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तीन दिवसीय नंदा-स्वनुल कौथिग शुरु, नंदा भक्तों ने मांगी मनौतियां
Updated Wed, 21 Nov 2018 10:43 PM IST
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जोशीमठ। उर्गम घाटी में 42 साल बाद बुधवार से तीन दिवसीय नंदा-स्वनुल कौथिग का आगाज हुआ। इस दौरान ध्याणियों और भक्तों ने झुमेलो और चांचड़ी नृत्य और गीत की प्रस्तुति देकर मां नंदा और स्वनुल देवी का आह्वान किया। नंदा भक्तों ने मां नंदा और स्वनुल देवी के दर्शन कर मनौतियां मांगीं। क्षेत्र की सुख-शांति के लिए यह आयोजन किया जाता है।
बुधवार को सुबह सात बजे फ्यूंलानारायण मंदिर में मां नंदा और स्वनुल देवी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। पुजारी आलम सिंह चौहान ने मां नंदा का शृंगार किया। अपराह्न ग्यारह बजे भक्तों के साथ मां नंदा और मां स्वनुल ने उर्गम घाटी स्थित घंटाकर्ण मंदिर के लिए प्रस्थान किया। करीब आठ किलोमीटर की पैदल दूरी नापकर दोनों देव डोलियां अपराह्न तीन बजे घंटाकर्ण मंदिर पहुंचीं। इसके बाद यहां नंदा-स्वनुल कौथिग का आगाज हुआ। ग्रामीणों ने मां नंदा और स्वनुल देवी का आह्वान कर उनसे क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। घंटाकर्ण मंदिर में जाख देवता, चंडिका, भूमियाल, दाणी देवता और घंटाकर्ण के निशाण भी लाए गए और उन्हें मंदिर परिसर में स्थापित किया गया। पुजारी मान सिंह ने सभी देवताओं की पंच पूजा की। इसके बाद घंटाकर्ण देवता ने पश्वा पर अवतरित होकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। कौथिग समिति के अध्यक्ष राजेंद्र रावत ने बताया कि नंदा-स्वनुल कौथिग प्रत्येक पांच साल में आयोजित किया जाता था, लेकिन किन्हीं कारणों से लंबे समय से कौथिग का आयोजन नहीं हो पा रहा था। इस वर्ष युवाओं की पहल पर तीन दिवसीय कौथिग का आयोजन किया जा रहा है। इस मौके पर ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह नेगी, वीरेश्वर नेगी, कुंवर सिंह, रघुवीर सिंह, कुंवर सिंह चौहान, बीएस रावत, हीरा सिंह, जगत सिंह पंवार आदि मौजूद थे।
राठ में 33 वर्ष बाद शुरू हुई उफरैं देवी की जात
पौड़ी। राठ क्षेत्र में मां उफरैं देवी की जात बुधवार से शुरू हुई। क्षेत्र में 33 साल बाद शुरू हुई जात में मां का आशीर्वाद लेने के लिए विभिन्न गांवों से लोग पहुंच रहे हैं।
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राठ क्षेत्र के चौंरा गांव में मां उफरैं देवी विराजमान हैं। यहां से मां की जात शुरू होकर मायके मैढाण गांव पहुंची। मायके में दिशा-धियाण (बेटी-बहू) को आशीर्वाद देकर जात ने अन्य गांवों के लिए प्रस्थान किया। जात क्षेत्र के डांडा, सौंठ, कुचोली, रिस्ती, तरपालीसैण, पैठाणी, स्योली, खंड, पल्लीसैंण, बड़ेथ सहित विभिन्न गांवों के भ्रमण के बाद 15 दिसंबर को चौंरा गांव वापस पहुंचेगी। मां उफरैं देवी के गांव पहुंचने पर महायज्ञ और भंडारे का आयोजन किया जाएगा। चौंरा गांव के गब्बर सिंह ने बताया कि सनातन समय से मां उफरैं देवी की जात होती थी, लेकिन तीन दशकों से यह जात किन्हीं कारणों से नहीं हो पा रही थी। क्षेत्र के युवाओं व ग्रामीणों के सहयोग से 33 साल बाद जात शुरू की गई है। जात में मां के दर्शन, पूजन व आशीर्वाद के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। जात के दौरान मदन सिंह, दौलत सिंह, जगत सिंह, चैत सिंह और दयाल सिंह आदि शामिल रहे।
