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श्रीनगर। एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड के एमएनआईटी जयपुर मेें सेटेलाइट कैंपस चलाने जाने के केंद्र सरकार के निर्णय के बाद छात्र-छात्राएं अपना सामान समेटकर जाने लगे हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितने छात्र-छात्राओं को एमएचआरडी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) जयपुर में पढ़ने की इजाजत देता है। एमएचआरडी जयपुर में पढ़ाई के संबंध में छात्रों से शपथपत्र भरवा रहा है कि वह जयपुर जाने के इच्छुक है कि नहीं। जो छात्र जयपुर नहीं जाना चाहेंगे, वह श्रीनगर में बाकी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं।
स्थायी कैंपस, अस्थायी कैंपस को सुविधाजनक स्थान में स्थानांतरित करने और अन्य सुविधाओं की मांग के लिए चार अक्तूबर से एनआईटी उत्तराखंड के छात्र-छात्राएं कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान ज्यादातर छात्र-छात्राएं 23 अक्तूबर को हॉस्टल छोड़कर अपने घर चले गए। 27 नवंबर से कई छात्र-छात्राएं जंतर-मंतर दिल्ली में धरने पर बैठ गए।
इसके बाद एमएचआरडी ने अस्थायी कैंपस की मांग का हल निकालते हुए एमएनआईटी (मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) जयपुर में 500 छात्र-छात्राओं के लिए कक्षाएं चलाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में एमएचआरडी छात्र-छात्राओं से निर्धारित प्रारूप पर सहमति पत्र भरवा रहा है। एमएचआरडी का आदेश आने के बाद कई छात्र-छात्राएं यहां आकर अपना सामान ले जाने लगे हैं।
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सीजीपीए के आधार पर होगा फैसला
श्रीनगर। एमएचआरडी ने एमएनआईटी जयपुर में तीन साल तक चलने वाले सेटेलाइट कैंपस में 500 छात्र-छात्राओं की क्षमता निर्धारित की है, जहां एनआईटी उत्तराखंड के बीटेक के प्रथम से तृतीय वर्ष और एमटेक प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राएं पढ़ाई करेंगे। छात्रों की संख्या ज्यादा होने पर सीजीपीए (अंक) के आधार चयन होगा। बताया जा रहा है कि कई छात्र-छात्राएं जयपुर जाने के इच्छुक नहीं है। वह यहीं रहकर कोर्स पूरा करना चाहते हैं।
दोनों जगह पढ़ानी होंगी कक्षाएं
श्रीनगर। श्रीनगर और जयपुर दो स्थानों में कैंपस चलने से शिक्षकों की मुश्किल बढ़नी तय हैं। शिक्षकों को कुछ दिन जयपुर और कुछ दिन श्रीनगर में कक्षाएं पढ़ानी होंगी।
कोट--------
बच्चों का सीधे एमएचआरडी से पत्राचार हो रहा है। इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है। बच्चे सहमति पत्र भर रहे हैं। 10-15 दिन बाद स्पष्ट हो पाएगा कि कितने छात्र जयपुर जाएंगे।
- प्रो. आरबी पटेल, कार्यवाहक निदेशक, एनआईटी उत्तराखंड।
स्थायी कैंपस, अस्थायी कैंपस को सुविधाजनक स्थान में स्थानांतरित करने और अन्य सुविधाओं की मांग के लिए चार अक्तूबर से एनआईटी उत्तराखंड के छात्र-छात्राएं कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान ज्यादातर छात्र-छात्राएं 23 अक्तूबर को हॉस्टल छोड़कर अपने घर चले गए। 27 नवंबर से कई छात्र-छात्राएं जंतर-मंतर दिल्ली में धरने पर बैठ गए।
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इसके बाद एमएचआरडी ने अस्थायी कैंपस की मांग का हल निकालते हुए एमएनआईटी (मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) जयपुर में 500 छात्र-छात्राओं के लिए कक्षाएं चलाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में एमएचआरडी छात्र-छात्राओं से निर्धारित प्रारूप पर सहमति पत्र भरवा रहा है। एमएचआरडी का आदेश आने के बाद कई छात्र-छात्राएं यहां आकर अपना सामान ले जाने लगे हैं।
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सीजीपीए के आधार पर होगा फैसला
श्रीनगर। एमएचआरडी ने एमएनआईटी जयपुर में तीन साल तक चलने वाले सेटेलाइट कैंपस में 500 छात्र-छात्राओं की क्षमता निर्धारित की है, जहां एनआईटी उत्तराखंड के बीटेक के प्रथम से तृतीय वर्ष और एमटेक प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राएं पढ़ाई करेंगे। छात्रों की संख्या ज्यादा होने पर सीजीपीए (अंक) के आधार चयन होगा। बताया जा रहा है कि कई छात्र-छात्राएं जयपुर जाने के इच्छुक नहीं है। वह यहीं रहकर कोर्स पूरा करना चाहते हैं।
दोनों जगह पढ़ानी होंगी कक्षाएं
श्रीनगर। श्रीनगर और जयपुर दो स्थानों में कैंपस चलने से शिक्षकों की मुश्किल बढ़नी तय हैं। शिक्षकों को कुछ दिन जयपुर और कुछ दिन श्रीनगर में कक्षाएं पढ़ानी होंगी।
कोट--------
बच्चों का सीधे एमएचआरडी से पत्राचार हो रहा है। इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है। बच्चे सहमति पत्र भर रहे हैं। 10-15 दिन बाद स्पष्ट हो पाएगा कि कितने छात्र जयपुर जाएंगे।
- प्रो. आरबी पटेल, कार्यवाहक निदेशक, एनआईटी उत्तराखंड।