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भगवान कुबेर और उद्धव शीतकालीन गद्दी स्थल पांडुकेश्वर में हुए विराजमान
Updated Wed, 21 Nov 2018 10:43 PM IST
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जोशीमठ। शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद बुधवार को भगवान कुबेर और उद्धव अपने शीतकालीन पूजा स्थल पांडुकेश्वर में विराजमान हो गए। उद्धव योगध्यान बदरी मंदिर और भगवान कुबेर अपने कुबेर मंदिर में विराजमान हुए। वहीं, आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी बृहस्पतिवार को जोशीमठ नृसिंह मंदिर पहुुंचेगी। पांडुकेश्वर में श्रद्धालुओं ने उद्धव और कुबेर की डोली के साथ ही रावल (बदरीनाथ के मुख्य पुजारी) ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी और धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल का फूल मालाओं से स्वागत किया। बुधवार को बदरीनाथ धाम में पूजा-अर्चना के बाद भगवान कुबेर, उद्धव और आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी को लेकर सैकड़ों श्रद्धालु सुबह दस बजे पांडुकेश्वर के लिए रवाना हुए। तीनों उत्सव डोलियां बदरीनाथ के रावल, धर्माधिकारी और सैकड़ों श्रद्धालुओं के साथ दोपहर 12 बजे योगध्यान मंदिर पांडुकेश्वर पहुंचीं। यहां ग्रामीण और श्रद्धालुओं ने देव डोलियों का फूल मालाओं के साथ स्वागत किया। यहां आयोजित पूजा के बाद कुबेर की मूर्ति कुबेर मंदिर और उद्धव जी की मूर्ति को योगध्यान बदरी मंदिर के गर्भगृह में प्रतिष्ठापित कर दिया गया। अब आगामी छह माह तक भगवान कुबेर और उद्धव की शीतकालीन पूजा पांडुकेश्वर में ही होगी। आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के साथ बदरीनाथ के रावल बुधवार को पांडुकेश्वर में रात्रि प्रवास के बाद बृहस्पतिवार को जोशीमठ पहुंचेंगे। यहां नृसिंह मंदिर में छह माह तक आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी की पूजा होती है। इस मौके पर बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह, रामनारायण भंडारी, अरविंद शर्मा, मनोरमा मेहता, रमा भंडारी, ऊषा भंडारी के साथ ही कई तीर्थयात्री मौजूद थे।