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ग्यास पर्व : मंदिरों में बही आस्था की बयार
Updated Tue, 20 Nov 2018 02:15 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, साहिया/नागथात/चकराता
ग्यास पर्व पर सोमवार को डिमऊ, बोहरी और गड़ोल गांव में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में लोगों ने परशुराम और मां रेणुका की पालकी के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिरों का फूल-मालाओं से विशेष शृंगार किया गया।
बोहरी गांव में सुबह चार बजे मुख्य पुजारी गुलाब सिंह चौहान ने परशुराम और मां रेणुका की विशेष पूजा-अर्चना की। करीब 10 बजे ढोल-दमाऊ और रणसिंगा की धुनों पर चांदी और सोने की पालकियों में सवार परशुराम और मां रेणुका की प्रतिमाओं को मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाया गया। दोनों पालकियों को मंदिर से करीब एक किमी दूर बोईतोगी स्थित देव स्रोत में स्नान के लिए ले जाया गया। लोगों ने ढोल-दमाऊ की थाप पर जमकर हारूल, तांदी और झैंता नृत्य किया। दोपहर करीब 12 बजे मूर्तियों को मंदिर में स्थापित किया गया। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष अमर सिंह चौहान, बजीर रण सिंह चौहान, भंडारी खजान सिंह चौहान, देव माली चतर सिंह चौहान, बारू सिंह चौहान, किशन सिंह, पं. राजकुुमार शर्मा, महेंद्र सिंह चौहान, सरदार सिंह चौहान, संतोष वर्मा, गंभीर वर्मा आदि मौजूद रहे।
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देव पालकी पर की फूलों और अखरोटों की बारिश
नागथात क्षेत्र के गडोल गांव में भी ग्यास पर्व पर आस्था की बयार बही। गांव स्थित मंदिर परिसर में परशुराम देवता की पालकी के दर्शन कर लोगों ने सुख-समृद्धि की कामना की। लोगों ने देव पालकी पर फूलों, चावलों और अखरोटों की बारिश की। देव पालकी को कंधा देने के लिए लोग आतुर नजर आए। इस मौके पर देव माली अमर सिंह राठौर, मंदिर समिति अध्यक्ष श्याम सिंह राठौर, अनिल सिंह, अतर सिंह, दिनेश, राजवीर सिंह, अर्जुन सिंह, महेंद्र सिंह, सूरत सिंह आदि मौजूद रहे।
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शुभ मुहूर्त में निकाली गई देव पालकियां
डिमऊ स्थित परशुराम मंदिर में भी ग्यास पर्व धूमधाम से मनाया गया। सुबह देवलग्नानुुसार सात बजे देव पालकियों को मंदिर के गृभगृह से बाहर निकाला गया। इसके बाद पालकियों को स्नान के लिए ले जाया गया। देव पालकी के दर्शन कर लोगों ने सुख-समृद्धि की कामना की। मालूम हो कि डिमऊ स्थित यह मंदिर 17वीं शताब्दी में मनाया गया था। मंदिर में देव दर्शन के लिए दूर-दराज से लोग यहां पहुंचते हैं। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष जवाहर सिंह चौहान, पुजारी ठेमिया शर्मा, संतराम, सीताराम चौहान, अतर सिंह, सियाराम चौहान, मुन्ना सिंह, नागचंद चौहान, जीत सिंह, सूरत कुंवर, जालम सिंह, मनीराम, वीरेंद्र चौहान, कुंदन चौहान आदि मौजूद रहे।
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ग्यास पर्व पर सोमवार को डिमऊ, बोहरी और गड़ोल गांव में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में लोगों ने परशुराम और मां रेणुका की पालकी के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिरों का फूल-मालाओं से विशेष शृंगार किया गया।
बोहरी गांव में सुबह चार बजे मुख्य पुजारी गुलाब सिंह चौहान ने परशुराम और मां रेणुका की विशेष पूजा-अर्चना की। करीब 10 बजे ढोल-दमाऊ और रणसिंगा की धुनों पर चांदी और सोने की पालकियों में सवार परशुराम और मां रेणुका की प्रतिमाओं को मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाया गया। दोनों पालकियों को मंदिर से करीब एक किमी दूर बोईतोगी स्थित देव स्रोत में स्नान के लिए ले जाया गया। लोगों ने ढोल-दमाऊ की थाप पर जमकर हारूल, तांदी और झैंता नृत्य किया। दोपहर करीब 12 बजे मूर्तियों को मंदिर में स्थापित किया गया। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष अमर सिंह चौहान, बजीर रण सिंह चौहान, भंडारी खजान सिंह चौहान, देव माली चतर सिंह चौहान, बारू सिंह चौहान, किशन सिंह, पं. राजकुुमार शर्मा, महेंद्र सिंह चौहान, सरदार सिंह चौहान, संतोष वर्मा, गंभीर वर्मा आदि मौजूद रहे।
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देव पालकी पर की फूलों और अखरोटों की बारिश
नागथात क्षेत्र के गडोल गांव में भी ग्यास पर्व पर आस्था की बयार बही। गांव स्थित मंदिर परिसर में परशुराम देवता की पालकी के दर्शन कर लोगों ने सुख-समृद्धि की कामना की। लोगों ने देव पालकी पर फूलों, चावलों और अखरोटों की बारिश की। देव पालकी को कंधा देने के लिए लोग आतुर नजर आए। इस मौके पर देव माली अमर सिंह राठौर, मंदिर समिति अध्यक्ष श्याम सिंह राठौर, अनिल सिंह, अतर सिंह, दिनेश, राजवीर सिंह, अर्जुन सिंह, महेंद्र सिंह, सूरत सिंह आदि मौजूद रहे।
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शुभ मुहूर्त में निकाली गई देव पालकियां
डिमऊ स्थित परशुराम मंदिर में भी ग्यास पर्व धूमधाम से मनाया गया। सुबह देवलग्नानुुसार सात बजे देव पालकियों को मंदिर के गृभगृह से बाहर निकाला गया। इसके बाद पालकियों को स्नान के लिए ले जाया गया। देव पालकी के दर्शन कर लोगों ने सुख-समृद्धि की कामना की। मालूम हो कि डिमऊ स्थित यह मंदिर 17वीं शताब्दी में मनाया गया था। मंदिर में देव दर्शन के लिए दूर-दराज से लोग यहां पहुंचते हैं। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष जवाहर सिंह चौहान, पुजारी ठेमिया शर्मा, संतराम, सीताराम चौहान, अतर सिंह, सियाराम चौहान, मुन्ना सिंह, नागचंद चौहान, जीत सिंह, सूरत कुंवर, जालम सिंह, मनीराम, वीरेंद्र चौहान, कुंदन चौहान आदि मौजूद रहे।