बुधवार को सुबह सात बजे फ्यूंलानारायण मंदिर में मां नंदा और स्वनुल देवी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। पुजारी आलम सिंह चौहान ने मां नंदा का शृंगार किया। अपराह्न ग्यारह बजे भक्तों के साथ मां नंदा और मां स्वनुल ने उर्गम घाटी स्थित घंटाकर्ण मंदिर के लिए प्रस्थान किया। करीब आठ किलोमीटर की पैदल दूरी नापकर दोनों देव डोलियां अपराह्न तीन बजे घंटाकर्ण मंदिर पहुंचीं। इसके बाद यहां नंदा-स्वनुल कौथिग का आगाज हुआ। ग्रामीणों ने मां नंदा और स्वनुल देवी का आह्वान कर उनसे क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। घंटाकर्ण मंदिर में जाख देवता, चंडिका, भूमियाल, दाणी देवता और घंटाकर्ण के निशाण भी लाए गए और उन्हें मंदिर परिसर में स्थापित किया गया। पुजारी मान सिंह ने सभी देवताओं की पंच पूजा की। इसके बाद घंटाकर्ण देवता ने पश्वा पर अवतरित होकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। कौथिग समिति के अध्यक्ष राजेंद्र रावत ने बताया कि नंदा-स्वनुल कौथिग प्रत्येक पांच साल में आयोजित किया जाता था, लेकिन किन्हीं कारणों से लंबे समय से कौथिग का आयोजन नहीं हो पा रहा था। इस वर्ष युवाओं की पहल पर तीन दिवसीय कौथिग का आयोजन किया जा रहा है। इस मौके पर ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह नेगी, वीरेश्वर नेगी, कुंवर सिंह, रघुवीर सिंह, कुंवर सिंह चौहान, बीएस रावत, हीरा सिंह, जगत सिंह पंवार आदि मौजूद थे।
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राठ में 33 वर्ष बाद शुरू हुई उफरैं देवी की जात
पौड़ी। राठ क्षेत्र में मां उफरैं देवी की जात बुधवार से शुरू हुई। क्षेत्र में 33 साल बाद शुरू हुई जात में मां का आशीर्वाद लेने के लिए विभिन्न गांवों से लोग पहुंच रहे हैं।
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राठ क्षेत्र के चौंरा गांव में मां उफरैं देवी विराजमान हैं। यहां से मां की जात शुरू होकर मायके मैढाण गांव पहुंची। मायके में दिशा-धियाण (बेटी-बहू) को आशीर्वाद देकर जात ने अन्य गांवों के लिए प्रस्थान किया। जात क्षेत्र के डांडा, सौंठ, कुचोली, रिस्ती, तरपालीसैण, पैठाणी, स्योली, खंड, पल्लीसैंण, बड़ेथ सहित विभिन्न गांवों के भ्रमण के बाद 15 दिसंबर को चौंरा गांव वापस पहुंचेगी। मां उफरैं देवी के गांव पहुंचने पर महायज्ञ और भंडारे का आयोजन किया जाएगा। चौंरा गांव के गब्बर सिंह ने बताया कि सनातन समय से मां उफरैं देवी की जात होती थी, लेकिन तीन दशकों से यह जात किन्हीं कारणों से नहीं हो पा रही थी। क्षेत्र के युवाओं व ग्रामीणों के सहयोग से 33 साल बाद जात शुरू की गई है। जात में मां के दर्शन, पूजन व आशीर्वाद के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। जात के दौरान मदन सिंह, दौलत सिंह, जगत सिंह, चैत सिंह और दयाल सिंह आदि शामिल रहे।